फिलहाल टला 'मुजफ्फराबाद चलो' लॉन्ग मार्च, JAAC ने पाकिस्तान सरकार को 21 जुलाई तक का दिया अल्टीमेटम
TV9 Bharatvarsh July 16, 2026 02:43 AM

पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) एक बार फिर राजनीतिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है. आम लोगों की समस्याओं और सरकार की नीतियों के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन अब नए मोड़ पर पहुंच गया है. 15 जुलाई को प्रस्तावित ‘मुजफ्फराबाद चलो’ लॉन्ग मार्च को फिलहाल टाल दिया गया है, लेकिन इसे आंदोलन की वापसी नहीं माना जा रहा. आंदोलन का नेतृत्व कर रही जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने पाकिस्तान सरकार को साफ चेतावनी दी है कि अगर 21 जुलाई तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो पूरे PoJK में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन और लॉन्ग मार्च फिर शुरू किया जाएगा.

JAAC का कहना है कि उसने सरकार को बातचीत और समाधान का एक और मौका देने के लिए मार्च रोका है. संगठन के मुताबिक, लोगों को महंगाई, बिजली दरों, टैक्स और प्रशासनिक फैसलों से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. उनका आरोप है कि सरकार ने पहले भी कई वादे किए, लेकिन उन्हें पूरी तरह लागू नहीं किया गया. इसी वजह से लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है. रावलकोट से शुरू हुए इस मार्च में हजारों लोग पाकिस्तान सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं.

21 जुलाई तक दिया गया है मौका

संगठन ने स्पष्ट किया है कि 21 जुलाई उसकी ओर से आखिरी समय-सीमा है. अगर तब तक सरकार ने उनकी मांगों पर संतोषजनक कदम नहीं उठाए, तो पूरे क्षेत्र में आंदोलन को और तेज किया जाएगा. JAAC ने लोगों से फिलहाल शांत रहने की अपील की है, लेकिन साथ ही आंदोलन के लिए तैयार रहने को भी कहा है. PoJK में पिछले कुछ समय से समय-समय पर सरकार विरोधी प्रदर्शन होते रहे हैं. बिजली बिलों में राहत, महंगाई पर नियंत्रण, टैक्स में कमी और बेहतर प्रशासन जैसी मांगों को लेकर लोगों का गुस्सा लगातार सामने आता रहा है.

बड़े पैमाने पर हो सकता है प्रदर्शन

पिछले साल भी इन मुद्दों को लेकर बड़े प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद पाकिस्तान सरकार ने कुछ राहत पैकेज घोषित किए थे. हालांकि, आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि कई वादे अब भी अधूरे हैं. अब सभी की नजर 21 जुलाई पर टिकी है. अगर सरकार और JAAC के बीच सहमति बन जाती है, तो फिलहाल टला हुआ आंदोलन खत्म हो सकता है. लेकिन अगर बातचीत विफल रहती है, तो PoJK में एक बार फिर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और ‘मुजफ्फराबाद चलो’ लॉन्ग मार्च शुरू होने की संभावना है, जिससे वहां का राजनीतिक माहौल और तनावपूर्ण हो सकता है.

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