होर्मुज के बाद अब लाल सागर पर होगा संग्राम! हूती के नए प्लान से और भड़केंगे ट्रंप?
TV9 Bharatvarsh July 30, 2026 02:43 PM

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बवाल मचा ही हुआ है, अब यमन में ईरान समर्थित हूथी विद्रोही भी दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से जहाजों पर ट्रांजिट फीस लेने का विचार कर रहे हैं. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है जब हूतियों ने हाल ही में सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया है. इसके साथ ही पश्चिम एशिया में तनाव का स्तर बढ़ गया है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक हूतियों ने इस प्रस्ताव पर ईरानी अधिकारियों के साथ चर्चा की थी, जब उनका प्रतिनिधिमंडल ईरान में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे के कार्यक्रम में पहुंचा था. सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने हूतियों को एक रेगुलेटरी बॉडी बनाने की सलाह भी दी है, जो बाब अल-मंदेब से गुजरने वाले जहाजों पर लगने वाली ट्रांजिट फीस की निगरानी और प्रबंधन कर सके. हालांकि, अभी तक इस ट्रांजिट फीस को लागू करने की कोई समयसीमा तय नहीं की गई है.

चीनी जहाजों को मिल सकती है छूट

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रस्तावित योजना के तहत चीनी जहाजों को ट्रांजिट फीस से छूट मिल सकती है. सूत्रों का कहना है कि हाल के महीनों में चीन और हूती समूह के बीच सीधी बातचीत हुई है ताकि दक्षिणी लाल सागर से गुजरने वाले चीनी व्यापारिक और ऊर्जा जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. बता दें कि चीन, सऊदी अरब के कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक है और लाल सागर का यह समुद्री मार्ग उसके लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है.

यमन सरकार ने जताई चिंता

यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की नामित विदेश मंत्री अफराह अल-जोबा ने रॉयटर्स से कहा कि हूती लाल सागर पर अपना कंट्रोल मजबूत करने कोशिश कर रहे हैं. अगर वह ऐसा कर लेते हैं तो जहाजों से ट्रांजिट शुल्क वसूलने की भी कोशिश करेंगे.

बाब अल-मंदेब क्यों है इतना अहम?

बाब अल-मंदेब स्ट्रेट यमन और अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र के बीच स्थित है. यह दक्षिणी लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है. इसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ‘चोक पॉइंट्स’ में गिना जाता है.सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के करीब 12 से 15 प्रतिशत समुद्री व्यापार इसी रास्ते से गुजरते हैं. विश्व के कंटेनर शिपिंग का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग पर निर्भर करता है. हर साल 20,000 से अधिक कार्गो जहाज इस जलमार्ग का इस्तेमाल करते हैं. रोजाना तकरीनबन 50 से 60 बड़े मालवाहक जहाज यहां से गुजरते हैं.

तेल और एलनजी के सप्लाई पर पड़ेगा असर

इस रास्ते हर दिन करीबन 40 लाख से 80 लाख बैरल कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी (LNG) दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचती है. अगर इस स्ट्रेट पर ट्रांजिट फीस लागू होती है या सुरक्षा जोखिम बढ़ता है, तो शिपिंग लागत बढ़ सकती है, जिसका असर तेल की कीमतों, सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है. साथ ही लाल सागर क्षेत्र में पहले से जारी तनाव और गहरा सकता है. हूतियों का रिका और उसके सहयोगी देशों के साथ टकराव बढ़ सकता है.

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