149वीं अहमदाबाद रथयात्रा विशेष : क्यों 15 दिनों तक बीमार रहते हैं भगवान और क्या है सरसपुर का नाता?
Webdunia Hindi July 16, 2026 03:43 PM

Lord Jagannath Rath Yatra : जगन्नाथपुरी के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी भगवान जगन्नाथ की 149वीं ऐतिहासिक और पौराणिक रथयात्रा आज 16 जुलाई, गुरुवार को अहमदाबाद में संपन्न हुई। सुबह 4 बजे भगवान जगन्नाथ की मंगला आरती हुई, जिसमें केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह परिवार सहित शामिल हुए। मंगला आरती के बाद भगवान को विशेष खिचड़ा का भोग लगाया गया।

 

भगवान जगन्नाथ, भाई बलराम और बहन सुभद्राजी को रथ में विराजमान कराने के बाद मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने पारंपरिक 'पहिंद' विधि कर रथयात्रा को प्रस्थान कराया। ‘नंदीघोष’ रथ में विराजकर भगवान जगन्नाथजी नगरचर्या के लिए निकले हैं। उनके साथ ‘दर्पदलन’ रथ में बहन सुभद्राजी और ‘तालध्वज’ रथ में भाई बलभद्रजी भी हैं। भगवान भक्तों के द्वार तक पहुंच रहे हैं और भक्त भी भगवान के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में उमड़ पड़े हैं।

 

विभिन्न थीम पर तैयार की गई हैं झांकियां

अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथजी की 149वीं रथयात्रा भव्य रूप से आगे बढ़ रही है। शहर के विभिन्न इलाकों में भक्त भगवान के दर्शन के लिए उमड़ रहे हैं और पूरा शहर भक्तिमय माहौल में रंग गया है। इस साल रथयात्रा में विभिन्न थीम पर तैयार किए गए झांकियों ने सबका विशेष ध्यान खींचा है। धार्मिक और सांस्कृतिक संदेश देने वाले ये झांकियां भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हैं।

 

द्वारका मंदिर की थीम पर तैयार झांकियां

रथयात्रा में खास तौर पर द्वारका मंदिर की थीम पर तैयार किया गया झांकी लोगों को बहुत पसंद आ रहा है। इस झांकी में भगवान श्रीकृष्ण का रूप धारण किए हुए कलाकार भक्तों को प्रसादी का वितरण करते नजर आए। भगवान श्रीकृष्ण के वेश में कलाकारों ने भक्तों के साथ संवाद स्थापित कर पूरे माहौल को और भी भक्तिमय बना दिया। रास्ते के दोनों तरफ खड़े भक्तों ने भी इस अनोखे झांकी का हर्षोल्लास से स्वागत किया।

कॉर्पोरेशन द्वारा आवश्यक सभी तैयारियां

मेयर हितेश बारोट ने आगे बताया कि भगवान के नगरचर्या के लिए कॉर्पोरेशन द्वारा आवश्यक सभी तैयारियां की गई हैं। रथयात्रा मार्ग पर भक्तों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए सुनियोजित व्यवस्था की गई है। विभिन्न विभागों की टीमें लगातार काम कर रही हैं ताकि भगवान के रथ आसानी से आगे बढ़ सकें और लाखों भक्तों को बिना किसी असुविधा के दर्शन का लाभ मिल सके।

 

भक्तिमय माहौल, विभिन्न थीम के आकर्षक झांकियां, द्वारका मंदिर की झांकी, भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप में प्रसादी का वितरण और AMC पर भगवान के भव्य स्वागत की तैयारियों के बीच अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथजी की 149वीं रथयात्रा श्रद्धा, परंपरा और उत्साह के साथ आगे बढ़ रही है।

 

रथयात्रा की शोभा बढ़ाएंगे

सजे हुए हाथी: 18

101 थीम आधारित ट्रक

अखाड़ा: 30

भजन मंडली: 18

बैंडबाजा वाले: 3

देश भर से साधु-संत: 2500

खलासी भाई, जो रथ खींचेंगे: 1000 से 1200

 

रथयात्रा में इस प्रसादी का वितरण होगा

45 हजार किलो मूंग

500 किलो जामुन

500 किलो आम

400 किलो ककड़ी-अनार

2 लाख उपेरणां

रथयात्रा की अभेद्य सुरक्षा

10 IG DIG

30000 पुलिस जवान

26 पुलिस रेंज

1397 पुलिस पॉइंट्स

100 ड्रोन

42 DCP

88 ACP

800 PI

 

यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि आस्था, परंपरा, इतिहास और मानव समानता का जीवंत प्रतीक है। हर साल लाखों भक्त न सिर्फ भगवान के दर्शन करने, बल्कि रथ की  रस्सी खींचने का पुण्य पाने के लिए भी पुरी पहुंचते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर साल नए रथ ही क्यों बनाए जाते हैं? भगवान 15 दिनों तक दर्शन क्यों नहीं देते? पत्नी लक्ष्मीजी क्यों नाराज हो जाती हैं? और आखिरकार पुरी की रथयात्रा ही विश्वभर में सबसे खास क्यों मानी जाती है?

 

भगवान हर साल मौसी के घर क्यों जाते हैं?

सबसे प्रचलित मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा हर साल नौ दिनों के लिए अपनी मौसी के घर यानी सरसपुर स्थित मौसी के घर जाते हैं। कुछ धार्मिक ग्रंथों में सरसपुर को भगवान का जन्मस्थान भी माना जाता है। भगवान वहां सात दिन रुकते हैं और मौसी के हाथों बने भोजन का प्रसाद ग्रहण करते हैं।

 

भगवान खुद भक्तों तक आते हैं

जगन्नाथ मंदिर की एक विशेषता यह है कि यहां गैर-हिंदुओं को प्रवेश नहीं मिलता है। इसलिए रथयात्रा का सबसे बड़ा महत्व यह है कि भगवान खुद अपने गर्भगृह से बाहर आकर हर भक्त को दर्शन देते हैं। यह यात्रा यह संदेश देती है कि भगवान के लिए कोई जाति, वर्ण या समाज का भेदभाव नहीं है।

 

रथ के दर्शन से क्या मिलता है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान के रथ के सिर्फ दर्शन करने से भी पापों का नाश होता है। 'वामदेव संहिता' के मुताबिक, जो भक्त एक सप्ताह तक भगवान के दर्शन करता है, उसे अपने पूर्वजों के साथ वैकुंठ में स्थान मिलता है।

 

भगवान 15 दिनों तक बीमार क्यों पड़ते हैं?

रथयात्रा से पहले स्नान पूर्णिमा के दिन भगवान का 108 कलश के पवित्र जल से अभिषेक किया जाता है। मान्यता के अनुसार, इसके बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं और लगभग 14 से 15 दिनों तक 'अणसर घर' में आराम करते हैं। इस दौरान भक्तों को भगवान के दर्शन नहीं होते हैं। जब भगवान पूरी तरह स्वस्थ होते हैं तो भक्तों को दर्शन देने निकलते हैं।

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