देशभर में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया के तहत अब तक 6 करोड़ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कट चुके हैं. लेकिन असली सवाल अब कानूनी अधिकारों को लेकर है. अगर किसी का नाम वोटर लिस्ट से कट गया, तो क्या वह अब भी एक आम नागरिक की तरह अपने सारे अधिकार इस्तेमाल कर पाएगा? सुप्रीम कोर्ट ने बिहार SIR के मामले से लेकर पश्चिम बंगाल से जुड़े केस तक इस सवाल पर बार-बार एक ही बात दोहराई है. कोर्ट ने कहा कि वोटर लिस्ट से नाम हटने का मतलब सिर्फ इतना है कि व्यक्ति वोट नहीं डाल सकता. इससे उसकी नागरिकता या उससे जुड़े दूसरे अधिकार अपने-आप खत्म नहीं होते हैं.
एक सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने कोर्ट का रुख बिल्कुल साफ किया. उन्होंने कहा कि हमारा फैसला साफ है. ECI, संविधान के अनुच्छेद 9, 10, 11 और 12 के तहत नागरिकता तय करने वाली संस्था नहीं है. ECI का अधिकार सिर्फ वोटर लिस्ट तक है. वह किसी का नाम जोड़ या हटा सकता है, लेकिन इससे किसी की नागरिकता खत्म नहीं होती. यानी कोर्ट का कहना है कि वोटर लिस्ट से नाम कटना और नागरिकता खत्म होना, दोनों बिल्कुल अलग बातें हैं. सिर्फ नाम कट जाने से कोई व्यक्ति “गैर-नागरिक” नहीं हो जाता. ऐसे में SIR में नाम कटने के बावजूद आपके ज्यादातर अधिकारों पर कोई असर नहीं होगा.
1. मौलिक अधिकारजीवन और व्यक्तिगत आजादी का अधिकार (अनुच्छेद 21), आने-जाने की आजादी और अपनी बात रखने का अधिकार (अनुच्छेद 19) जैसे मौलिक अधिकार, वोटर लिस्ट में नाम होने पर निर्भर नहीं करते. ये अधिकार हर नागरिक को मिलते हैं, चाहे उसका नाम वोटर लिस्ट में हो या नहीं. जस्टिस बागची ने साफ कहा था कि ECI नागरिकता तय करने वाली संस्था नहीं है. इसलिए सिर्फ वोटर लिस्ट से नाम कटने की वजह से इन अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ता.
2. मतदान का अधिकारयह इकलौता अधिकार है, जिस पर नाम कटते ही सीधा असर पड़ता है. जब तक अपील पर फैसला नहीं आता, तब तक व्यक्ति उस चुनाव क्षेत्र में वोट नहीं डाल सकता. कोर्ट ने भी माना है कि चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत वोटर लिस्ट बनाने और उसे अपडेट करने का अधिकार है. इसलिए SIR का सीधा असर सिर्फ वोट डालने के अधिकार पर पड़ता है.

जमीन या प्रॉपर्टी खरीदने-बेचने का अधिकार नागरिकता से जुड़ा है, वोटर लिस्ट से नहीं जुड़ा. वोटर आईडी भी नागरिकता का सबूत नहीं माना जाता. इसलिए वोटर लिस्ट में नाम हो या न हो, इससे जमीन या प्रॉपर्टी खरीदने के अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ता. जब तक गृह मंत्रालय नागरिकता कानून के तहत किसी को आधिकारिक तौर पर गैर-नागरिक घोषित नहीं करता, तब तक उसके ये अधिकार बने रहते हैं. कोर्ट के मुताबिक यह जिम्मेदारी ECI की नहीं, बल्कि गृह मंत्रालय की है. यानी अगर आपका नाम SIR में कट गया है, तब भी आप जमीन और प्रॉपर्टी खरीद सकते हैं.
3. पासपोर्ट और विदेश यात्रा का अधिकारSIR के बाद ऐसे कई मामले सामने आए, जिनमें लोगों ने आरोप लगाया कि उनका पासपोर्ट रिन्यू नहीं किया गया. लेकिन पासपोर्ट विदेश मंत्रालय दूसरे दस्तावेजों के आधार पर जारी करता है, वोटर लिस्ट के आधार पर नहीं. इसलिए सिर्फ वोटर लिस्ट से नाम कटने की वजह से किसी के पासपोर्ट या विदेश यात्रा के अधिकार पर सीधा असर नहीं पड़ता. हालिया सुनवाई में सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने कोर्ट से मांग की कि पासपोर्ट को नागरिकता का मान्य सबूत माना जाए, ताकि लोगों से बार-बार नए दस्तावेज न मांगे जाएं. हालांकि, इस पर कोर्ट का अंतिम फैसला अभी आना बाकी है.
5. सरकारी योजनाओं का अधिकारकानूनी सिद्धांत के मुताबिक राशन, अन्नपूर्णा जैसी सरकारी योजनाओं का हक भी नागरिकता से जुड़ा है, वोटर लिस्ट से नहीं. इसलिए अगर किसी का नाम SIR में कट गया है, तब भी वह राशन जैसी योजनाओं का हकदार रहेगा. हालांकि, जमीनी स्तर पर तस्वीर अलग है. पश्चिम बंगाल में एक ऐसा मामला सामने आया, जहां SIR में नाम कटने के बाद एक व्यक्ति का राशन कार्ड भी रद्द कर दिया गया. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में ECI और पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया. यानी कोर्ट ने कानूनी सिद्धांत तो साफ कर दिया है, लेकिन उसे सही तरीके से लागू कराने के लिए अलग से निर्देश देने की जरूरत भी बताई है. राशन, अन्नपूर्णा और जाति प्रमाण पत्र जैसी योजनाओं में यह कानूनी सिद्धांत अभी पूरी तरह जमीन पर लागू नहीं हो पाया है. इसी वजह से कोर्ट को बार-बार अलग-अलग याचिकाओं पर दखल देना पड़ रहा है. 34 लाख लंबित अपीलों के बीच आने वाले महीनों में यह विवाद और बढ़ सकता है.
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