कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आठवां दिन भी भारत के लिए मेडल लेकर आया. हालांकि मेडल के लिए देर रात तक का इंतजार करना पड़ा लेकिन दिन का अंत दमदार रहा. महिलाओं के डिस्कस थ्रो कम्पटीशन में भारत की सीमा कालीरमन ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम कर लिया. इसके साथ ही इन गेम्स में भारत के लिए कुल मेडल की संख्या बढ़कर 17 तक पहुंच गई, जबकि एथलेटिक्स में ये कुल आठवां मेडल था जो भारत की झोली में आया. सीमा का ये कॉमनवेल्थ गेम्स में डेब्यू था और वो मेडल जीतकर ही लौटीं.
सिर्फ 2 सही थ्रो, फिर भी जीता मेडलग्लासगो में गुरुवार 30 जुलाई को दिनभर भारत को मेडल के लिए इंतजार करना पड़ा लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी. फिर दिन खत्म होने से ठीक पहले लवप्रीत सिंह ने वेटलिफ्टिंग में सिल्वर मेडल जीतकर कुछ राहत दिलाई. वहीं लगभग आखिरी इवेंट भी भारत के लिए अच्छी खबर लेकर आया. महिलाओं के डिस्कस थ्रो में भारत की सीमा ने 58.65 मीटर की दूरी के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीत लिया. वहीं इसी इवेंट में भारत की ही निधि रानी 57.10 मीटर के साथ चौथे नंबर पर रहीं.
हालांकि इस फाइनल में मेडल जीतने से पहले सीमा के लिए पूरी तरह सफलता नहीं आई. इस खिताबी मुकाबले में कुल 6 थ्रो में से उनके 4 प्रयास फाउल साबित हुए. सिर्फ 2 बार ही उन्होंने सफलतापूर्वक थ्रो किया. इसमें दूसरे थ्रो में ही 57.32 मीटर के साथ वो तीसरे स्थान पर आ गईं थी. फिर तीसरे प्रयास में उन्होंने इसे बेहतर किया और 58.65 मीटर की दूरी हासिल की. इसके बाद वो इसे सुधारने में नाकाम रहीं लेकिन कोई अन्य थ्रोअर भी उन्हें पीछे नहीं छोड़ सका. इस तरह अपने डेब्यू CWG में सीमा ने मेडल जीत लिया.
सीमा की कहानी बहुत खाससीमा या कहें डॉक्टर सीमा की इस सफलता में उनकी कड़ी मेहनत और टैलेंट के अलावा पति रविंदर का भी बड़ा योगदान है, जो पति होने के साथ ही सीमा के कोच की भूमिका भी निभा रहे हैं. स्पोर्टस्टार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हरियाणा के भिवानी से आने वाली सीमा और रविंदर की मुलाकात डिस्कस थ्रो के जरिए ही हुई क्योंकि खुद रविदंर भी इस खेल में सक्रिय थे. वो जूनियर और सब-जूनियर लेवल पर नेशनल चैंपियन थे लेकिन चोट के कारण वो अपने करियर को आगे नहीं बढ़ा सके.
फिर जब सीमा की मुलाकात रविंदर से हुई तो सीमा के पिता ने दोनों की शादी का प्रस्ताव रखा ताकि उनकी बेटी खेल में अपना करियर आगे बढ़ा सके. यही हुआ भी और इसमें रविंदर ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई. मगर सिर्फ डिस्कस थ्रो की कोचिंग ही नहीं बल्कि रविंदर के कहने पर ही कोरोनावायरस महामारी के दौरान सीमा ने स्पोर्ट्स में PhD की शुरुआत भी की. सीमा जब चोट के कारण फील्ड से दूर थीं तो उसी दौरान उनका बेटा हुआ. मगर सिर्फ 11 महीने बाद ही ससुराल वालों के कहने पर उन्होंने ट्रेनिंग शुरू की और बस तब से ही वो लगातार आगे बढ़ रही हैं.