गृह मंत्रालय की मीटिंग के बाद सोनम वांगचुक की चेतावनी- 'आंदोलन का रास्ता...'
आसिफ कुरैशी, एबीपी न्यूज़ September 10, 2026 08:42 PM

लद्दाख के भविष्य और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में कोई ठोस सहमति सामने नहीं आई. गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और लेह एपेक्स बॉडी (LAB) कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) की सब-कमेटी के बीच हुई बातचीत के बाद लद्दाख प्रतिनिधिमंडल ने निराशा जताई. प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि करीब 4 महीने बाद हुई बैठक में भी प्रस्तावित लोकतांत्रिक ढांचे को लेकर सरकार की ओर से कोई लिखित ड्राफ्ट नहीं दिया गया.

लद्दाख के एक्टिविस्ट और LAB से जुड़े सोनम वांगचुक के मुताबिक पिछली बैठक 22 मई को हुई थी. इस दौरान उम्मीद थी कि गृह मंत्रालय पहले हुई चर्चाओं के आधार पर लद्दाख के लिए प्रस्तावित राजनीतिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था का कोई ठोस मसौदा सामने रखेगा. हालांकि, उनके अनुसार ऐसा नहीं हुआ.

वांगचुक ने सवालों की सूची दी गई

वांगचुक ने कहा कि बैठक में उन्हें सवालों की एक सूची दी गई और बताया गया कि इन मुद्दों पर अगली बैठक में चर्चा होगी. उन्होंने दावा किया कि असेंबली, सीधे परिसीमन और चुनाव जैसे विषयों पर पहले भी चर्चा हो चुकी है और इस बैठक में इन मुद्दों पर कोई खास नई प्रगति नहीं हुई.

अक्टूबर में कारगिल में अगली बैठक का प्रस्ताव

बैठक के दौरान अगली बातचीत अक्टूबर के पहले सप्ताह में कारगिल में करने पर सहमति बनने की बात सामने आई है. प्रतिनिधिमंडल को उम्मीद है कि अगली बैठक में लद्दाख के लिए प्रस्तावित लोकतांत्रिक ढांचे पर ज्यादा स्पष्टता आएगी और सरकार ठोस प्रस्ताव के साथ आगे बढ़ेगी. वांगचुक ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल की मुख्य मांग लद्दाख में जल्द से जल्द लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई विधानसभा स्थापित करने की है. उनका कहना है कि इस प्रस्ताव को संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में रखा जाना चाहिए, ताकि आगे चुनाव कराने और लोकतांत्रिक संस्थाओं के गठन की प्रक्रिया शुरू हो सके.

पिछले साल की हिंसा में मारे गए और घायलों के मुआवजे पर भरोसा

वांगचुक ने बैठक में हुई एक सकारात्मक चर्चा का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक 24 सितंबर 2025 की घटनाओं में मारे गए और घायल हुए लोगों के लिए मुआवजा देने पर सरकार की ओर से सहमति जताई गई है. उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने कहा कि मुआवजे को मंजूरी मिल चुकी है और जल्द ही इसकी घोषणा की जाएगी. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है.

सभी मामलों को एक साथ वापस लेने की मांग

लद्दाख प्रतिनिधिमंडल ने आंदोलन से जुड़े लोगों पर दर्ज मामलों को चरणबद्ध तरीके से वापस लेने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया. वांगचुक के अनुसार उनकी मांग है कि सभी मामले एक साथ वापस लिए जाएं. उन्होंने कहा कि सरकार ने इस मांग पर विचार करने की बात कही है, लेकिन अभी यह नहीं कहा जा सकता कि इसे पूरी तरह स्वीकार कर लिया गया है.

बड़े फैसलों पर रोक की मांग

LAB और KDA ने यह भी मांग रखी कि जब तक लद्दाख में चुनी हुई लोकतांत्रिक संस्था नहीं बन जाती, तब तक क्षेत्र की स्थिति या स्वरूप को बदलने वाला कोई बड़ा फैसला न लिया जाए. प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि भूमि हस्तांतरण, प्रशासनिक ढांचे या क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर असर डालने वाले किसी भी बड़े और स्थायी फैसले को लोकतांत्रिक संस्था के गठन तक रोक दिया जाना चाहिए. वांगचुक के अनुसार यह मांग लिखित रूप में भी सरकार के सामने रखी गई है.

प्रशासन को चेतावनी, आंदोलन नहीं चाहते लेकिन विकल्प खुला

वांगचुक ने कहा कि गृह मंत्रालय ने इस तरह के कुछ फैसलों को अपने सीधे अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया. इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के मुख्य सचिव के सामने अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं. उन्होंने कहा कि अगर लद्दाख की चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया गया और क्षेत्र के स्वरूप को प्रभावित करने वाले बड़े फैसले लिए गए, तो आंदोलन का रास्ता अपनाने की स्थिति बन सकती है. हालांकि, उन्होंने साफ किया कि प्रतिनिधिमंडल फिलहाल ऐसी स्थिति नहीं चाहता और उम्मीद करता है कि बातचीत के जरिए समाधान निकलेगा.

एक साल में विधानसभा गठन का दावा

वांगचुक के मुताबिक अगर लोकतांत्रिक ढांचे से जुड़ा प्रस्ताव संसद के शीतकालीन सत्र में पेश होता है और उसके बाद चुनाव तथा जिला परिषदों समेत दूसरी लोकतांत्रिक संस्थाओं के गठन की प्रक्रिया शुरू होती है तो करीब एक साल के भीतर लद्दाख में चुनी हुई विधानसभा स्थापित की जा सकती है. उनका कहना है कि प्रतिनिधिमंडल की मांग स्पष्ट है कि लद्दाख को जल्द से जल्द ऐसी लोकतांत्रिक संस्था मिले, जो क्षेत्र से जुड़े अहम फैसलों में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित कर सके.

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