OMG!90 हजार की सैलरी, फिर भी नहीं बचा पैसा, जानिए कैसे तैयार किया खुद के लिए कर्ज का जाल
TV9 Bharatvarsh July 06, 2026 12:43 AM

बीमारी सिर्फ इंसान की सेहत पर असर नहीं डालती, कई बार पूरे परिवार की आर्थिक हालत भी हिला देती है. जब अचानक बड़ा मेडिकल खर्च सामने आ जाता है, तो कई लोगों के पास कर्ज लेने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता. लेकिन अगर उस कर्ज को समय पर संभाला न जाए, तो वही धीरे-धीरे एक ऐसे जाल में बदल जाता है, जिससे बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है. ऐसी ही एक कहानी पुणे में रहने वाले 36 साल के एक व्यक्ति की है, जिसे इन्वेस्टमेंट एडवाइजर विवेक एस जी ने लिंक्डइन पर शेयर किया. यह कहानी सोशल मीडिया पर इसलिए चर्चा में आ गई क्योंकि इसमें बताया गया है कि कैसे एक जिम्मेदार और समझदारी से खर्च करने वाला व्यक्ति भी मेडिकल इमरजेंसी की वजह से भारी कर्ज में फंस गया.

विवेक के मुताबिक, ये व्यक्ति पुणे में एक ऑपरेशंस मैनेजर के तौर पर काम करता है और उसकी हर महीने करीब 90 हजार रुपये की सैलरी थी. तीन साल पहले तक उसकी फाइनेंशियल कंडीशन नॉर्मल थी. वह इनकम के हिसाब से खर्च करता था और किसी तरह घर का बजट संभाल लेता था. हालांकि, महीने के अंत में उसके पास बहुत ज्यादा बचत नहीं बचती थी.
उसकी मासिक जरूरतों और खर्चों पर करीब 82 हजार रुपये खर्च हो जाते थे.

कैसे बिगड़ी ये कंडीशन

इसी दौरान उसके पिता की तबीयत अचानक खराब हो गई और उनकी एक गंभीर सर्जरी करानी पड़ी. इस ऑपरेशन पर करीब 5 लाख रुपये का खर्च आया. परिवार के पास इतनी बड़ी रकम जमा नहीं थी, इसलिए उसने 14 प्रतिशत ब्याज पर 5 लाख रुपये का पर्सनल लोन ले लिया. इस लोन की वजह से हर महीने 13,663 रुपये की EMI शुरू हो गई. पहले से ही घर का बजट काफी तंग था, ऊपर से नई EMI जुड़ने के बाद उसकी मासिक आय और खर्च का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया.

अब हालत यह हो गई कि जरूरी घरेलू खर्च जैसे राशन, बिजली का बिल, बच्चों की जरूरतें और रोजमर्रा के अन्य खर्च पूरे करने के लिए उसे क्रेडिट कार्ड का सहारा लेना पड़ा. शुरुआत में उसे लगा कि कुछ समय बाद स्थिति संभल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. धीरे-धीरे उसके क्रेडिट कार्ड का बकाया बढ़ते-बढ़ते 4 लाख रुपये तक पहुंच गया. सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि क्रेडिट कार्ड पर सालाना करीब 35 से 40 प्रतिशत तक ब्याज लग रहा था. हर महीने सिर्फ न्यूनतम भुगतान करने से मूल रकम कम होने की बजाय और बढ़ती चली गई.

खराब हुआ क्रेडिट स्कोर

जब उसे लगा कि अब इतने सारे अलग-अलग कर्ज संभालना मुश्किल हो रहा है, तो उसने एक और फैसला लिया. उसने पुराने कर्ज और क्रेडिट कार्ड के बकाये को चुकाने के लिए 6 लाख रुपये का नया लोन लिया. उसकी सोच थी कि सभी कर्ज एक जगह आ जाएंगे और EMI देना आसान हो जाएगा, लेकिन तब तक उसका क्रेडिट स्कोर काफी खराब हो चुका था. खराब क्रेडिट स्कोर की वजह से उसे नया लोन भी पहले से ज्यादा महंगे ब्याज पर मिला. इस बार ब्याज दर 18 प्रतिशत थी और हर महीने 17,625 रुपये की नई EMI शुरू हो गई.

हालात सुधरने की बजाय और बिगड़ते चले गए. अलग-अलग लोन और क्रेडिट कार्ड की देनदारियों को मिलाकर दो साल के अंदर उसका कुल कर्ज 15 लाख रुपये से ज्यादा हो गया. सबसे चिंताजनक बात यह थी कि उसकी हर महीने की कुल EMI लगभग 51 हजार रुपये तक पहुंच गई. यानी उसकी 90 हजार रुपये की सैलरी में से करीब 57 प्रतिशत रकम सिर्फ कर्ज चुकाने में चली जाती थी. बाकी पैसे में घर का खर्च चलाना बेहद मुश्किल हो गया.

विवेक एस जी का कहना है कि ज्यादातर लोग इसी तरह कर्ज के जाल में फंसते हैं. शुरुआत सिर्फ एक लोन से होती है, लेकिन EMI बढ़ने के कारण हाथ में बचने वाला पैसा कम हो जाता है. फिर रोजमर्रा के खर्च पूरे करने के लिए दूसरा कर्ज लेना पड़ता है. इसके बाद पुराने कर्ज चुकाने के लिए नया लोन लिया जाता है और यही सिलसिला धीरे-धीरे बड़ा आर्थिक संकट बन जाता है. उन्होंने यह भी बताया कि क्रेडिट कार्ड का ज्यादा इस्तेमाल ऐसी स्थिति को और खराब कर देता है. क्योंकि इन पर ब्याज दर काफी ऊंची होती है. अगर समय पर पूरा भुगतान नहीं किया जाए, तो लेट फीस और ब्याज मिलकर बकाया राशि को तेजी से बढ़ाते रहते हैं. साथ ही लगातार भुगतान में देरी होने से क्रेडिट स्कोर भी गिरता है, जिससे भविष्य में मिलने वाले लोन महंगे हो जाते हैं.

क्या दी आखिर बंदे ने सलाह

विवेक के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति की कुल EMI उसकी मासिक आय के 40 प्रतिशत से ज्यादा हो जाए, तो इसे खतरे की घंटी समझना चाहिए. ऐसे समय में नए लोन लेने से बचना जरूरी है. उन्होंने सलाह दी कि सबसे पहले अपने सभी कर्जों की पूरी लिस्ट बनाएं. उसके बाद जिस कर्ज पर सबसे ज्यादा ब्याज लग रहा है, उसे प्रायोरिटी के आधार पर खत्म करने की कोशिश करें. इससे कुल ब्याज का बोझ धीरे-धीरे कम होगा और आर्थिक स्थिति संभालना आसान हो सकता है.

इस पोस्ट पर कई लोगों ने अपनी राय भी रखी. कई यूजर्स का कहना था कि हर परिवार को अपनी आय के हिसाब से एक मजबूत इमरजेंसी फंड जरूर बनाना चाहिए ताकि अचानक आने वाले मेडिकल खर्च के लिए महंगे लोन लेने की नौबत न आए.

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