1000 करोड़ का पर्यावरण राहत कोष पड़ा बेकार! सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सीपीसीबी से मांगा जवाब
TV9 Bharatvarsh July 22, 2026 12:43 AM

पर्यावरण राहत कोष में जमा 1000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के इस्तेमाल नहीं होने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2008 में बनी इस योजना के तहत आज तक किसी भी लाभार्थी को कोई राशि नहीं दी गई. अदालत ने याचिकाकर्ता के प्रयासों की भी सराहना की.

1000 करोड़ के राहत कोष पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने मंगलवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई की. याचिका में आरोप लगाया गया है कि पर्यावरण राहत कोष में जमा 1000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का अब तक उपयोग नहीं किया गया है. इस पर अदालत ने केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के सदस्य सचिव को नोटिस जारी कर पूरे मामले पर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया.

याचिकाकर्ता ने क्या कहा, अदालत ने क्यों की तारीफ

जबलपुर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता ज्ञान प्रकाश की ओर से अदालत में कहा गया कि वर्षों से निष्क्रिय पड़े इस राहत कोष का उपयोग सड़क दुर्घटना पीड़ितों की सहायता के लिए किया जाना चाहिए था. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वर्ष 2019 में दायर इस जनहित याचिका में पर्यावरण राहत कोष के कथित गैर उपयोग का महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया है. अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि यह कोष मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 को लोक देयता बीमा कानून 1991 के साथ पढ़े जाने के तहत वसूला गया प्रतीत होता है.

2008 में बनी योजना, लेकिन किसी को नहीं मिला लाभ

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि पर्यावरण राहत कोष योजना वर्ष 2008 में बनाई गई थी, लेकिन अब तक इसके तहत किसी भी लाभार्थी को कोई राशि वितरित नहीं की गई. केंद्र सरकार की ओर से दी गई जानकारी का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि वर्ष 2020 तक इस कोष में 881 करोड़ रुपये जमा थे, जो बाद में बढ़कर 1000 करोड़ रुपये से अधिक हो गए. जब अदालत को बताया गया कि इस कोष का संचालन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कर रहा है, तब पीठ ने कोष के उपयोग या गैर उपयोग को लेकर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया.

ये भी पढ़ें: क्रूड ऑयल नहीं, भारत में इन आठ फैक्टर से तय होती है पेट्रोल-डीजल की कीमत

© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.