63 की उम्र में दादी ने पूरा किया 45 साल पुराना सपना, 79.6% अंकों से पास की 10वीं की परीक्षा
कविता गाडरी July 22, 2026 03:42 PM

Success Story: आपने कई बार यह सुना होगा की पढ़ाई-लिखाई की कोई उम्र नहीं होती है. इसी चीज को हरियाणा की एक 63 वर्षीय दादी ने साबित कर दिया है. हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले की रहने वाली और मूल रूप से रेवाड़ी जिले की सुशीला देवी ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग की दसवीं परीक्षा में 79.6 प्रतिशत अंक हासिल कर फर्स्ट डिवीजन से सफलता प्राप्त की है. यह उपलब्धि केवल एक परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके उस अधूरे सपने की पूर्ति भी है जो करीब 45 साल पहले परिस्थितियों के कारण अधूरा रह गया था. अब उनका अगला टारगेट 12वीं की परीक्षा पास करना और भविष्य में सरपंच का चुनाव लड़ना है.

पांचवी के बाद छूट गई थी पढ़ाई 

सुशीला देवी बचपन से ही पढ़ाई में बहुत होनहार थी. उन्होंने प्राथमिक विद्यालय में टॉप किया था और छात्रवृत्ति भी हासिल की थी. लेकिन पारिवारिक कारणों और सामाजिक परंपराओं के चलते पांचवी कक्षा के बाद उनकी पढ़ाई रुक गई. परिवार ने आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें दूसरे शहर भेजने की अनुमति नहीं दी, जिसके कारण उनका शिक्षा का सपना अधूरा रह गया. वहीं 1981 में उनकी शादी महेंद्रगढ़ जिले के देवनगर गांव के किसान बाबूलाल से हो गई. शादी के बाद उन्होंने परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियां निभाई,  लेकिन पढ़ाई के प्रति उनका लगाव कभी खत्म नहीं हुआ. वह नियमित रूप से अखबार पढ़ती रही और खुद को नई जानकारियों से जोड़े रखती थी. यही आदत उनके अंदर सीखने की इच्छा को लगातार जिंदा रखती रही. 

बेटे ने बढ़ाया हौसला एनआईओएस में कराया एडमिशन 

सुशीला देवी की जिंदगी में नया मोड़ तब आया जब उनके बेटे विष्णु ने उनसे दोबारा पढ़ाई शुरू करने की बात की. शुरुआत में उन्हें इस बात की चिंता थी कि 63 की उम्र में पढ़ाई करना आसान नहीं होगा और लोग क्या सोचेंगे. हालांकि बेटे ने उनका कॉन्फिडेंस बढ़ाया और एनआईओएस में उनका एडमिशन कराया. परिवार ने भी हर कदम पर उनका साथ दिया. 

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रोज तीन से चार घंटे की पढ़ाई से मिली सफलता 

घर के सभी काम पूरा करने के बाद सुशीला देवी रोजाना तीन से चार घंटे पढ़ाई करती थी. शुरुआत में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषय कठिन लगे. लेकिन पति बेटे और दोनों बेटियों ने पढ़ाई में उनकी पूरी मदद की. लगातार मेहनत और परिवार के सहयोग की बदौलत उन्होंने परीक्षा में अच्छी तैयारी की. एनआईओएस 10वीं परीक्षा के रिजल्ट में सुशीला देवी ने 79.6 प्रतिशत अंक हासिल कर फर्स्ट डिवीजन प्राप्त किया. विषयवार अंकों की बात करें तो उन्हें अंग्रेजी में 89, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में 88, गणित में 78, पेंटिंग में 76 और हिंदी में 67 अंक मिले. उनकी उपलब्धि से परिवार के साथ-साथ पूरा गांव भी गौरवान्वित महसूस कर रहा है. 

12वीं के बाद सरपंच बनने का सपना 

सुशीला देवी का सफर दसवीं पास करने के बाद रुकने वाला नहीं है. उन्होंने अब 12वीं की परीक्षा की तैयारी शुरू करने का फैसला किया है. साथ ही उन्होंने इच्छा जताई है कि अगर गांव के लोगों का समर्थन मिला, तो वह भविष्य में सरपंच का चुनाव भी लड़ेंगे. दसवीं की परीक्षा पास करना उनके लिए इसी दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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