साधना से जुड़ा है गुप्त नवरात्रों का इतिहास, जानें नैना देवी के दरबार में क्यों लगा है भक्तों का तांता
TV9 Bharatvarsh July 17, 2026 07:44 PM

विश्व विख्यात शक्तिपीठ श्री नैना देवी में इन दिनों आषाढ़ मास के गुप्त नवरात्र श्रद्धा और आस्था के साथ मनाए जा रहे हैं. गुप्त नवरात्रों के दौरान हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली सहित तमाम राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता श्री नैना देवी के दरबार में पहुंचकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं. श्रद्धालु हवन-यज्ञ में भाग लेकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना कर रहे हैं.

मंदिर के वरिष्ठ पुजारी नीलम शर्मा ने बताया कि सालभर में कुल चार नवरात्र मनाए जाते हैं, जिनमें चैत्र और शारदीय नवरात्र के अलावा आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में आने वाले दो गुप्त नवरात्र भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि गुप्त नवरात्रों का विशेष धार्मिक महत्व है.

उन्होंने बताया कि इन नवरात्रों को गुप्त नवरात्र इसलिए कहा जाता है क्योंकि प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों ने अपनी साधना, पूजा-अर्चना और तांत्रिक सिद्धियों के लिए इन नवरात्रों को गुप्त रखा था. समय के साथ इनका महत्व आम जनमानस तक पहुंचा और अब बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी इन नवरात्रों के दौरान मां भगवती की विशेष आराधना करते हैं.

‘पूजा करने से मनोकामनाएं होती हैं पूर्ण’

वरिष्ठ पुजारी ने बताया कि गुप्त नवरात्रों के दौरान मां श्री नैना देवी के दरबार में विशेष पूजा, दुर्गा सप्तशती का पाठ, हवन और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं. मंदिर परिसर स्थित प्राचीन हवन कुंड में श्रद्धालु आहुतियां अर्पित कर माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. श्रद्धालुओं का कहना है कि गुप्त नवरात्रों में माता के दरबार में दर्शन और पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इसी आस्था के साथ प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता श्री नैना देवी के दरबार में माथा टेकने पहुंच रहे हैं.

रिपार्टः सुभाष चंद, बिलासपुर, हिमाचल

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