18 साल बाद मां बनीं सुनीता, सिर्फ 540 ग्राम की बच्ची को दिया जन्म; भागलपुर के डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी
TV9 Bharatvarsh July 11, 2026 10:43 PM

Bhagalpur News: डॉक्टरों को भगवान का दूसरा रूप यूं ही नहीं कहा जाता. जब उम्मीदें लगभग खत्म हो चुकी होती हैं, तब डॉक्टरों की मेहनत और चिकित्सा विज्ञान का चमत्कार एक नया जीवन रच देता है. ऐसा ही एक अविश्वसनीय और दिल को छू लेने वाला मामला बिहार के भागलपुर से सामने आया है, जहां एक निजी क्लीनिक के डॉक्टरों ने महज 26 सप्ताह (साढ़े छह महीने) में जन्मी एक नवजात बच्ची को सुरक्षित बचाकर इतिहास रच दिया है. जन्म के समय इस मासूम का वजन सिर्फ 540 ग्राम था.

भागलपुर जिले के पीरपैंती निवासी संजय ठाकुर और उनकी पत्नी सुनीता देवी की शादी 2007 में हुई थी. बीते 18 वर्षों से यह दंपत्ति अपने आंगन में नन्हे कदमों की आहट सुनने के लिए तड़प रहा था. बच्चे की चाहत में उन्होंने कई जगह इलाज कराया. यहां तक कि दो बार IVF का भी सहारा लिया, लेकिन सफलता नहीं मिली. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी, आखिरकार भागलपुर में कराए गए तीसरे प्रयास में सुनीता देवी ने गर्भधारण किया.

क्या थी समस्या?

जब गर्भावस्था का 24वां सप्ताह चल रहा था, तभी सुनीता देवी को ‘एमनियोटिक फ्लूइड’ (गर्भ का पानी) का स्राव होने लगा, जिससे स्थिति काफी गंभीर हो गई. क्लीनिक के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अशोक ने बिना समय गंवाए स्थिति को भांपा और सुरक्षित डिलीवरी कराने का फैसला लिया. 26वें सप्ताह में जब बच्ची ने जन्म लिया, तो उसका वजन मात्र 540 ग्राम था. मां सुनीता देवी ने कहा कि जब बच्ची का जन्म इतने कम वजन में हुआ, तो लगा कि इसे बचा पाना नामुमकिन है. लेकिन डॉक्टरों ने हमारी उम्मीद को टूटने नहीं दिया.

16 बाद घर में गूंजी किलकारी

मां सुनीता देवी ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि 16 साल बाद हमारे घर में किलकारी गूंजी है. इतने कम दिनों की बच्ची को सही-सलामत देखकर लग रहा है जैसे कोई सपना सच हो गया हो. बच्ची को नई जिंदगी देने वाले डॉ. अशोक ने इस केस को अपने करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण और यादगार अनुभव बताया. उन्होंने कहा कि मेरे पूरे मेडिकल करियर में इतने कम वजन (540 ग्राम) के बच्चे को बचाने का यह पहला मामला है. पूरे देश में इस तरह के अत्यधिक प्री-मैच्योर (Premature) मामलों में बच्चों के बचने की दर एक प्रतिशत से भी कम होती है. पहले ऐसे जटिल केस के लिए मरीजों को मुंबई या दिल्ली जैसे बड़े शहरों में रेफर करना पड़ता था, लेकिन अब यह सुविधा भागलपुर में ही संभव हो सकी है.

डॉक्टरों ने जताई खुशी

डॉ. अशोक और मेडिफोर्ट अस्पताल की मेडिकल टीम की दिन-रात की मेहनत रंग लाई है. सबसे राहत और खुशी की बात यह है कि बच्ची का हर अंग आंख, नाक, कान, दिल और फेफड़े पूरी तरह से सुरक्षित और सामान्य है. गहन देखभाल (ICU) और डॉक्टरों की निगरानी के बाद अब बच्ची का वजन 540 ग्राम से बढ़कर 1.6 किलोग्राम हो गया है. वह पूरी तरह से स्वस्थ है. 18 साल के लंबे और दर्दभरे इंतजार के बाद इस परिवार के जीवन में खुशियों का नया सवेरा आया है.

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