GPS: आज टेक्नोलॉजी इतनी एडवांस हो चुकी है कि लोग अब बिना किसी से पूछे ही किसी भी जगह पर पहुंच सकते हैं. दरअसल, जीपीएस ने लोगों को किसी भी जगह पर पहुंचना काफी आसान कर दिया है. लोग अब दूसरे देश में भी आसानी से अपनी लोकेश पर पहुंच जाते हैं. लेकिन क्या आपने सोचा है कि अगर जीपीएस बंद हो जाएगा तो क्या होगा. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अगर जीपीएस बंद हो जाएगा तो इसका असर पूरी दुनिया पर देखने को मिलेगा. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.
आपको बता दें कि अक्सर लोग GPS को केवल रास्ता बताने वाली टेक्नोलॉजी के रूप में ही देखते हैं लेकिन ऐसा नहीं है. ये इससे कहीं ज्यादा काम भी करने में सक्षम है. ये बिजली ग्रिड, मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट सर्विसेज, वित्तीय लेनदेन, इमरजेंसी सर्विसेज और परिवहन सिस्टम को भी सटीक समय और लोकेशन उपलब्ध कराता है.

अब ऐसे में अगर GPS लंबे समय तक बंद रहता है तो एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट, समुद्र में चलने वाले जहाज, रेलवे सिस्टम और कई डिजिटल सर्विसेज में भी बहुत दिक्कत आ सकती है. इससे बिजनेस, डिमांड सप्लाई और पब्लिक सर्विसेज पर भी प्रभावित हो सकती हैं.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी के इलेक्ट्रिकल और कंप्यूटर इंजीनियरिंग डिपॉर्टमेंट के प्रोफेसर जैक कासास के मुताबिक, GPS के बिना लोगों को एक दिन गुजारना भी काफी महंगा साबित हो सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ये सिस्टम बंद होता है तो अमेरिका को ही एक दिन में करीब 1 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है.
शुरुआत में लोगों को छोटी-छोटी परेशानियां होंगी. जैसे मोबाइल मैप सही रास्ता नहीं बताएगा, कैब ड्राइवर आपकी लोकेशन तक नहीं पहुंच पाएगा, डिलीवरी सर्विसेज पर भी असर देखने को मिलेगा और हाईवे पर सही एग्जिट ढूंढना भी लोगों के लिए मुश्किल हो जाएगा.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि GPS की कमियां कोई नई बात नहीं हैं. कई सालों से ये माना जाता रहा है कि युद्ध या आर्मी एक्शन के दौरान GPS सिग्नल को डिस्टर्ब किया जा सकता है. लेकिन अब ऐसी घटनाएं नॉर्मल परिस्थितियों में भी सामने आने लगी हैं.
टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल के साथ GPS पर निर्भरता भी काफी बढ़ी है. यही वजह है कि इसके सिग्नल में जामिंग (Jamming) या स्पूफिंग (Spoofing) जैसी एक्टिविटी भी पहले के मुकाबले ज्यादा चिंता का विषय बन गई हैं.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि GPS जामिंग में GPS सिग्नल को जानबूझकर डिस्टर्ब किया जाता है जिससे डिवाइस को सही सिग्नल नहीं मिल पाता है. वहीं GPS स्पूफिंग इससे भी ज्यादा खतरनाक टेक्नोलॉजी है. इसमें नकली GPS सिग्नल भेजकर किसी डिवाइस को गलत लोकेशन शेयर कर दी जाती है.
इसका मतलब ये है कि कोई विमान, जहाज या दूसरे वाहन ये समझ सकता है कि वह किसी दूसरी जगह मौजूद है जबकि उसकी असली स्थिति कुछ और होती है. ऐसी स्थिति दुर्घटनाओं और बड़े आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है.
एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर समुद्र में चल रहे जहाजों को गलत GPS सिग्नल मिलने लगें तो वे अपनी असली लोकेशन से भटक सकते हैं. इससे जहाजों के आपस में टकराने, गलत दिशा में पहुंचने या ज्यादा नीची जगहों में फंसने का खतरा बढ़ सकता है.

इसी तरह विमान में भी गलत लोकेशन की जानकारी सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है. ऐसे हालात यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं. इसके अलावा ये बिजनेस के लिहाज से भी एक बड़ी समस्या बन सकता है.
अब अगर इसके समाधान के बारे में बताएं तो एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब पूरी दुनिया को GPS के भरोसे रहने की जरूरत नहीं है बल्कि ऑप्शनल नेविगेशन सिस्टम तैयार करने की ओर काम करना चाहिए. आने वाले समय में ऐसी टेक्नोलॉजी आनी चाहिए जो GPS के साथ मिलकर काम करे और जरूरत पड़ने पर बैकअप के रूप में तुरंत एक्टिव हो सके.
नई सैटेलाइट टेक्नोलॉजी, एडवांस नेविगेशन सिस्टम और मल्टी-सोर्स पोजिशनिंग जैसे समाधान पर तेजी से काम किया जा रहा है. अगर भविष्य में GPS में कोई समस्या आती है तो यही बैकअप सिस्टम जरूरी सर्विसेज को बिना रुकावट जारी रखने में मदद कर सकते हैं.
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