Abhijit Dipke Health Update Typhoid Recovery: कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके की शनिवार (1 अगस्त) को एक बार फिर तबीयत बिगड़ गई. महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर स्थित उनके घर पर डॉक्टर ने उनकी जांच की और फिलहाल आराम करने की सलाह दी है. इससे पहले 25 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दीपके ने बताया था कि उन्हें टाइफाइड हुआ है और पिछले कुछ दिनों से उनका इलाज चल रहा है.
डॉक्टर विशाल लहाने के मुताबिक, अभिजीत दीपके का ब्लड प्रेशर थोड़ा कम था. उन्हें उल्टी और दस्त की शिकायत भी थी। इसके बाद उन्हें आईवी फ्लूइड दिया गया. फिलहाल उन्हें बुखार नहीं है. डॉक्टर के अनुसार, अगर उनकी सेहत में सुधार नहीं होता है तो ब्लड टेस्ट कराया जाएगा और रिपोर्ट के आधार पर आगे का इलाज तय किया जाएगा. ऐसे में सवाल उठता है कि टाइफाइड से ठीक होने के बाद भी कमजोरी या दूसरी परेशानियां क्यों बनी रह सकती हैं और इस बीमारी के बाद किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है?
टाइफाइड के बाद तुरंत सामान्य नहीं होता शरीर
kauveryhospital की रिपोर्ट के अनुसार, टाइफाइड एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है, जो साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया के कारण होता है. यह मुख्य रूप से दूषित पानी और भोजन के जरिए फैलता है. टाइफाइड होने पर तेज बुखार, उल्टी, दस्त, थकान, सिरदर्द, भूख कम लगना और शरीर में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं. एंटीबायोटिक दवाएं शुरू होने के कुछ दिनों बाद मरीज के लक्षणों में सुधार दिखाई दे सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि शरीर पूरी तरह ठीक हो गया है. बीमारी के दौरान शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है. यही वजह है कि बुखार उतरने के बाद भी कई लोगों को कमजोरी, थकान और पाचन से जुड़ी समस्याएं परेशान कर सकती हैं.

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टाइफाइड के बाद दोबारा लौट सकते हैं लक्षण
कुछ मरीजों में इलाज पूरा होने के बाद टाइफाइड के लक्षण दोबारा दिखाई दे सकते हैं. इसे रिलैप्स कहा जाता है. इलाज के बाद फिर से बुखार या पहले जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे सामान्य कमजोरी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है. डॉक्टर जरूरत के मुताबिक जांच कर सकते हैं और उसके आधार पर आगे का इलाज तय किया जाता है. खुद से दोबारा एंटीबायोटिक शुरू करना या पहले बची हुई दवा लेना सही नहीं है.

कमजोरी और थकान को न करें नजरअंदाज
टाइफाइड शरीर पर काफी असर डाल सकता है. बीमारी ठीक होने के बाद भी कुछ समय तक सामान्य काम करने पर जल्दी थकान महसूस हो सकती है. पहले की तरह तेजी से चलने या ज्यादा शारीरिक मेहनत करने में परेशानी हो सकती है. ऐसे में शरीर को पर्याप्त आराम देना जरूरी है। ठीक महसूस होते ही अचानक भारी एक्सरसाइज या बहुत ज्यादा शारीरिक मेहनत शुरू करने से बचें. अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों को धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर है। अगर कमजोरी बहुत ज्यादा है या लंबे समय तक बनी रहती है तो डॉक्टर की सलाह लें.
खाने में इन बातों का रखें ध्यान
टाइफाइड के दौरान और उसके बाद डाइजेशन सिस्टम संवेदनशील हो सकता है. इसलिए रिकवरी के दौरान हल्का और आसानी से पचने वाला खाना लेना बेहतर होता है. बहुत ज्यादा तला-भुना, मसालेदार और प्रोसेस्ड खाना खाने से बचना चाहिए. एक बार में बहुत ज्यादा खाने के बजाय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाना लिया जा सकता है. लंबे समय तक खाली पेट रहने से भी बचें. घर का ताजा बना खाना प्राथमिकता में रखें. बाहर का खाना खाना जरूरी हो तो ताजा तैयार और अच्छी तरह पका हुआ गर्म भोजन चुनें.
शरीर में पानी की कमी न होने दें
टाइफाइड में बुखार, उल्टी और दस्त के कारण शरीर में पानी की कमी होने का खतरा रहता है. रिकवरी के दौरान भी हाइड्रेशन पर ध्यान देना जरूरी है. पर्याप्त पानी और डॉक्टर की सलाह के मुताबिक दूसरे तरल पदार्थ लिए जा सकते हैं. अगर लगातार उल्टी या दस्त हो रहे हैं और मरीज पानी भी नहीं रख पा रहा है तो घर पर इंतजार करने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. गंभीर डिहाइड्रेशन में अस्पताल में आईवी फ्लूइड की जरूरत पड़ सकती है.
दवाओं का कोर्स बीच में न छोड़ें
टाइफाइड का इलाज डॉक्टर की सलाह के मुताबिक करना बेहद जरूरी है. लक्षण कम होने या बुखार उतरने के बाद अपनी मर्जी से एंटीबायोटिक बंद नहीं करनी चाहिए. डॉक्टर ने जितने दिनों के लिए दवा दी है, उसका कोर्स उसी तरह पूरा करना जरूरी है. रिकवरी के दौरान दोबारा बुखार, लगातार उल्टी-दस्त, बहुत ज्यादा कमजोरी, पेट में तेज दर्द या हालत बिगड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.