पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में अहम योगदान रहा. वे कई दिनों से भूख हड़ताल पर थे, लेकिन इसके बाद उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट करवा दिया गया. अब वांगचुक को हॉस्पिटल से डिसचार्ज कर दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर इसकी जानकारी दी. वह घर जाने से पहले पत्नी गीतांजलि के साथ राजघाट पहुंचे. सोनम वांगचुक ने कहा, 'गांधी का रास्ता आज भी प्रासंगिक है. अहिंसा, शांति से सफलता मिलती है.'
#WATCH | Delhi | Activist Sonam Wangchuk, along with his wife Gitanjali Angmo, offers tributes at Rajghat, soon after getting discharged from Medanta Hospital in Gurugram. pic.twitter.com/voNfoVmsyD
— ANI (@ANI) July 27, 2026
सोनम वांगचुक ने कहा, 'आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद, 26 दिन के अनशन और इस आंदोलन के अंत पर मैं सबसे पहले मैं बापू को याद करने उन्हें धन्यवाद देने राजघाट आना चाहता था, देश को बताना चाहता था कि उनका बताया रास्ता उतना ही प्रासंगिक है जितना 100 साल पहले थे, लोग कहते हैं कि ऐसे शासक के आगे ऐसे प्रदर्शन नहीं चलते हैं, ऐसे शासक जनता की सुनते हैं, चाहे मेरी न भी सुनें, उनके एक्सपेरिमेंट को मैंने फिर सफल होते देखा.
उन्होंने कहा, 'मुझे देश के स्तर पर नहीं पता था, लेकिन ये देश के स्तर पर भी उतना ही प्रासंगिक था. दुनिया को यही कहना चाहूंगा कि बापू के बताए रास्ते से रास्ता निकलता है, अगर खुद को पीड़ा दें और किसी और को पीड़ा न दें, ये कठोर से कठोर शासक को पिघला देता है. युवाओं ने इस आंदोलन को बहुत शांतिपूर्ण तरीके से किया, जो हल हुआ है वो हमारी लाठियों और पत्थरों से नहीं हुआ है, हमने जो पीड़ा झेली है उससे हुआ है. हम सब शांतिपूर्ण रहें यही मैं चाहता था.'
हॉस्पिटल से छुट्टी के बाद वांगचुक ने एक वीडियो मैसेज में कहा, 'सभी को नमस्कार, आखिर वो दिन आया, जब मैं इस अस्पताल से डिस्चार्ज हो रहा हूं. काफी बेहतर महसूस कर रहा हूं, खा रहा हूं और शरीर में जान आ रही है. आज मैं यहां से निकलते हुए और घर जाने से पहले राजघाट बापू को श्रद्धांजलि अर्पित करूंगा. आप लोगों को याद होगा, ऐसे ही मैं जब स्विटजरलैंड से आया था, अनशन शुरू करने से पहले राजघाट पर श्रद्धांजलि अर्पित करके जंतर-मंतर पहुंचे थे. मैं आप सभी को दिल की गहराइयों से शुक्रिया अदा करता हूं. आप सभी ने आवाज में आवाज मिलाकर आंदोलन चलाया और कामयाब हुए. सभी को सलाम, जय हिंद.'
AND FINALLY....
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 27, 2026
I'm being discharged from the hospital. Will be going to Rajghat to pay tribute to Mahatma Gandhi and then back to the mountains.
Thank you all and BIG THANK YOU to the wonderful team of doctors and staff at Medanta Hospital Gurgaon. pic.twitter.com/BBp5k6JY9X
28 जून को छात्रों के आंदोलन में शामिल हुए थे वांगचुक
वांगचुक 28 जून को छात्रों के आंदोलन में शामिल हुए थे और 26 दिनों तक अनशन पर रहे. उन्हें 18 जुलाई को सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया. वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल में कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा था जैसे उन्हें हिरासत में रखा गया हो. इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद वांगचुक को मेदांता अस्पताल में ट्रांसफर किया गया.
गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में 36 दिनों तक चला प्रदर्शन चला. वे पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे. प्रधान के इस्तीफे के बाद यह आंदोलन खत्म हो गया. अब प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय सौंपा गया है.
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