सिर्फ फोन के OS की वजह से एयरपोर्ट पर फंस गया शख्स! जानिए पूरा मामला
TV9 Bharatvarsh July 28, 2026 01:43 PM

अगर आप अपने स्मार्टफोन में प्राइवेसी के लिए अलग एंड्रॉयड ओएस इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए है. अमेरिका में एक व्यक्ति को एयरपोर्ट पर फोन जांच के दौरान डेटा मिट जाने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया. इस मामले में ग्रेफीन ओएस नाम के एंड्रॉयड आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम पर सवाल उठे हैं. हालांकि, इस ओएस को बनाने वाली कंपनी का कहना है कि इसका इस्तेमाल पूरी तरह कानूनी है. चलिए समझते हैं पूरा मामला.

क्या है पूरा मामला?

‘द गार्डियन’ की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के अटलांटा एयरपोर्ट पर एक व्यक्ति विदेश यात्रा से लौट रहा था. जांच के दौरान अधिकारियों ने उससे फोन अनलॉक करने को कहा. जब उसने पासकोड डाला, तो फोन का डेटा अपने आप डिलीट हो गया. अधिकारियों का आरोप है कि उसने सबूत मिटाने के लिए जानबूझकर ऐसा किया, इसलिए उसे गिरफ्तार कर लिया गया. दूसरी तरफ, व्यक्ति का कहना है कि उसके फोन में ग्राफीनओएस नाम का एंड्रॉयड आधारित ओएस था, जिसमें गलत पासकोड डालने पर डेटा अपने आप मिटाने का सिक्योरिटी फीचर मौजूद है. अब अदालत में यह तय होगा कि यह जानबूझकर सबूत मिटाने की कोशिश थी या ओएस का सामान्य सिक्योरिटी फीचर.

एयरपोर्ट जांच के दौरान क्या हुआ?

रिपोर्ट के मुताबिक, सैमुअल ट्यूनिक 24 जनवरी को डोमिनिकन रिपब्लिक से लौटकर हार्ट्सफील्ड जैक्सन अटलांटा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचे थे. जांच के दौरान अधिकारियों ने उनसे कई बार फोन अनलॉक करने को कहा और चेतावनी दी कि ऐसा नहीं करने पर फोन जब्त कर लिया जाएगा. बाद में उन्होंने पासकोड डाला, लेकिन फोन की स्क्रीन कुछ बार चमकी, दोबारा चालू हुई और उसमें मौजूद डेटा मिट गया. अभियोजन पक्ष का कहना है कि यह सबूत मिटाने की जानबूझकर की गई कोशिश थी, जबकि ट्यूनिक के वकीलों का दावा है कि फोन की जांच ही उनके संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ थी.

ग्रेफीन ओएस पर क्यों उठे सवाल?

रिपोर्ट के अनुसार, ट्यूनिक के फोन में ग्रेफीन ओएस इंस्टॉल था. यह गूगल पिक्सल डिवाइस के लिए बना एक कस्टम एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम है. इसमें ऐसा फीचर मौजूद है, जिसमें तय किया गया खास पासकोड डालने पर फोन का पूरा डेटा अपने आप मिट सकता है. इसी फीचर को लेकर जांच एजेंसियों ने सवाल उठाए हैं. वहीं रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्पेन के कैटालोनिया क्षेत्र में कुछ मामलों में गूगल पिक्सल फोन इस्तेमाल करने वालों को ग्रेफीन ओएस का यूजर्स मानकर संदेह की नजर से देखा गया.

कंपनी ने क्या कहा?

ग्रेफीन ओएस ने इस मामले के बाद कहा कि उसका ऑपरेटिंग सिस्टम पूरी तरह कानूनी है और इसका उद्देश्य केवल यूजर्स के डेटा को अनधिकृत पहुंच से सुरक्षित रखना है. कंपनी का कहना है कि उसके सुरक्षा फीचर किसी कानून का उल्लंघन नहीं करते. उसने यह भी बताया कि डिवाइस में मजबूत एन्क्रिप्शन और सुरक्षा व्यवस्था दी गई है. डिफॉल्ट सेटिंग के तहत अगर फोन 18 घंटे तक अनलॉक नहीं होता, तो वह फिर से सुरक्षित स्थिति में लौट जाता है. यूजर चाहें तो इस समय को 10 मिनट तक भी सेट कर सकते हैं.

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की क्या राय है?

रिपोर्ट के मुताबिक, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का कानूनी मामला पहले कभी सामने नहीं आया. साइबर सुरक्षा और निगरानी विशेषज्ञ क्रिस्टोफ बूट्री ने कहा कि यह चिंता की बात है, क्योंकि इससे ऐसा संदेश जा सकता है कि ग्रेफीन ओएस का इस्तेमाल करना अपने आप में अपराध जैसा माना जा रहा है. वहीं, ट्यूनिक के वकील अदालत से इस मामले को खारिज करने और फोन से जुड़े सबूतों को हटाने की मांग कर रहे हैं.

ये भी पढ़ें: Google Maps बचाएगा आपका पेट्रोल और चालान, ऑन कर लें ये 4 सीक्रेट सेटिंग्स

© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.