Kanwar Yatra 2026: कौन था पहला कांवड़िया, जिसने महादेव को चढ़ाया था जल
TV9 Bharatvarsh July 17, 2026 03:43 PM

Kanwar Yatra 2026: इसी माह में सावन की शुरुआत हो जाएगी. सावन का महीना भगवान शिव का होता है. इस माह में भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है. उनका जलाभिषेक किया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस माह में पूजा और जलाभिषेक करने से महादेव सभी दूर कर देते हैं. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल शिव जी की भक्ति का पावन माह सावन 30 जुलाई से शुरू हो रहा है, जिसका समापन 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा के साथ होगा.

सावन में कांवड़ यात्रा निकाली जाती हैं. सनातन धर्म में कांवड़ यात्रा को महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा माना गया है. ये सिर्फ पैदल जाकर गंगाजल लाने भर की पंरपरा नहीं है, बल्कि ये यात्रा भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था, तप, संयम और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है. हर वर्ष सावन मास में लाखों शिवभक्त पवित्र नदियों, विशेष रूप से गंगा से जल भरकर कांवड़ में लेकर अपने आराध्य भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैंं पहला कांवड़िया कौन था? अगर नहीं तो आइए जानते हैं.

पहला कावंड़िया कौन था?

कांवड़ यात्रा की शुरुआत को लेकर अलग-अलग पौराणिक और लोक कथाएं बताई जाती हैं. विभिन्न ग्रंथों और परंपराओं में और कांवड़ यात्रा को लेकर अलग-अलग प्रसंग मिलते हैं, इसलिए कांवड़ यात्रा की किसी एक कथा को सर्वमान्य ऐतिहासिक तथ्य नहीं माना जा सकता है, बल्कि इन सभी को धार्मिक मान्यताओं के रूप देखा जाता है. सबसे प्रचलित मान्यता के अनुसार, भगवन परशुराम संसार के सबसे कांवड़िया कहे जाते हैं.

बताया जाता है कि त्रेतायुग में भगवन परशुराम ने गढ़मुक्तेश्वर से पवित्र गंगाजल लाकर उत्तर प्रदेश के पुरा महादेव मंदिर में भगवान शिव का अभिषेक किया था. कहते हैं कि यहीं से कांवड़ में जल लाकर शिव को अर्पित करने की परंपरा की शुरुआत हुई. माना जाता है कि आज भी इस स्थान का कांवड़ यात्रा से विशेष संबंध है.

साल 2026 में कांवड़ यात्रा कब से कब तक?

वर्ष 2026 में कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से 28 अगस्त तक चलेगी. हालांकि, मुख्य कांवड़ यात्रा 11 अगस्त 2026 तक ही रहेगी. क्योेकि यही वो दिन होगा जब सावन माह की शिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा. परंपरा के अनुसार अधिकतर कांवड़िये इसी दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करके अपनी कांवड़ यात्रा का समापन करते हैं.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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