एक महीने के हाई पर कच्चे तेल की कीमतें, ट्रंप नहीं वसूलेंगे होर्मुज में शुल्क, लेकिन बढ़ते युद्ध की आशंकाओं का दिख रहा असर
et July 15, 2026 10:42 AM
मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव बड़े तेल आयातक देशों जैसे भारत की चिंता बढ़ा रहा है। ईरान अमेरिका के बीच नए सिरे से युद्ध की शुरुआत हो चुकी है। दोनों पक्षों की तरफ से और बड़े हमले करने की धमकी दी जा रही है। जिसके कारण जारी है। 15 जुलाई 2026 को सुबह 6.30 बजे WTI क्रूड की कीमत 80-81 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड की कीमत 85-86 डॉलर प्रति बैरल के बीच ट्रेंड कर रही है। कल ब्रेंट क्रूड एक महीने के उच्चतम स्तर 87 डॉलर प्रति बैरल पर था।

ट्रंप नहीं वसूलेंगे परागमनशुल्कअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह ऐलान किया था कि वह हार्मोन जिसे गुजरने वाले सभी कार्गो से 20% शुल्क लेंगे। इसके बाद तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आया। लेकिन मंगलवार को उन्होंने अपना यह फैसला वापस ले लिया और कहा कि वह राजस्व खड़ी इस देश में निवेश करके हासिल कर लेंगे। इस बयान के बाद कल शाम तक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी देखी गई थी।

नए हमलों की धमकी से फिर बड़े दामअमेरिका के प्रेसिडेंट ट्रंप ने ईरान को धमकी दी है कि यदि वे मेज पर बातचीत के लिए तैयार नहीं होते हैं तो आने वाले सप्ताह में ईरान के बिजली संयंत्र और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाते हुए बड़े हमले किए जाएंगे।

होर्मुज पर नाकाबंदीअमेरिका ने प्रमुख जलमार्गों पर ईरान के लिए नाकाबंदी जारी कर रखी है और ईरान की तरफ से भी नाकाबंदी जारी है। हाल ही में ईरान ने चेतावनी दी है कि वह एक भी जहाज को यहां से गुजरने नहीं देंगे। इसके कारण तेल और गैस की सप्लाई पर फिर संकट खड़ा हो रहा है।

क्या भारत में भी खड़ा होगा सप्लाई संकट?पिछली बार जब होर्मुज बंद था तब भारत ने कच्चे तेल की खरीदारी के लिए कई विकल्प खोज लिए। रूस, वेनेजुएला जैसे देशों से भारत तेल की खरीदारी कर रहा है। लेकिन बढ़ती कीमत आयात को बढ़ा रही है। यदि लंबे समय तक कीमतों में तेजी जारी रहती है क्रूड ऑयल की कीमत $100 प्रति बैरल के पार निकल जाती है तब देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की तरफ से ईंधन की कीमतें बढ़ाई जा सकती है। हालांकि अभी ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट ?कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च के प्रमुख अनिंद्या बनर्जी कहना है कि बाजार में दिख रही प्रतिक्रियाएं नए हमलों से ज्यादा कूटनीतिक प्रयासों में आई कमी का असर है। उन्होंने कहा कि ब्रेंट की कीमत कोटक सिक्योरिटी के 70 से 80 डॉलर बेस से ऊपर की सीमा पर पहुंच चुके हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच तनाव जारी रहता है तो कीमतें $85 से $90 प्रति बैरल के बीच पहुंच सकती है।

( डिस्क्लेमर: एक्सपर्ट के सुझाव या सलाह उनके अपने होते हैं। इसे इकोनामिक टाइम्स हिंदी की राय ना समझें। कहीं भी निवेश से पहले सेबी रजिस्टर्ड बाजार विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें )
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