Puri Jagannath Rath Yatra Ropes: हर साल ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा का पावन पर्व मनाया जाता है. इस दौरान भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और सुभद्रा जी के साथ मंदिर से नगर भ्रमण पर निकलते हैं. इस दौरान भगवान अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं और अपनी मौसी गुंडिचा देवी के मंदिर जाते हैं. हर साल ये पावन पर्व आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन मनाया जाता है. इस साल 16 जुलाई रथयात्रा निकाली जाएगी.
भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा के दौरान लाखों भक्त पुरी पहुंचते हैं. भक्तों को रथययात्रा में रथों की रस्सियां बहुत आकर्षित करती हैं. भक्त भीड़ बैरिकेड्स के ऊपर से झुककर रथों की रस्सियों को छूने का प्रयास करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि रथयात्रा की रस्सियों को खींचने से जन्म-जन्मांतर के पाट कट जाया करते हैं और पुण्यफलों की प्राप्ति होती है. भक्त रथों की रस्सियों को छू भर ले खुद को धन्य समझते हैं. आइए जानते हैं जगन्नाथ रथयात्रा के रथों की रस्सियों की की कहानी.
जगन्नाथ रथयात्रा की रस्सियों की कहानीजगन्नाथ जी की रथयात्रा में उपयोग वाली रस्सियां विशाल आध्यात्मिक श्रद्धा को प्रेरित को प्रेरित करती हैं. भगवान की रथयात्रा में उपयोग वाली रस्सी को वासुकी के नाम से जाना जाता है. इसे नंदीघोष भी कहा जाता है. रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ मंदिर से बाहर निकलकर लोगों के बीच घूमते हैं. रथ खींचने के लिए भक्तों की भारी भीड़ पुरी सड़कों पर आ जाती है.
भेदभाव को मिटा देती है रथयात्राभगवान के विशालकाय रथों को हजारों लोग एक साथ लेकर चलते हैं. एक होकर रथ का भार उठाते हैं. धार्मिक मान्यताओं और मंदिर से जुड़ी परंपराओं के अनुसार, पवित्र रस्सियों को छूने या खींचने से कई जन्मों के पापों का नाश हो जाता है. भगवान की ये रथयात्रा सामाजिक भेदभाव को मिटा देती है. भगवान के रथ को समाज का हर इंसान खींचता है और आशीर्वाद प्राप्त करता है.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.