E20 पेट्रोल का वाहनों पर प्रभाव: ARAI रिपोर्ट में इंजन और माइलेज को लेकर अहम खुलासे,जानिए ARAI रिपोर्ट का पूरा सच|
Himachali Khabar Hindi July 07, 2026 05:42 PM

भारत में इथेनॉल मिश्रित ईंधन के बढ़ते चलन के बीच E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया की एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट ने ई20 पेट्रोल के उपयोग और उसके वाहनों पर पड़ने वाले तकनीकी प्रभावों के संबंध में कई जानकारियां साझा की हैं। देशभर में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल के मिश्रण को लेकर जहां एक ओर सरकार इसे सुरक्षित बता रही है, वहीं दूसरी ओर वाहन मालिकों के बीच इंजन और माइलेज को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। ARAI की यह रिपोर्ट सरकार और वाहन निर्माता कंपनियों के बीच एक महत्वपूर्ण तकनीकी दस्तावेज के रूप में देखी जा रही है।

रिपोर्ट में मुख्य रूप से यह बताया गया है कि E10कम्पैटिबल वाहनों में E20 पेट्रोल का उपयोग करने से उनके फ्यूल सिस्टम से जुड़े रबर पार्ट्स पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसमें विशेष रूप से होज, सील, गैस्केट और ओरिंग जैसे हिस्सों का उल्लेख किया गया है। अध्ययन के अनुसार, इथेनॉल की उच्च सांद्रता के कारण इन रबर आधारित पुर्जों में समय के साथ खराबी देखी गई है, जिसके चलते भविष्य में इन्हें बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं है, लेकिन यह ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए एक मानक दिशानिर्देश का कार्य कर रही है।

इंजन की कार्यक्षमता पर पड़ रहे असर का विश्लेषण करते हुए रिपोर्ट में BSVI टर्बोचार्ज्ड इंजनों के संबंध में विशेष टिप्पणी की गई है। अध्ययन के दौरान किए गए ‘4व्हीलर इंजन ड्यूरेबिलिटी टेस्ट’ में यह पाया गया कि जहां BSIV इंजन E20 के साथ संतोषजनक प्रदर्शन करते रहे, वहीं BSVI टर्बोचार्ज्ड इंजन में 265 घंटे की निरंतर टेस्टिंग के बाद तकनीकी समस्याएं सामने आईं। एक अन्य परीक्षण में, एक निर्माता के इंजन ने 400 घंटे तक बिना किसी समस्या के कार्य किया, जबकि दूसरे निर्माता के इंजन में 809 घंटे के परीक्षण के बाद एग्जॉस्ट वाल्व में थर्मोमैकेनिकल फेल्योर की स्थिति देखी गई। जानकारों के अनुसार, जब इंजन अत्यधिक गर्मी और तीव्र मैकेनिकल मूवमेंट के संपर्क में आता है, तो एग्जॉस्ट वॉल्व मुड़ सकते हैं, उनमें दरारें आ सकती हैं या वे टूट सकते हैं।

दूसरी ओर, रिपोर्ट ने दोपहिया वाहनों के लिए राहत भरी खबर दी है। तीन प्रमुख दोपहिया वाहन निर्माताओं द्वारा किए गए परीक्षणों में E20 ईंधन के साथ कोई गंभीर तकनीकी समस्या नहीं पाई गई। इन वाहनों के इंजनों का प्रदर्शन सामान्य रहा और उनके मेटल पार्ट्स पर भी कोई बुरा असर नहीं देखा गया। साथ ही, टेस्ट की गई सभी श्रेणियों की गाड़ियों में यह पाया गया कि E10कम्पैटिबल वाहनों में E20 ईंधन का उपयोग करने पर भी टेलपाइप से होने वाला उत्सर्जन कानूनी मानकों के भीतर ही रहा है।

माइलेज को लेकर किए गए अध्ययन में एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह निकला है कि E20 पेट्रोल का उपयोग करने पर ईंधन की खपत E10 की तुलना में 2 से 6 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। सरल शब्दों में कहें तो, वाहन का माइलेज इस अनुपात में कम हो सकता है। यह प्रभाव अलगअलग वाहनों की इंजन क्षमता और डिजाइन के अनुसार भिन्न हो सकता है। अंततः, ARAI की यह रिपोर्ट वाहनों के तकनीकी अनुकूलन और भविष्य के ईंधन मानकों को समझने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह स्पष्ट करता है कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग के साथ वाहनों के रखरखाव और तकनीकी बदलावों पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होगा।

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