Sawan Som Pradosh Vrat 2026: सावन में बनेगा सोम प्रदोष व्रत का महासंयोग, जानें डेट, पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि
TV9 Bharatvarsh July 22, 2026 07:43 PM

Sawan Som Pradosh Vrat 2026: हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष का व्रत रखा जाता है. जिस दिन प्रदोष व्रत पड़ता है, उस दिन जो वार होता है उसी के नाम पर इस व्रत को रखा जाता है. प्रदोष का व्रत महादेव को समर्पित किया गया है. ये व्रत महादेव की कृपा पाने का सबसे अच्छा अवसर होता है. इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष व्रत के दिन उपवास रखने और पूजा करने से भगवान शिव बहुत प्रसन्न होते हैं. इस दिन की गई शिव पूजा का फल कई गुना अधिक मिलता है.

धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष का व्रत रखने और शिव पूजन करने से जीवन के सारे दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं. महादेव का आशीर्वाद बना रहता है. यही नहीं मृत्यु के बाद आत्मा को शिव चरणों में स्थान प्राप्त होता है. सावन में प्रदोष व्रत का महत्व काफी बढ़ जाता है. इस साल सावन में सोम प्रदोष व्रत का महासंयोग बनेगा. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल सावन माह 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा. 10 अगस्त को सोमवार है. इस दिन सोम प्रदोष का व्रत रखा जाएगा. आइए जानते हैं सावन के सोम प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि.

सावन सोम प्रदोष व्रत तिथि ( Sawan Som Pradosh Vrat 2026 Tithi)

द्रिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 10 अगस्त, सोमवार को सुबह 08 बजे शुरू होगी. इस तिथि का समापन 11 अगस्त, मंगलवार को सुबह 04.बजकर 54 मिनट होगा. ऐसे में प्रदोष काल को देखते हुए 10 अगस्त, सोमवार के दिन सावन माह का सोम प्रदोष व्रत रखा जाएगा.

सावन सोम प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त ( Sawan Som Pradosh Vrat 2026 Puja Muhurat)

द्रिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के सोम प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल का समय शाम को 07 बजकर 05 मिनट पर शुरू होगा. ये समय रात 09 बजकर 14 मिनट तक रहेगा. ऐसे में शिव भक्तों को इस दिन पूजा के लिए 02 घंटे 09 मिनट का समय मिलेगा.

प्रदोष व्रत पूजा विधि ( Pradosh Vrat Puja Vidhi)

सोम और भौम प्रदोष का व्रत करने वाले भक्त पहले सुबह स्नान करें. भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें. शिवलिंग पर जल चढ़ाएं. फिर शाम के समय प्रदोष काल में शिव की विधिवत पूजा-अर्चना करें. शिवलिंग का जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें. इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, चंदन और पुष्प अर्पित करें. पूजा के दौरान ॐ नमः शिवाय और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें. प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें. अंत में आरती से पूजा का समापन करें.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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