ईरान पर हमले के लिए अमेरिका का बड़ा कदम, UK बेस से तैनात हुआ B1 बॉम्बर
TV9 Bharatvarsh July 24, 2026 02:43 AM

ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने बड़ा सैन्य कदम उठाया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ब्रिटेन के RAF फेयरफोर्ड एयरबेस से लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम B-1 बॉम्बर तैनात किया है. बताया जा रहा है कि इस विमान का इस्तेमाल ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों पर हमले के लिए किया गया. इस कदम के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है. वहीं, ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उसके खिलाफ कोई और हमला हुआ तो उसका जवाब “आंख के बदले आंख” की नीति के तहत दिया जाएगा.

अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका ने ब्रिटेन के RAF फेयरफोर्ड एयरबेस से B-1 बॉम्बर उड़ाकर ईरान के खिलाफ अपना सैन्य अभियान तेज कर दिया है. यह ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम के कार्यकाल में UK से शुरू हुआ पहला बड़ा अमेरिकी मिशन माना जा रहा है. Axios की रिपोर्ट के अनुसार, इस B-1 बॉम्बर का इस्तेमाल ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया गया. B-1 अमेरिकी वायुसेना का लंबी दूरी तक हमला करने वाला बॉम्बर है, जो एक साथ 24 तक 2,000 पाउंड के बम ले जा सकता है.

एयरबेस इस्तेमाल करने की मिली इजाजत

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, ब्रिटेन ने अमेरिका को RAF फेयरफोर्ड और हिंद महासागर में मौजूद डिएगो गार्सिया एयरबेस का इस्तेमाल “रक्षात्मक हमलों” के लिए जारी रखने की अनुमति दी है. हालांकि, इस फैसले को लेकर ब्रिटिश सरकार के भीतर मतभेद भी सामने आए हैं. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी जहाज पर हमला हुआ तो अमेरिका ईरान के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर, जैसे पुल और बिजली संयंत्रों, को निशाना बना सकता है.

उधर, इराक के शालमचेह बॉर्डर क्रॉसिंग पर हुए अमेरिकी हमले में दो लोगों की मौत और 11 लोगों के घायल होने की खबर है. इसके बाद ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है. विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि ईरान का सिद्धांत “आंख के बदले आंख” है और किसी भी हमले का जोरदार जवाब दिया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि हमले में मदद करने वाले देशों को भी वैध सैन्य लक्ष्य माना जाएगा. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि पूरे मिडिल ईस्ट में लड़ाकू विमानों और बॉम्बर्स को हाई अलर्ट पर रखा गया है. वहीं, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 1.15 ट्रिलियन डॉलर का रक्षा नीति विधेयक भी पास कर दिया है, जिससे पेंटागन और खुफिया एजेंसियों को अतिरिक्त फंड मिलेगा. इस बीच, न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के जवाबी हमलों से अमेरिकी ठिकानों को भी नुकसान पहुंचा है. इससे साफ है कि दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बजाय लगातार बढ़ता जा रहा है.

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