टोल बैरियर फ्री हुआ दिल्ली-जयपुर हाईवे, Fastag नहीं होने पर दोगुना देना होगा जुर्माना… नहीं देने पर गाड़ी होगी ब्लैकलिस्ट
TV9 Bharatvarsh July 17, 2026 03:43 PM

NH-48 New Rule: जयपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-48) के नियमों में एक अहम बदलाव किया गया है. यह बदलाव NH-48 पर सफर करने वाले सभी वाहनों पर लागू होगा. अब बिना वैध फास्टैग या गलत फास्टैग लगाकर यात्रा करना भारी पड़ सकता है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने दौलतपुरा और मनोहरपुर टोल प्लाजा पर बैरियर-फ्री मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोल प्रणाली लागू कर दी है. इस नई व्यवस्था के तहत वाहन बिना रुके टोल प्लाजा से गुजर सकेंगे, लेकिन नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. आइए जानते हैं कि नया नियम क्या है.

गलत मिला फास्टैग, तो देना होगा दोगुना टोल

एनएचएआई के अनुसार, यदि किसी वाहन पर वैध फास्टैग नहीं मिला या दूसरे वाहन का फास्टैग इस्तेमाल करते हुए पाया गया, तो सबसे पहले वाहन मालिक को 24 घंटे के भीतर ई-नोटिस भेजा जाएगा. इसके बाद वाहन मालिक को 72 घंटे के भीतर सामान्य टोल शुल्क जमा करने का अवसर दिया जाएगा. यदि निर्धारित समय सीमा में भुगतान नहीं किया जाता है, तो संबंधित वाहन पर दोगुना टोल शुल्क लगाया जाएगा.

ब्लैकलिस्ट हो जाएगी गाड़ी

इसके बावजूद यदि वाहन मालिक टोल का भुगतान नहीं करता है, तो 14 दिन पूरे होने के बाद वाहन को केंद्र सरकार के ‘वाहन’ पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा. ब्लैकलिस्ट होने के बाद वाहन मालिक को परिवहन विभाग से मिलने वाली कई महत्वपूर्ण सेवाएं बंद हो जाएंगी. इनमें वाहन की फिटनेस, स्वामित्व हस्तांतरण (ट्रांसफर), परमिट जारी करना, परमिट का नवीनीकरण और अन्य आरटीओ एवं डीटीओ संबंधी सेवाएं शामिल हैं.

सांकेतिक फोटो

किन टोल प्लाजा पर लागू है ये व्यवस्था?

एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अजय आर्य ने बताया कि यह नई व्यवस्था फिलहाल दौलतपुरा और मनोहरपुर टोल प्लाजा पर लागू की गई है. जल्द ही शाहजहांपुर टोल प्लाजा को भी बैरियर-फ्री मल्टी लेन फ्री फ्लो प्रणाली से जोड़ दिया जाएगा. इसका उद्देश्य टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतारों को खत्म करना, यात्रा का समय कम करना और यातायात को अधिक आसान बनाना है.

एनएचएआई ने वाहन चालकों से अपील की है कि वह अपने वाहनों पर केवल वैध और एक्टिव फास्टैग का ही उपयोग करें और समय पर टोल शुल्क का भुगतान करें. इससे न केवल अतिरिक्त जुर्माने और कार्रवाई से बचा जा सकेगा, बल्कि वाहन से जुड़ी जरूरी सरकारी सेवाएं भी बिना किसी बाधा के मिलती रहेंगी.

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