'भूजल सप्ताह-2026' के तहत 'जल-संवाद' कार्यक्रम की अध्यक्षता भूगर्भ जल विभाग के निदेशक डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने की। इस दौरान प्राकृतिक और कम लागत वाली जल शोधन तकनीकों पर भी चर्चा हुई। जहां सहजन के बीज और छिद्रयुक्त ज्वालामुखीय पत्थर के उपयोग से पानी शुद्ध करने की तकनीक प्रस्तुत की गई। इसके जरिए आरओ सिस्टम से खराब होने वाला लाखों लीटर पानी बचाया जा सकेगा। भूगर्भ जल विभाग ने इस विजन का स्वागत करते हुए आगे शोध व आगामी संभावनाओं में दिलचस्पी व्यक्त की।
इस तरह उपयोगी हो सकता है मोरिंगा सीड्स, स्कोरिया वॉल्केनिक रॉक
स्कोरिया वॉल्केनिक रॉक (छिद्रयुक्त ज्वालामुखीय पत्थर) और मोरिंगा (सहजन के बीज) प्राकृतिक जल शोधन में उपयोगी माने जाते हैं। मोरिंगा के बीजों का पाउडर पानी में मौजूद गंदगी और सूक्ष्म कणों को एकत्र कर नीचे बैठने में मदद करता है, जबकि स्कोरिया रॉक अपनी छिद्रयुक्त संरचना के कारण फिल्टर की तरह अशुद्धियों को कम करने में सहायक हो सकती है। हालांकि इसे पूर्ण रूप से लागू करने के लिए अन्य शोध की आवश्यकता है।
विशेष प्रोत्साहन व पुरस्कार की जरूरत
'जल-संवाद' में विशेषज्ञों ने भूजल संकट की चुनौतियों और संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। सामाजिक संगठनों ने सुझाव दिया कि जिन गांवों, शहरों और आवासीय सोसाइटियों में वर्षा जल संचयन, रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग व अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण जैसे कार्य प्रभावी ढंग से किए जा रहे हैं, उन्हें विशेष प्रोत्साहन और पुरस्कार दिए जाए। इससे जल संरक्षण के प्रति सकारात्मक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और समाज में प्रेरणादायक उदाहरण स्थापित होंगे। साथ ही रिमोट सेंसिंग और जीआईएस तकनीक के माध्यम से जल संरक्षण एवं भूजल भंडारण की मैपिंग पर शोध तथ्यों को मुहिम से जोड़ने की बात कही गई।
भूगर्भ जल विभाग के निदेशक डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। प्रत्येक नागरिक को जल संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाना होगा।