बसपा के बढ़ते प्रभाव से बेचैन हैं विरोधी दल : मायावती
Tarunmitra July 11, 2026 09:43 PM

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने शनिवार को विरोधी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बसपा के बढ़ते प्रभाव से विपक्षी दलों में बेचैनी और द्वेष की भावना बढ़ गई है। इसी कारण वे साम, दाम, दंड और भेद जैसी रणनीतियों का सहारा लेकर दलित एवं बहुजन समाज के विभिन्न वर्गों को गुमराह करने और भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं।

मायावती ने सोशल मीडिया एक्स पर जारी अपने बयान में कहा कि बसपा दूसरी पार्टियों की तरह अपना राजनीतिक व चुनावी स्वार्थ साधने के लिये धरना-प्रदर्शन, सड़क जाम, तोड़फोड़, हवाहवाई वादों-दावों और झूठे प्रचार से जनता को गुमराह करने में विश्वास नहीं रखती। बसपा पूरी तरह से पाक-साफ देश की एकमात्र ऐसी अम्बेडकरवादी पार्टी है जो ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के सिद्धान्त व नीति पर चलकर गरीबों, मजदूरों, शोषितों-पीड़ितों व उपेक्षितों के हित व कल्याण के लिए समर्पित है। उत्तर प्रदेश में बसपा के नेतृत्व में चार बार रही सरकार में व्यापक जनहित, जनकल्याण, विकास तथा अपराध-नियंत्रण व कानून व्यवस्था के मामलों में कानून का बेहतरीन राज रहा है।

बसपा प्रमुख ने किसी भी राजनीतिक पार्टी का नाम लिए बगैर उन पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव नजदीक आता देख विरोधी पार्टियां अपने हथकंडों आदि के साथ-साथ दलित संगठनों व गुलाम मानसिकता रखने वाले लोगों के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीतिक स्वार्थ का अपना खेल आगे बढ़ाना चाहती हैं, जिससे सर्वसमाज के लोगों को व विशेषकर दलित एवं ’बहुजन समाज’ के सभी लोगों को सचेत व सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बसपा की असली चिन्ता यही है कि सर्वसमाज के गरीब, मजदूर व बेरोजगार नौजवान आदि के साथ-साथ समाज के शोषित-पीड़ित व अन्य उपेक्षित लोग, अपनी समस्याओं को लेकर सड़क पर उतरने के क्रम में सरकारी द्वेष, उत्पीड़न आदि का शिकार ना बनने पायें। नौजवान अगर सरकारी ज्यादती के कारण यदि मुकदमा व जेल आदि में उलझ जायेंगे तो इससे उनका भविष्य खतरे में पड़ जाने की आशंका है, जो बसपा कतई भी नहीं चाहती है।

मायावती ने कहा कि चुनावी स्वार्थ के लिए कुछ विरोधी पार्टियों व उनके इशारे पर चलने वाले दलित संगठन की तरह छल व छलावा की राजनीति तथा उनके लिए मगरमच्छ के आंसू नहीं बहाती। न ही संकीर्ण स्वार्थ के लिए गिरगिट की ही तरह रंग बदलती है, बल्कि करोड़ों दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ-साथ अपरकास्ट समाज के गरीबों के वास्तविक हित व कल्याण के लिए अपने गुरु, महापुरुषों के बताये रास्तों पर चलती है। इसी उद्देश्य के साथ बसपा सत्ता की मास्टर चाबी हासिल करना चाहती है ताकि वह शोषिताें व पीड़ितों की आवाज बन सके।

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