Right Foot First Traditions: घर से किसी जरूरी काम के लिए निकलते समय अक्सर बड़े-बुजुर्ग एक सलाह जरूर देते हैं कि पहले दायां पैर बाहर रखें. चाहे नौकरी का इंटरव्यू हो, परीक्षा देने जाना हो, नया कारोबार शुरू करना हो या किसी शुभ काम के लिए घर से निकलना हो, यह परंपरा आज भी कई परिवारों में निभाई जाती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सदियों से चली आ रही इस परंपरा के पीछे का असली कारण क्या है? क्या यह सिर्फ एक अंधविश्वास है या इसके पीछे कोई गहरा धार्मिक कारण भी छिपा है? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं.
दायां पैर शुभ क्यों माना जाता है?सनातन परंपरा में शरीर का दायां भाग शुभ और मंगलकारी माना गया है. पूजा-पाठ, यज्ञ, मंदिर में प्रवेश और कई धार्मिक अनुष्ठानों में भी दाएं हाथ और दाएं पैर का विशेष महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यता है कि दाएं पैर से पहला कदम आगे बढ़ाने का अर्थ है शुभता और सकारात्मक ऊर्जा के साथ नए काम की शुरुआत करना. यही वजह है कि किसी भी महत्वपूर्ण काम के लिए घर से निकलते समय पहले दायां पैर बाहर रखने की सलाह दी जाती है.
सफलता और शुभ फल की मान्यताज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब व्यक्ति किसी अच्छे उद्देश्य से घर से निकलते समय दायां पैर पहले बाहर रखता है, तो यह शुभ संकेत माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि इससे काम में आने वाली बाधाएं कम होती हैं और सफलता मिलने की संभावना बढ़ती है.
इंटरव्यू या परीक्षा में जाने से पहले क्यों अपनाई जाती है यह परंपरा?जब कोई व्यक्ति इंटरव्यू, प्रतियोगी परीक्षा या किसी महत्वपूर्ण बैठक के लिए निकलता है, तो वह मानसिक रूप से थोड़ा तनाव में रहता है. ऐसे समय में धार्मिक परंपराओं का पालन करने से मन में सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास बढ़ता है.
शुभ काम से पहले किन बातों का रखा जाता है ध्यान?भारतीय परंपरा में किसी महत्वपूर्ण कार्य पर निकलने से पहले भगवान को याद करना, माता-पिता और गुरुजनों का आशीर्वाद लेना, मन को शांत रखना और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना शुभ माना गया है. कई लोग दही-चीनी खाकर या मीठा खाकर भी घर से निकलते हैं. ये सभी परंपराएं व्यक्ति के मन में विश्वास और उत्साह पैदा करने का माध्यम मानी जाती हैं.
स्वर विज्ञान का क्या कहता है?भारतीय योग शास्त्र में स्वर विज्ञान का बहुत महत्व है. हमारे शरीर में दो मुख्य ऊर्जा नाड़ियां होती हैं इड़ा यानी चंद्र नाड़ी जो बाएं तरफ होती है और पिंगला यानी सूर्य नाड़ी जो दाएं तरफ होती है. सूर्य नाड़ी का संबंध साहस, ऊर्जा, पराक्रम और सफलता से है. इसलिए जब व्यक्ति घर से बाहर कदम रखता है, तो उस समय उसकी जो नाड़ी या सांस अधिक सक्रिय चल रही होती है, उसी तरफ का पैर पहले आगे बढ़ाना चाहिए. चूंकि ज्यादातर सक्रिय और बाहरी कार्यों के लिए सूर्य नाड़ी यानी दायां हिस्सा को श्रेष्ठ माना गया है, इसलिए आम बोलचाल में हमेशा दायां पैर पहले बाहर रखने की सलाह दी जाती है.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.