बापू का रास्ता आज भी प्रासंगिक, अस्पताल से राजघाट पहुंचे वांगचुक
शिवांक मिश्रा July 28, 2026 03:42 AM

पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में अहम योगदान रहा. वे कई दिनों से भूख हड़ताल पर थे, लेकिन इसके बाद उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट करवा दिया गया. अब वांगचुक को हॉस्पिटल से डिसचार्ज कर दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर इसकी जानकारी दी. वह घर जाने से पहले पत्नी गीतांजलि के साथ राजघाट पहुंचे. सोनम वांगचुक ने कहा, 'गांधी का रास्ता आज भी प्रासंगिक है. अहिंसा, शांति से सफलता मिलती है.'

सोनम वांगचुक ने कहा, 'आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद, 26 दिन के अनशन और इस आंदोलन के अंत पर मैं सबसे पहले मैं बापू को याद करने उन्हें धन्यवाद देने राजघाट आना चाहता था, देश को बताना चाहता था कि उनका बताया रास्ता उतना ही प्रासंगिक है जितना 100 साल पहले थे, लोग कहते हैं कि ऐसे शासक के आगे ऐसे प्रदर्शन नहीं चलते हैं, ऐसे शासक जनता की सुनते हैं, चाहे मेरी न भी सुनें, उनके एक्सपेरिमेंट को मैंने फिर सफल होते देखा.

उन्होंने कहा, 'मुझे देश के स्तर पर नहीं पता था, लेकिन ये देश के स्तर पर भी उतना ही प्रासंगिक था. दुनिया को यही कहना चाहूंगा कि बापू के बताए रास्ते से रास्ता निकलता है, अगर खुद को पीड़ा दें और किसी और को पीड़ा न दें, ये कठोर से कठोर शासक को पिघला देता है. युवाओं ने इस आंदोलन को बहुत शांतिपूर्ण तरीके से किया, जो हल हुआ है वो हमारी लाठियों और पत्थरों से नहीं हुआ है, हमने जो पीड़ा झेली है उससे हुआ है. हम सब शांतिपूर्ण रहें यही मैं चाहता था.'

हॉस्पिटल से छुट्टी के बाद वांगचुक ने एक वीडियो मैसेज में कहा, 'सभी को नमस्कार, आखिर वो दिन आया, जब मैं इस अस्पताल से डिस्चार्ज हो रहा हूं. काफी बेहतर महसूस कर रहा हूं, खा रहा हूं और शरीर में जान आ रही है. आज मैं यहां से निकलते हुए और घर जाने से पहले राजघाट बापू को श्रद्धांजलि अर्पित करूंगा. आप लोगों को याद होगा, ऐसे ही मैं जब स्विटजरलैंड से आया था, अनशन शुरू करने से पहले राजघाट पर श्रद्धांजलि अर्पित करके जंतर-मंतर पहुंचे थे. मैं आप सभी को दिल की गहराइयों से शुक्रिया अदा करता हूं. आप सभी ने आवाज में आवाज मिलाकर आंदोलन चलाया और कामयाब हुए. सभी को सलाम, जय हिंद.'

28 जून को छात्रों के आंदोलन में शामिल हुए थे वांगचुक

वांगचुक 28 जून को छात्रों के आंदोलन में शामिल हुए थे और 26 दिनों तक अनशन पर रहे. उन्हें 18 जुलाई को सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया. वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल में कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा था जैसे उन्हें हिरासत में रखा गया हो. इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद वांगचुक को मेदांता अस्पताल में ट्रांसफर किया गया.

गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में 36 दिनों तक चला प्रदर्शन चला. वे पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे. प्रधान के इस्तीफे के बाद यह आंदोलन खत्म हो गया. अब प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय सौंपा गया है.

यह भी पढ़ें : दिल्ली-बिहार में लाठीचार्ज, लिचिंग, सभी मामले सुनेगा SC, बनाएगा SOP

© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.