अमेरिका और ईरान के बीच कुछ दिनों की शांति के बाद एक फिर बारूद बरसना शुरू हो गया है. जिसके बाद पश्चिम एशिया से फिर ऐसी विध्वंसक तस्वीरें आ रही हैं. जिन्हें देखकर कोई भी सहम जाए. अमेरिकी सेना द्वारा बुधवार को किए गए हमलों के बाद युद्ध वाली चिंगारी नहीं बुझी, बल्कि और भड़क गई. अमेरिका लगातार बम बरसाकर ईरान पर दबाव बढ़ा रहा है. लेकिन ईरान झूकने की बजाए उसी भाषा में दोगुनी ताकत से जवाब दे रहा है.
अब इन दोनों देशों के बीच डिप्लोमेसी का रास्ता लगभग बंद हो चुका हैऔर महायुद्ध का बटन ON है. जिसमें मिसाइलें बरस रही हैं, ड्रोन उड़ रहे हैं और हजारों टन के बम गिराए जा रहे हैं. ईरान से जैसी तस्वीरें मार्च के महीने में आ रही थीं, कुछ-कुछ वैसी ही तस्वीरें पिछले दो दिन से आ रही हैं. लेकिन बात सिर्फ ईरान और अमेरिकी की नहीं है. इस जंग से पूरी दुनिया का ब्लड प्रेशर बढ़ रहा है. क्योंकि अब ये भविष्यवाणियां होने लगी है कि ये एक तरह का आर्थिक विश्व युद्ध बन सकता है, जिसका रिमोट इस वक्त ट्रंप और मुज्तबा के हाथ में है.
अगर वक्त रहते इस जंग को बंद नहीं किया गया तो ये दुनिया का सबसे महंगा युद्ध साबित होगा. कहा जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. वो अपनी युद्ध वाली जिद में दुनिया की अर्थव्यवस्था को जला देना चाहते हैं. इसलिए ईरान पर लगातार दूसरे दिन बड़े हमले किए गए, वो भी पूरी दोगुनी ताकत से.
ईरान के 10 शहरों और 5 द्वीपों पर बरसाए बमअमेरिकी सेना ने 19 युद्धपोतों के साथ ईरान में 90 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए. ईरान के 10 शहरों और 5 द्वीपों को टारगेट किया गया. खास बात ये रही कि नए हमले ईरान के सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए. ईरानी एयर डिफेंस के साथ साथ रेलवे ब्रिज, पावर प्लांट को निशाना बनाया. सबसे खतरनाक बात ये है कि बुशहर परमाणु प्लांट के नजदीक भी धमाके हुए. इसके अलावा ईरान की बंदरगाहों पर एक साथ हमला हुआ. ये हमले ऐसे वक्त पर हुए जब ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए उनका शव मशहद पहुंचने वाला था.
मशहद जाने वाले रेलवे रूट पर दो ब्रिज उड़ाएजब ईरान में लाखों लोग मशहद पहुंच रहे थे. उसी वक्त अमेरिका ने मशहद जाने वाले रेलवे रूट पर दो ब्रिज उड़ा दिए. IRGC के मुताबिक, आक क्युला रेलवे ब्रिज और आक तेकेह खान ब्रिज पर अटैक हुआ. IRGC कहना है कि इस हमले का मकसद खामेनेई की अंतिम विदाई के कार्यक्रम को प्रभावित करना था. क्योंकि हमले के बाद तेहरान-मशहद रेलवे रूट को बंद करना पड़ा. जिस वजह से करीब 50 हजार से ज्यादा यात्री बीच रास्ते में ही फंस गए.
खामेनेई के जनाजे में WE WILL KILL TRUMP के नारेसबसे बड़ी बात ये है कि मुज्तबा खामेनेई को इस बार जनता का भी फुल सपोर्ट मिल रहा है. अली खामेनेई के जनाजे में WE WILL KILL TRUMP के नारे लगाए गए. लेकिन ट्रंप ईरान के इसी हौसले को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. यही वजह है कि आज अमेरिका ने लगातार दूसरे दिन बंदर अब्बास को टारगेट किया. ईरान के इस अहम बंदरगाह पर एक के बाद एक कई धमाके हुए. इसके अलावा चाबहार में लगातार दूसरे दिन अटैक करके IRGC नेवी के इमाम अली बेस को भारी नुकसान पहुंचाया. मैरीटाइम कंट्रोल टावर को क्षति पहुंचाई है. बुशहर में न्यूक्लियर प्लांट के नजदीक बमबारी की गई.
