फिलीपींस के सैनिक पर चीन का डंडा हमला, दक्षिण चीन सागर में बढ़ी टकराव की आंच
TV9 Bharatvarsh July 23, 2026 12:43 AM

दक्षिण चीन सागर के अयुंगिन यानी सेकेंड थॉमस शोल पर 20 जुलाई 2026 को चीन कोस्ट गार्ड ने फिलीपींस नौसेना के एक जवान के सिर पर लकड़ी के डंडे से हमला कर दिया. फिलीपींस ने इसे चीन के लगातार आक्रामक और उकसावे वाले व्यवहार का हिस्सा बताया है. यह घटना सिर्फ समुद्री विवाद नहीं, बल्कि चीन की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है जिसके जरिए वह फर्स्ट आइलैंड चेन की घेराबंदी तोड़कर दक्षिण चीन सागर पर अपना दबदबा मजबूत करना चाहता है.

अयुंगिन शोल पर लगातार बढ़ रहा है चीन का दबाव

20 जुलाई 2026 को अयुंगिन यानी सेकेंड थॉमस शोल पर बीआरपी सिएरा माद्रे के पास चीन कोस्ट गार्ड के जवानों ने फिलीपींस नौसेना के एक सैनिक के सिर पर लकड़ी के डंडे से हमला किया. फिलीपींस सशस्त्र बलों ने इसे चीन के उकसावे और आक्रामक रवैये का साफ उदाहरण बताया. इससे पहले फरवरी 2023 में चीन कोस्ट गार्ड के जहाज 5205 ने फिलीपींस कोस्ट गार्ड के बीआरपी मलापास्कुआ पर मिलिट्री ग्रेड लेजर का इस्तेमाल किया था. अगस्त 2023 में पानी की तेज धार से सप्लाई मिशन रोकने की कोशिश हुई. 17 जून 2024 को चीन कोस्ट गार्ड के जवान धारदार हथियार लेकर फिलीपींस की नौकाओं पर चढ़ गए थे, जिसमें आठ सैनिक घायल हुए. यह सब ऐसे स्तर पर किया गया कि 1951 की फिलीपींस अमेरिका म्युचुअल डिफेंस ट्रीटी के तहत सीधे सैन्य जवाब की स्थिति न बने. यह ताजा घटना ऐसे समय हुई है जब फिलीपींस आसियान की अध्यक्षता कर रहा है और कोड ऑफ कंडक्ट पर बातचीत चल रही है.

फर्स्ट आइलैंड चेन क्यों है चीन के लिए सबसे बड़ी चुनौती

फर्स्ट आइलैंड चेन वह समुद्री घेरा है जो कुरिल द्वीप, जापान, रयुक्यु, ताइवान, फिलीपींस और बोर्नियो तक फैला है. इसकी शुरुआत अमेरिका की 1949 की एनएससी 48/2 योजना में हुई थी, लेकिन बाद में चीन के रणनीतिकारों ने इसे उस घेराबंदी के रूप में देखा जिसे तोड़ना जरूरी है. मियाको स्ट्रेट, बाशी चैनल और लुजोन स्ट्रेट जैसे प्रमुख समुद्री रास्तों पर अमेरिका और उसके सहयोगियों की लगातार निगरानी रहती है. दूसरी ओर 1951 की अमेरिका जापान सुरक्षा संधि, 1951 की फिलीपींस अमेरिका म्युचुअल डिफेंस ट्रीटी और 2014 के एनहांस्ड डिफेंस कोऑपरेशन एग्रीमेंट के तहत अमेरिका को फिलीपींस के नौ सैन्य ठिकानों तक पहुंच मिली हुई है. 15 जनवरी 2026 को फिलीपींस और जापान ने एक्विजिशन एंड क्रॉस सर्विसिंग एग्रीमेंट पर भी हस्ताक्षर किए. ऐसे में चीन की नौसेना के लिए खुले प्रशांत महासागर तक पहुंचना आसान नहीं माना जाता.

साउथ चाइना सी पर कब्जे की रणनीति और 2016 के फैसले की चुनौती

एनालिसिस के मुताबिक चीन ने ईस्ट चाइना सी की बजाय साउथ चाइना सी पर ज्यादा ध्यान इसलिए दिया क्योंकि यहां उसे ज्यादा रणनीतिक फायदा मिलता है. फिलीपींस को छोड़कर कोई भी दक्षिण पूर्व एशियाई दावेदार देश अमेरिका का संधि सहयोगी नहीं है और आसियान की सर्वसम्मति वाली व्यवस्था चीन के खिलाफ मजबूत प्रतिक्रिया नहीं दे पाती. हैनान स्थित युलिन पनडुब्बी अड्डे से गहरे समुद्र तक पहुंच का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता भी यही क्षेत्र है. इसके अलावा चीन के आयातित कच्चे तेल का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा मलक्का मार्ग से होकर गुजरता है, जिसे 2003 में तत्कालीन राष्ट्रपति हू जिंताओ ने मलक्का दुविधा कहा था.

12 जुलाई 2016 को फिलीपींस बनाम चीन मामले में मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने साफ कहा था कि नाइन डैश लाइन का संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून के तहत कोई कानूनी आधार नहीं है और सेकेंड थॉमस शोल फिलीपींस के विशेष आर्थिक क्षेत्र में आता है. हालांकि चीन ने इस फैसले को शुरू से ही अमान्य बताया और अपने दावे या कार्रवाई में कोई बदलाव नहीं किया. इसी वजह से अयुंगिन जैसी घटनाओं को अब साउथ चाइना सी में चीन की लंबी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

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