Namo Bharat RRTS Extension: राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्र जल्द ही दिल्ली-एनसीआर के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से सीधे जुड़ सकते हैं. केंद्र सरकार ने दिल्ली-सराय काले खां से गुरुग्राम और बावल तक प्रस्तावित नमो भारत (RRTS) कॉरिडोर को राजस्थान के बहरोड़ तक विस्तार देने की दिशा में कदम बढ़ाया है. इसके लिए केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय को मंजूरी का प्रस्ताव भेजा है.
क्या है नया प्रस्ताव?प्रस्ताव के मुताबिक, बावल से बहरोड़ तक करीब 36 किलोमीटर लंबा नया सेक्शन बनाया जाएगा. इसमें करीब 11 किलोमीटर ट्रैक हरियाणा और 25 किलोमीटर ट्रैक राजस्थान में होगा. इस नए हिस्से में 4 स्टेशन बनाए जाने की योजना है. कॉरिडोर तैयार होने के बाद बावल से बहरोड़ की यात्रा महज 24 मिनट में पूरी हो सकेगी. वहीं कार से जाने पर करीब 45 मिनट लगते हैं. इस विस्तार पर करीब 8,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.
उद्योगों को होगा सीधा फायदाकॉरिडोर के बहरोड़ तक पहुंचने से नीमराना, शाहजहांपुर, बहरोड़, भिवाड़ी, खुशखेड़ा और चौपानकी जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों को नई रफ्तार मिलेगी. इन क्षेत्रों में काम करने वाले हजारों इंजीनियर, कर्मचारी और अधिकारी दिल्ली, गुरुग्राम और आईजीआई एयरपोर्ट तक कम समय में पहुंच सकेंगे. इससे रोजाना आने-जाने वाले कर्मचारियों का यात्रा समय और परिवहन लागत दोनों कम होने की उम्मीद है.
ये होगा बड़ा फायदानीमराना का जापानी औद्योगिक क्षेत्र और आसपास के निवेश क्षेत्र हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जुड़ने के बाद विदेशी कंपनियों के अधिकारियों और निवेशकों के लिए आवागमन आसान हो जाएगा. इससे क्षेत्र में नए निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है.
मांग के बाद आगे बढ़ा प्रस्तावशुरुआती योजना में यह कॉरिडोर दिल्ली से नीमराना-बहरोड़ तक प्रस्तावित था, लेकिन बाद में इसे चरणबद्ध तरीके से बावल तक सीमित कर दिया गया था. इसके बाद राजस्थान के उद्योग संगठनों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और उद्यमियों ने इसे फिर से बहरोड़ तक बढ़ाने की मांग उठाई. अब उसी मांग पर आगे बढ़ते हुए विस्तार का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय के पास भेज दिया है.
दिल्ली-NCR से जुड़ेगा राजस्थानअगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो दिल्ली-एनसीआर और राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. इससे रोजगार, निवेश और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा भिवाड़ी, खुशखेड़ा और चौपानकी जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों को इससे बड़ा फायदा होगा और उन्हें सुविधाजनक परिवहन मिलेगा.
ये भी पढ़ें – ढह गई भिवंडी की ‘कोहिनूर’ इमारत…मलबे में दबकर 3 मजदूरों की मौत