अमेरिका ने गुरुवार को चीन, भारत, रूस और ईरान की छह संस्थाओं और व्यक्तियों पर प्रतिबंधों की घोषणा की. इन पर ईरानी एयरलाइन ‘महान एयर’ को सपोर्ट करने का आरोप है. वाशिंगटन का कहना है कि यह एयरलाइन लंबे समय से हथियारों, मिलिट्री हार्डवेयर और IRGC-कुद्स फोर्स के कर्मियों की आवाजाही में मदद करती रही है.
इन प्रतिबंधों में IRGC से जुड़ी एक ऐसी संस्था भी शामिल है, जिस पर अमेरिकी और इजराइली हार्डवेयर की लोकेशन के बारे में खुफिया जानकारी इकट्ठा करने और मौजूदा संघर्ष के दौरान ईरानी सेना को टारगेट तय करने में मदद करने का आरोप है.
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि जो लोग IRGC या महान एयर को कमर्शियल, लॉजिस्टिकल या फाइनेंशियल सपोर्ट देते हैं, वे एक आतंकवादी संगठन को बनाए रखने में मदद कर रहे हैं. उन्होंने तेहरान के खिलाफ आर्थिक दबाव धीरे-धीरे बढ़ाने का संकल्प लिया. अमेरिकी ट्रेजरी की वेबसाइट पर जारी एक आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, यह कदम बुधवार को आठ तेल टैंकरों और 10 कॉर्पोरेट संस्थाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद उठाया गया है.
ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) के एक आधिकारिक नोटिस में बताया गया कि बुधवार को जिन छह कमर्शियल कंपनियों को लिस्ट में शामिल किया गया, उनका हेडक्वार्टर चीन में था. ट्रेजरी ने यह भी बताया कि OFAC ने जनवरी से अब तक 100 से ज्यादा समुद्री जहाजों को लिस्ट में शामिल किया है.
ट्रेजरी की जानकारी से पता चलता है कि टारगेट की गई कई कंपनियां IRGC के चलाए जा रहे जबरन वसूली के एक ऐसे प्रोग्राम में शामिल थीं, जिसके तहत कमर्शियल जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के लिए अनिवार्य समुद्री बीमा खरीदना पड़ता था. ट्रेजरी ने इस सिस्टम को होर्मुज सेफ प्रोग्राम का नाम दिया है.
इसे ईरान के मुख्य बीमा रेगुलेटर ने शुरू किया था ताकि मुख्य रूप से खुद इस्लामिक रिपब्लिक की वजह से पैदा होने वाले जोखिमों (जैसे जहाजों पर हमले) को कवर किया जा सके, और इससे होने वाली कमाई का इस्तेमाल सरकार के कामकाज को फंड करने के लिए किया जा सके.