By Jitendra Jangid- दोस्तो फरवरी का महीने में मौसम में परिवर्तन होता हैं, सुबह और शाम को लोगो को ठंड महसूस होती हैं, वहीं दिन में आपको गर्मी का एहसास होगा। जिससे बीमारियां हमें अपनी गिरफ्त में ले लेती हैं, इसके अलावा इस महीनें में पुरानी बीमारियां भी लोगो को तकलीफ देना शुरु कर देती हैं, ऐसे मे फरवरी के आखिरी दिन दुर्लभ रोग दिवस मनाया जाता है। यह दिन दुर्लभ और पुरानी बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों के लिए बेहतर निदान, उपचार और देखभाल की आवश्यकता की एक महत्वपूर्ण याद दिलाता है। आइए जानते हैं इसके बारे में
दीर्घकालिक बीमारियाँ प्रबंधन करने के लिए सबसे कठिन स्थितियों में से एक हैं। ये बीमारियाँ आम तौर पर कम से कम एक साल तक चलती हैं और अक्सर बहुत लंबे समय तक चलती हैं, जिससे दैनिक जीवन पर गहरा असर पड़ता है। ऐसी दीर्घकालिक स्थितियों में ऑटोइम्यून रोग, मधुमेह, कैंसर, मिर्गी, हृदय रोग, एचआईवी/एड्स, हाइपोथायरायडिज्म और मल्टीपल स्केलेरोसिस आदि शामिल हो सकते हैं।
सबसे ज़्यादा जानलेवा बीमारियाँ
कुछ बीमारियाँ न केवल लंबे समय तक पीड़ा का कारण बनती हैं, बल्कि दुनिया भर में बड़ी संख्या में मौतों का कारण भी बनती हैं। इनमें इस्केमिक हृदय रोग, स्ट्रोक, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), निचले श्वसन संक्रमण, नवजात स्थितियाँ और श्वासनली, ब्रोन्कस और फेफड़ों को प्रभावित करने वाली बीमारियाँ शामिल हैं। इसके अलावा, अल्जाइमर रोग, अन्य मनोभ्रंश, दस्त संबंधी रोग, मधुमेह और गुर्दे की बीमारियाँ भी दुनिया भर में सबसे घातक बीमारियों में से हैं।
इन पुरानी और जानलेवा बीमारियों के प्रभाव को स्वीकार करके, हम बेहतर समझ को बढ़ावा दे सकते हैं और प्रभावित लोगों के लिए बेहतर चिकित्सा देखभाल और उपचार की दिशा में चल रहे प्रयासों को प्रोत्साहित कर सकते हैं।
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