Gujarat : सूरत में बारिश का कहर, 6 घंटे में 10 इंच बारिश से शहर जलमग्न, 2100 लोगों का रेस्क्यू, रेड अलर्ट जारी
Webdunia Hindi July 08, 2026 01:43 AM

सूरत में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। सरथाणा इलाके में स्थित आदर्श निर्वासित स्कूल में पानी भर जाने के कारण वहां 37 बच्चे और स्कूल का स्टाफ फंस गया था, जिन्हें सूरत पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इसी तरह, व्रजचौक इलाके में भारी जलजमाव के कारण एक एसटी (ST) बस बीच रास्ते में फंस गई। फायर ब्रिगेड की टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर बस में सवार २८ यात्रियों को ट्रैक्टर की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला। व्यापक जलजमाव: 2100 लोगों का रेस्क्यू और पानी में फंसी एम्बुलेंस

शहर के वेसु इलाके में स्थित प्रसिद्ध खाटूश्याम मंदिर के पास सड़कों पर तीन से चार फीट तक पानी भर गया, जिसमें मरीजों की सेवा में लगी एक एम्बुलेंस भी पानी के तेज बहाव में फंस गई। मूसलाधार बारिश के चलते निचले इलाकों में बाढ़ जैसी आपातकालीन स्थिति पैदा हो गई है। प्रशासन द्वारा युद्ध स्तर पर राहत कार्य शुरू कर अलग-अलग इलाकों से लगभग 2100 लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। मुख्य रास्ते पानी में डूबने के कारण वाहन फंसे हुए हैं और जगह-जगह भारी ट्रैफिक जाम देखने को मिल रहा है।

पूर्णा नदी में उफान और प्रशासन द्वारा 'रेड अलर्ट' की घोषणा

डांग, सूरत और तापी जिलों में हो रही अत्यधिक भारी बारिश के कारण नवसारी की पूर्णा नदी में पानी की भारी आवक हुई है। नदी का जलस्तर 19 फीट के करीब पहुंचने से बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है, जिसके चलते नदी तटीय इलाकों में कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए गए हैं। सूरत जिला कलेक्टर ने 'रेड अलर्ट' जारी करते हुए छात्रों की सुरक्षा के मद्देनजर सभी स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ियों को आगामी आदेश तक बंद रखने का फैसला किया है। साथ ही कलेक्टर ने नागरिकों से पैनिक न होने और बिना वजह घरों से बाहर न निकलने की अपील की है।

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प्रभारी पुलिस कमिश्नर खुद उतरे पेट्रोलिंग पर; कीम गांव के मंदिर डूबे

हालात की गंभीरता को देखते हुए सूरत के प्रभारी पुलिस कमिश्नर वाबांग जामीर खुद ग्राउंड जीरो पर उतरे और निचले इलाकों में घूमकर स्थिति का जायजा लिया। दूसरी ओर, सूरत के कीम गांव में स्थित ऐतिहासिक हरिहरेश्वर महादेव, राधाकृष्ण और अंबाजी मंदिर के गर्भगृह तक पानी पहुंच गया है, जिससे शिवलिंग भी जलमग्न हो गया है। पिछले तीन साल से कमजोर ड्रेनेज सिस्टम के कारण पैदा होने वाली इस समस्या को लेकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश है।

बालेश्वर गांव का संपर्क टूटा: प्राकृतिक जल निकासी बंद होने से बढ़ी मुसीबत

भारी बारिश के चलते बालेश्वर गांव की ३२ गंगा खाड़ी में पानी का बहाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। इस बाढ़ के कारण बालेश्वर से नेशनल हाईवे-48 और टुंडी-बगुमरा गांव को जोड़ने वाली सड़कें पूरी तरह पानी में डूब गई हैं, जिससे गांव का संपर्क टूट गया है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, हाईवे पर हुए अंधाधुंध निर्माण और प्राकृतिक जल निकासी के रास्तों (कांस) के बंद होने के कारण हर साल मानसून में यह स्थिति पैदा होती है। यदि बारिश इसी तरह जारी रही, तो खाड़ी किनारे बने अन्य 45 घरों का संपर्क भी पूरी तरह कट जाने की आशंका है।

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