Vijay Jana Nayagan: अभिनेता के 'जन नेता' बनने की कहानी, कैसा है सिनेमा का ये सियासी चेहरा?
TV9 Bharatvarsh July 22, 2026 07:43 PM

सिनेमा का पर्दा और राजनीति का मंच- दोनों के लिए यह अनोखा अवसर होने जा रहा है. तमिलनाडु की जनता अपने मुख्यमंत्री को पर्दे पर अभिनय करते देखेगी. यह अनुभव दिलचस्प होगा. वैसे तो सिल्वर स्क्रीन पर थलपति विजय (vijay thalapathy) को यहां के दर्शक अनेक बार देख चुके हैं लेकिन जन नेता रिलीज का दिन स्पेशल होगा. इतिहास में दर्ज होने वाला यादगार दिन. सत्ता की गद्दी पर विजय और थिएटर के पर्दे पर भी विजय. दीवारों के पोस्टरों पर विजय, दर्शकों के दिलों-दिमाग में भी विजय.

भारतीय सिनेमा और राजनीति के इतिहास में इसके नजीर ज्यादा नहीं हैं. करीब साढ़े चार दशक पहले सन् 1977 में ऐसा ही हुआ था, जब एमजीआर के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी एक फिल्म रिलीज हुई. तमिलनाडु में वैसे भी सियासत और सिनेमा का अपना इतिहास है, और विजय की गद्दी संभालने के बाद उस इतिहास ने खुद को दोहराया है.

‘जन नेता’ राजनीतिक एक्शन थ्रिलर

विजय की जन नेता (Jana Nayagan) को राजनीतिक एक्शन थ्रिलर बताया गया है. यानी यह पूरी तरह से कमर्शियल मूवी है, इसमें आर्ट और क्राफ्ट खोजने की दरकार कम ही होगी. विजय इसमें पुलिस अधिकारी बने हैं और अन्याय के विरुद्ध लड़ते हैं- किसी भी आम कमर्शियल फिल्म के नायक की तरह. थलपति इस फिल्म के मेन प्रोटेगोनिस्ट हैं. फिल्म में क्या-क्या घटनाएं होंगी, कैसे-कैसे एक्शन होंगे, क्या-क्या संवाद होंगे, इसे रिलीज के बाद ही देखा जा सकेगा. लेकिन इतना तो साफ है कि यह फिल्म सिनेमा से सियासत की दुनिया में आए मुख्यमंत्री विजय के सोशल विजन की झलक भी हो सकती है.

जन नेता फिल्म का निर्देशन एच. विनोद ने किया है. डायरेक्टर ने फिल्म के प्लॉट के बारे में संकेत दे दिया है. एच. विनोद ने एक साक्षात्कार में बताया है कि इसकी कहानी तेलुगु की चर्चित फिल्म भगवंत केसरी से मिलती-जुलती है, नए संदर्भ में मुख्यमंत्री विजय के राजनीतिक उद्देश्य की यह सिनेमाई पेशकश है. एक तरह से जन नेता भी विजय की प्रोपेगेंडा फिल्म हो सकती है. यह विजय के राजनीतिक करियर की प्रमोशनल मूवी है.

राजनीति में फिल्म से प्रचार प्रसार

फिल्म का इंटरनेशनल क्रेज बना हुआ है. राजनीति में सक्रिय होने के साथ ही विजय की जन नेता की बुनियाद पड़ चुकी थी. विजय अपनी फिल्मों में गुस्सैल नायक की छवि के लिए जाने जाते हैं. साल 2009 में ही उन्होंने अभिनय के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ता की भूमिका निभानी शुरू कर दी थी. अभिनय के साथ समाज सेवा जारी रही. राजनीतिक पहल भी की.

साल 2024 तक आते-आते विजय ने राजनीति में पूरी तरह से उतरने का फैसला कर लिया. उन्होंने सिनेमा से संन्यास की घोषणा कर दी और नई पार्टी टीवीके (TVK) बनाई. 2026 के विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतकर विजय ने दस मई को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. इस बीच विजय राजनीति के प्रचार-प्रसार में जुटे रहे वहीं जन नेता का प्रमोशन भी होता रहा जो उनके सियासी मंसूबे को धार देता रहा.

जन नेता को पैन इंडिया बनाने की पहल

आपको बताएं कि विलपति विजय की जन नेता मूल तमिल ही नहीं बल्कि तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और हिंदी में भी देखने को मिलेगी. इसके हिंदी डब का नाम जन नेता है. फिल्म में थलपति विजय के साथ पूजा हेगड़े और बॉबी देओल भी हैं. इस तरह से जन नेता को पैन इंडिया मूवी बनाने की रणनीति बनाई गई है. दक्षिण में विजय तो उत्तर में बॉबी देओल के नाम पर दर्शक थिएटर्स में आ सकते हैं.

वैसे देखें तो सिनेमा के जरिए सियासत को मजबूती देने का यह कोई पहला प्रयास नहीं है. पीछे जाएं तो इसके कई नजीर दिखाई देते हैं. दक्षिण के सिनेमा की दुनिया में ही नहीं बल्कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में भी ऐसा खूब देखा गया है. साल 1984 का वो दौर याद कीजिए. इस साल अमिताभ बच्चन ने इलाहाबाद से लोकसभा का चुनाव लड़ा था. और नतीजे के बाद उनकी इंकलाब फिल्म आई थी. फिल्म में श्रीदेवी मुख्य अभिनेत्री थीं.

बिग के चुनाव जीतने के बाद आई इंकलाब

अमिताभ बच्चन ने नया-नया राजनीति में कदम रखा था और संयोगवश देखिए कि तुरंत रिलीज फिल्म इंकलाब का विषय भी पूरी तरह से राजनीतिक था. इस फिल्म में भी अमिताभ बच्चन पहले पुलिस अधिकारी बने थे और बाद में मुख्यमंत्री बनते हैं. फिल्म का प्लॉट राजनीति और भ्रष्टाचार का गठजोड़ था, जिसे अमिताभ बच्चन आखिरी सीन में खत्म करते हैं. अमिताभ ने राजनीति से तो आगे चलकर संन्यास ले लिया लेकिन इस फिल्म की कहानी और इसमें निभाए किरदार उनके राजनीतिक उद्देश्य को प्रशस्त करने के इरादे से लैस थे.

राजनीति में आने से पहले कंगना की फिल्में

अब हाल के सालों में कंगना रनौत की थलैवी या फिर इमरजेंसी जैसी फिल्मों को देखिए. लोकसभा का चुनाव लड़ने और जीतने से पहले कंगना ने अपनी छवि की धार देने के मकसद से कहानी और किरदार का चुनाव करना शुरू कर दिया था. कंगना ने वैसी फिल्में की जो उनकी शख्सियत को सियासत में जगह प्रदान करने के दावे को मजबूत करती हो.

भारतीय फिल्म जगत में इसके और भी कई नजीर हैं. अब वही नजीर एक बार फिर थलपति विजय और उनकी फिल्म जन नेता में देखा जा सकता है. लेकिन देखना दिलचस्प होगा कि प्रदेश की जनता ने जिस अभिनेता को नेता से मुख्यमंत्री बनाया, उसकी जन नेता फिल्म को कितना वोट देती है, इस फिल्म से विजय कितना बड़ा इंकलाब करते हैं?

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