अमेरिकी सेंटकॉम ने वीडियो जारी कर ईरान को चेतायाउत्तरी ईरान के गोलेस्तान प्रांत में भी एयर स्ट्राइक हुई. एयरपोर्ट पर हुए हमले में एक फायर फाइटर की मौत हो गई. ईरान के मेहर न्यूज का दावा है कि मिसाइल हमला तुर्कमेनिस्तान से किया गया. इन हमलों के साथ अमेरिका लगातार अपनी ताकत दिखा रहा है. अरब सागर में अमेरिकी नेवी के कई वॉरशिप तैनात हैं. जिसका वीडियो अमेरिकी सेंटकॉम ने खुद जारी किया. जिसमें 20 से ज्यादा अमेरिकी वॉरशिप एक साथ गश्त करते दिखाई दे रहे हैं. इस वीडियो में आसमान में उड़ते लड़ाकू विमान भी दिख रहे हैं. जिसे ईरान के लिए एक संदेश समझा जा रहा है.
ईरान ने भी जवाबी हमले किए शुरूलेकिन ईरान ने भी तय कर लिया है कि वो ना धमकियों से डरेगा-ना हमलों से झुकेगा. हर हमले का जवाब देगा. इसलिए अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों को दहलाना शुरू किया. बहरीन के जुफैर और शेख ईसा जैसे अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन से हमला किया. कुवैत के अली अल-सलेम बेस पर भी अटैक हुआ. इन हमलों में 4 अमेरिकी बेस पर बड़े नुकसान का दावा है. इसके अलावा जॉर्डन के अजराक एयर बेस पर भी मिसाइल दागी गई. जॉर्डन ने 5 मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया. ईरान का कहना है कि ये सिर्फ शुरूआती दौर के हमले हैं. अगले चरण में और भी बड़े हमले किए जाएंगे.
इसके बाद कतर, बहरीन समेत कई अरब देशों में हाई अलर्ट है. लगातार सायरन बज रहे हैं.
ईरान ने कहा है कि कि अगर हमले हुए तो अमेरिका के तमाम बेस तबाह कर देंगे. इस बार ट्रंप को ईरान की असली ताकत और तेजी दिखाएंगे. वहीं ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ईरान के हर हमले का 20 गुना ताकत से जवाब देंगे.
अमेरिका और ईरान के बीच जब MOU साइन हो गया था. शांति की उम्मीद लौट आई थी, तो फिर अचानक जंग क्यों शुरू हो गई. ये सवाल सभी के मन में भी होगा. इसका जवाब है अविश्वास. दोनों ही देशों को एक दूसरे पर बिल्कुल भरोसा नहीं है. और बिना भरोसे के सिर्फ समझौतों की शर्तों के दम पर शांति मुमकिन नहीं है. ईरान और अमेरिका की तरफ से दोबारा हमले क्यों किए, इसको लेकर Axios ने एक रिपोर्ट छापी है- जिसके मुताबिक ईरानी नेतृृत्व के एक धड़े को शुरू से ये लग रहा था कि ईरान को समझौते से कोई आर्थिक फायदा नहीं हो रहा. दूसरी तरफ ट्रंप को भी लगने लगा कि अब उन पर तेल कीमतें बढ़ाने का ज्यादा दबाव नहीं है.
जानें ईरान और अमेरिका फिर क्यों भिड़ेईरान को अमेरिका ने तेल बेचने की अनुमति तो दी, लेकिन बैंकिंग प्रतिबंधों की वजह से ईरान के लिए तेल निर्यात करना मुश्किल रहा. दूसरी तरफ अमेरिका ने ओमान के रास्ते तेल टैंकरों को पार कराना शुरू कर दिया. ईरान की नाराजगी इस बात से भी बढ़ी कि अमेरिका ने उसकी फ्रीज की गई संपतियों को रिलीज नहीं किया. लेकिन असली ट्रिगर प्वाइंट बना होर्मुज. जैसे ही ईरान को लगा कि दूसरे ऑयल रूट की वजह से होर्मुज में उसका दबदबा कम हो रहा है. ईरान ने अटैक शुरू किए, लेकिन अब अमेरिका होर्मुज में IRGC का कंट्रोल खत्म करना चाहता है.
