यूपी में खुलेंगे 8 नए मेडिकल कॉलेज, 2-3 महीनों में पूरा होगा काम, ब्रजेश पाठक ने TV9 के मंच से किया ऐलान
TV9 Bharatvarsh July 21, 2026 08:42 PM

राजधानी दिल्ली में मंगलवार को ‘भारतवर्ष के टॉपर’ कार्यक्रम का मंच सजा, जिसमें उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक शामिल हुए. वह यूपी के मेडिकल एजुकेशन मंत्री भी हैं. उन्होंने इस कार्यक्रम में कई मुद्दों पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि राज्य में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में पिछले कुछ सालों में काफी बदलाव हुए हैं. टीवी9 के मंच से उन्होंने ऐलान किया कि उत्तर प्रदेश में 8 नए मेडिकल कॉलेज खुलेंगे.

उन्होंने बताया कि साल 2017 में यूपी में कुल 40 मेडिकल कॉलेज थे, जिनमें 17 सरकारी और 23 प्राइवेट थे. अब यह संख्या बढ़कर 83 हो गई है और जल्द ही यूपी के सभी 75 जिलों में मेडिकल कॉलेज खुल जाएंगे. उन्होंने कहा कि कुछ जिलों में दो-तीन मेडिकल कॉलेज भी हो जाएंगे.

उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में एमबीबीएस की सीटें पहले के मुकाबले काफी बढ़ गई हैं और एमएस/एमडी ((MS/MD) की सीटें भी लगभग ढाई गुनी हो चुकी हैं, जबकि एमसीएच कोर्सेज (MCh) जैसे विशिष्ट श्रेणी के जो डॉक्टर तैयार करते हैं, उनमें भी पर्याप्त वृद्धि हमने हासिल की है.

WHO के पैमाने पर हो रहा काम

उन्होंने आगे कहा कि सिर्फ डॉक्टर बनाने से मेडिकल एजुकेशन विभाग आगे नहीं बढ़ेगा. इसके लिए पैरामेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों को भी बराबर से हमें खोलना पड़ता है. डब्ल्यूएचओ का पैमाना है कि 1000 पर एक डॉक्टर, तीन पैरामेडिकल और तीन नर्सेज चाहिए. उस दिशा में भी हम लगातार काम कर रहे हैं. हर मेडिकल कॉलेज के साथ हम नर्सिंग कॉलेज और पैरामेडिकल को भी जोड़ रहे हैं. बड़ी संख्या में हमें सफलता मिली है.

क्वालिटी कंट्रोल ऑफ इंडिया से समझौता

डिप्टी सीएम ने कहा कि मिशन निरामया के माध्यम से हमने नर्सिंग कॉलेजों पर गुणवत्ता परक शिक्षा मिले बच्चों को, उस दिशा में हमने एक नया फार्मूला तैयार किया है. साल 2017 में जब इम्तिहान कराया तो हमने 3000 पद हमने विज्ञापित किए नर्सेज के, जिसके लिए 1 लाख आवेदन आए. उसमें हमने देखा कुल 2200 बच्चे ही कट ऑफ पर आ पाए. तो हमने पूरे प्रोसेस को रीड किया और पता चला कि बच्चों को पढ़ाया ही नहीं गया था. उनको मार्कशीट पकड़ा दी गई थी. इसके बाद हमने एक नई चीज लागू की.

उन्होंने कहा किहमने ऐसे सभी स्कूलों की जो नर्सिंग क्षेत्र में थे और जिनके पास अस्पताल नहीं थे, जिनके पास फैकल्टी नहीं थे, उनकी मान्यता खत्म की और नए सिरे से हमने इसको शुरू किया. क्वालिटी कंट्रोल ऑफ इंडिया से समझौता किया कि बच्चों को गुणवत्ता परक शिक्षा मिले. उसमें यह भी लागू किया हम इंटर कॉलेज और डिग्री कॉलेज में जाएंगे, बच्चों के बताएंगे कि अगर आपको सेवा के क्षेत्र में आना है तो नर्सिंग और पैरामेडिकल भी बेहतर रास्ता हैं.

यूपी के AIIMS में बढ़ाए जा रहे फैकल्टी

डिप्टी सीएम ने आगे कहा कि भारत सरकार ने हमको रायबरेली और गोरखपुर का एम्स दिया है. वो एम्स, दिल्ली के एम्स के बराबर नहीं हैं, ऋषिकेश का एम्स दिल्ली के बराबर नहीं है, लेकिन ग्रो कर रहे हैं. हम फैकल्टी भी बढ़ा रहे हैं, अनुभव भी बढ़ रहा है और बच्चे भी अच्छी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. एक और बड़ी समस्या है जिसके बारे में बार-बार जिक्र होता है, क्योंकि उत्तर प्रदेश की जनसंख्या भी इतनी ज्यादा है तो जो डॉक्टर और जनसंख्या का अनुपात है, वो देश में तो बहुत सुधरा है. देश में ओवरऑल पिछले काफी समय से काम हो रहा है और वो बेहतर हो रहा है. उत्तर प्रदेश में अभी भी उस ओर हमें बहुत सा काम करने की जरूरत है.

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