शिवपुरी के नरवर किले पर डकैतों का धावा, क्रेन-ट्रक लेकर पहुंचे…गार्ड्स को बंधक बनाकर 500 साल पुरानी तोप ले गए
TV9 Bharatvarsh July 17, 2026 03:43 PM

Narwar Fort Theft: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में नरवर किला है. इस किले में डकैती की घटना ने हिलाकर रख दिया है. 15-16 जुलाई की दरमियानी रात करीब 25 बदमाश किले में घुसे और वहां तैनात सिक्योरिटी गार्ड्स को धमकाकर बंधक बना लिया. इसके बाद बदमाश 16वीं शताब्दी की अष्टधातु से बनी एक ऐतिहासिक तोप लेकर फरार हो गए. इस घटना के बाद पुलिस और पुरातत्व विभाग में हड़कंप मचा हुआ है.

बदमाश पूरी तैयारी के साथ वारदात को अंजाम देने पहुंचे थे. बताया जा रहा है कि भारी-भरकम तोप को उठाकर ले जाने के लिए आरोपी अपने साथ क्रेन और ट्रक जैसी लोडिंग गाड़ियां लेकर आए थे. बदमाशों ने किले के पिछले हिस्से से प्रवेश किया और वारदात को अंजाम देकर आसानी से फरार हो गए.

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि घटना से करीब 12 दिन पहले भी किले में संदिग्ध गतिविधियां देखी गई थीं. इसके बावजूद प्रशासन और पुरातत्व विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत नहीं किया. अगर समय रहते सतर्कता बरती जाती तो शायद देश की इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाया जा सकता था.

सुरक्षाकर्मियों के पास सिर्फ लाठी, टॉर्च तक नहीं

वारदात के समय किले में तैनात सुरक्षाकर्मी बाल किशन ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी. उन्होंने बताया कि रात के अंधेरे में अचानक हथियारों से लैस बड़ी संख्या में बदमाश किले में पहुंच गए थे.

सुरक्षाकर्मी के मुताबिक, उनके पास सुरक्षा के नाम पर सिर्फ एक लाठी थी. यहां तक कि रात में रोशनी के लिए टॉर्च की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी. बदमाशों ने घेरकर उन्हें जान से मारने की धमकी दी, जिसके बाद उन्हें अपनी जान बचाने के लिए पीछे हटना पड़ा. नरवर किले के ओपन कचहरी परिसर में कुल 14 ऐतिहासिक तोपें रखी गई थीं, लेकिन अब वहां सिर्फ 13 तोपें बची हैं.

16वीं सदी की दुर्लभ धरोहर थी चोरी हुई तोप

चोरी हुई तोप ऐतिहासिक और तकनीकी दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. यह 16वीं शताब्दी की अष्टधातु से निर्मित तोप थी, जो मुगल और कछवाहा राजाओं के दौर की उन्नत धातुकर्म तकनीक और सैन्य क्षमता का उदाहरण थी.

इस तोप पर विशेष नक्काशी और ऐतिहासिक चिह्न बने हुए थे, जो इसे बेहद दुर्लभ बनाते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी ऐतिहासिक वस्तुएं अंतरराष्ट्रीय एंटीक बाजार में बेहद मांग वाली होती हैं. पुलिस को आशंका है कि इस वारदात के पीछे किसी अंतरराष्ट्रीय तस्कर गिरोह का हाथ हो सकता है.

पुलिस और पुरातत्व विभाग ने शुरू की जांच

घटना के बाद पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ डकैती और पुरातत्व अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस साइबर सेल की मदद से आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है.

करैरा एसडीओपी प्रशांत शर्मा ने बताया कि नरवर किले से तोप चोरी की सूचना मिली है. मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जा रही है और किसी अंतरराष्ट्रीय चोर गिरोह की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता.

वहीं राज्य पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर तरुण कुमार महोबिया ने इसे बेहद गंभीर मामला बताया है. उन्होंने कहा कि वह खुद नरवर किले का निरीक्षण करेंगे और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर पुलिस अधिकारियों से जल्द से जल्द तोप बरामद करने को लेकर चर्चा करेंगे.

सुरक्षा पर खड़े हुए कई सवाल

इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जब 12 दिन पहले ही किले में संदिग्ध गतिविधियां सामने आ गई थीं तो सुरक्षा क्यों नहीं बढ़ाई गई? 30 हथियारबंद बदमाशों के सामने सुरक्षाकर्मियों को सिर्फ लाठी के भरोसे क्यों छोड़ा गया?

अब सबसे बड़ी चुनौती पुलिस के सामने चोरी हुई ऐतिहासिक तोप को बरामद करने की है. देखना होगा कि जांच एजेंसियां इस मामले में आरोपियों तक पहुंच पाती हैं या फिर देश की यह अनमोल धरोहर हमेशा के लिए अवैध बाजार में गुम हो जाती है.

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