Best Vessel for Shiva Abhishek: तांबा, स्टील, चांदी या फिर कोई और… किस धातु से करना चाहिए भोलेनाथ का अभिषेक?
TV9 Bharatvarsh July 15, 2026 10:42 AM

Mahadev Worship Guidelines: सनातन धर्म में देवी-देवताओं की पूजा में पात्र की धातु को विशेष महत्व दिया जाता है. महादेव की पूजा में यह नियम विशेष रूप से लागू होता है. शास्त्रों के मुताबिक, भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए उचित तरीके से और सही पात्र में जल या दूध अर्पित करना जरूरी है. हालांकि, कई लोग अनजाने में कुछ धातु के पात्रों का उपयोग करते हैं, जो महादेव को प्रसन्न करने के बजाय उनके जीवन में दुर्भाग्य ला सकते हैं.

शिव पुराण और अन्य शास्त्रों के अनुसार, शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय यह जानना जरूरी है कि जल चढ़ाने के लिए किस धातु का पात्र उपयोग किया जाना चाहिए और किस धातु के पात्र का उपयोग बिल्कुल नहीं करना चाहिए?

किस धातु से शिवलिंग पर करें जलाभिषेक?

तांबे का पात्र: शास्त्रों और ज्योतिष के अनुसार, शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए सबसे उत्तम और पवित्र धातु तांबा है. जब भगवान शिव को तांबे के पात्र में जल चढ़ाया जाता है, तो वे अत्यंत प्रसन्न होते हैं. इससे ग्रहों के दोष दूर होते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है. वैज्ञानिक रूप से, तांबे के संपर्क में आने वाला जल अत्यंत शुद्ध और जीवाणु रहित हो जाता है.

पीतल या कांसे का पात्र: तांबे के बाद पीतल को सबसे शुभ पदार्थ माना जाता है. यदि किसी कारणवश आपके पास तांबे का पात्र न हो, तो आप शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए पीतल के पात्र का उपयोग कर सकते हैं. शिव पूजा में पीतल के पात्र का उपयोग करने का भी प्रावधान है.

चांदी या सोने का पात्र: जो लोग इसे वहन कर सकते हैं वे चांदी या सोने के पात्रों का उपयोग कर सकते हैं. विशेष रूप से चांदी के पात्र में शिवलिंग पर जल या गंगाजल अर्पित करने से चंद्रमा की अशुभ अवस्था दूर होती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है.

किस वजह नहीं करना चाहिए इन बर्तनों का इस्तेमाल

तांबे के पात्र में दूध या पंचामृत अर्पित करने से बचें: ध्यान रखें, तांबे के पात्र में जल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है, लेकिन गलती से भी शिवलिंग पर दूध, दही या पंचामृत न अर्पित करें. शास्त्रों के अनुसार, यदि दूध को तांबे के पात्र में रखा जाए तो रासायनिक अभिक्रिया के कारण वह विषैला हो जाता है इसलिए यदि आप दूध से अभिषेक करना चाहते हैं, तो हमेशा पीतल या चांदी के पात्र का प्रयोग करें.

लोहे-स्टील का पात्र: आधुनिक समय में बहुत से लोग घर या मंदिर में शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए लोहा व स्टील के पात्र का प्रयोग करते हैं. शास्त्रों के अनुसार, शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए लोहे या स्टील के पात्र बिल्कुल भी शुभ नहीं होते. लोहे को शनि देव की धातु माना जाता है और पूजा-पाठ और त्योहारों के दौरान इस धातु का प्रयोग न करने का नियम है. स्टील भी लोहे का ही एक रूप है इसलिए इसका प्रयोग करने से पूजा निष्फल हो सकती है.

एल्युमिनियम या प्लास्टिक: एल्युमिनियम को राहु की धातु या अशुद्ध धातु माना जाता है इसलिए शिव पूजा ही नहीं, किसी भी पूजा में एल्युमिनियम और प्लास्टिक के बर्तनों का प्रयोग वर्जित है. इससे पुण्य मिलने की अपेक्षा अशुभता का खतरा अधिक होता है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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