बड़े मिसाइल और हवाई हमलों की रणनीति बना रहा USये बात सेंटकॉम के एक संदेश से साफ हो गई. अब तक अमेरिका ईरान पर किए हमलों को सेल्फ डिफेंस में की गई कार्रवाई बताता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है. अमेरिका ने खुलकर कहा कि ईरान पर हमला उसकी सैन्य क्षमता घटाने के लिए किया गया. और ये काम अभी जारी रहेगा. अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से जो रिपोर्ट्स आ रही हैं, वो डराने वाली हैं. जिनके मुताबिक ईरान पर अमेरिका के हमले अभी नहीं रुकेंगे. अमेरिका अभी और भी बड़े मिसाइल और हवाई हमलों की रणनीति बना रहा है.
अमेरिका ने की लंबी जंग की तैयारीअमेरिकी सेना ईरान के साथ एक लंबी जंग की तैयारी कर रही है. ये जंग एक हफ्ता या पूरे एक महीने भी खींच सकती है. जंग कब खत्म होगी ये ईरान के जवाबी एक्शन पर निर्भर है. क्योंकि अब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत पूरी तरह ठप हो चुकी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अब ट्रंप ने तय कर लिया है कि वो समझौते का उल्लंघन करने वाले ईरानी नेतृत्व को सबक सिखाएंगे. और अगर ईरान ने हमले किए तो जंग और भीषण होगी.
नेतन्याहू भी ईरान पर हमले को तैयारजंग के और भीषण होने का एक संकेत इजराइल से भी आया. जहां प्रधानमंत्री नेतन्याहू ईरान पर हो रहे हमलों से खुश हैं. और खुद भी ईरान को तबाह करने की प्लानिंग कर रहे हैं. अमेरिका के एक्शन के बाद नेतन्याहू ने आधी रात को सिक्योरिटी मीटिंग बुलाई. जिसमें रक्षा मंत्री काट्ज के साथ युद्ध रणनीति बनाई गई. जिसके बाद ईरान के खिलाफ बड़े हमले करने की आशंका है. इजराइल की तरफ से ये हमले आज रात भी हो सकते हैं. रिपोर्टस के मुताबिक इस बार इजराइल को बड़े युद्ध की आशंका हैं और नेतन्याहू एक ऐसा निर्णायक युद्ध चाहते हैं जिसके बाद ईरान संकट का स्थायी समाधान हो जाए.
कई अमेरिका रिफ्यूलिंग टैंकर इजराइल पहुंचेदावा है कि इजराइल में कई अमेरिका रिफ्यूलिंग टैंकर पहुंच चुके हैं. जो इजराइली जे्ट्स को हवा में ईंधन भरने में मदद करेंगे. इसका मतलब ये है कि आज रात इजरायल और अमेरिका मिलकर ईरान पर बड़ी एयर स्ट्राइक कर सकते हैं. यानी युद्ध का ट्रिगर दबाया अमेरिका ने. उस पर दबाव बना रहे हैं नेतन्याहू. लेकिन युद्ध की गर्मी पूरी दुनिया में महसूस हो रही है. क्योंकि साइड इफेक्ट सब जगह से सामने आ सकते हैं.
दुनिया को इस जंग से कितना होगा नुकसान?आशंका है कि अगर अमेरिका-ईरान का ये युद्ध लंबा चला तो पूरी दुनिया के लिए आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा. अनुमान के मुताबिक, दुनिया की अर्थव्यवस्था को 3.5 ट्रिलियन डॉलर तक का नुकसान हो सकता है, जो 4 वर्षों से जारी यूक्रेन युद्ध से भी ज्यादा नुकसान होगा. अब आप ये समझ सकते हैं कि ये जंग दुनिया के लिए कितनी खतरनाक होगी. इसी पर हमने एक चिंता कार्ड तैयार किया है.
ट्रंप दुनिया पर जो आर्थिक मिसाइल गिरा रहे हैं. उससे पूरी दुनिया का आर्थिक विकास प्रभावित हो सकता है. दरअसल, होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से कच्चे तेल की कीमतों में ‘आग’ लग सकती है. कीमतें 32 % तक बढ़ सकती हैं. इसके अलावा वैश्विक महंगाई 4.7% तक पहुंच सकती हैं. व्यापार की वृद्धि दर 5% से घटकर 3.5% तक आ सकती है. यानी तीन मोर्चों पर बड़ी दिक्कत हो सकती है. तेल की कीमतों में फिर बड़ा उछाल संभव है. महंगाई दोबारा बढ़ सकती है. साथ ही शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आ सकती है.
(ब्यूरो रिपोर्ट टीवी9 भारतवर्ष)