आजकल, सामान्यतः एक बल्ब 2 से 3 साल तक ही चलता है, लेकिन अमेरिका के कैलिफोर्निया में स्थित एक बल्ब, जिसे 'सेंटेनियल लाइट' कहा जाता है, पिछले 123 वर्षों से जल रहा है। यह बल्ब लिवरमोर के फायर स्टेशन नंबर 6 में रखा गया है और इसे पहली बार 1901 में जलाया गया था।
इस बल्ब को शेल्बी इलेक्ट्रिक कंपनी द्वारा निर्मित किया गया था। यह एक हाथ से बनाया गया कार्बन-फिलामेंट बल्ब है, जो उस समय की तकनीक से तैयार किया गया था। इसकी प्रारंभिक पावर 60 वाट थी, लेकिन अब यह केवल 4 वाट की रोशनी देता है, जो हल्की नारंगी रंग में चमकता है।
इस बल्ब के लंबे समय तक जलने का राज इसके डिज़ाइन और उपयोग में छिपा है। इसका मोटा फिलामेंट और कम तापमान पर जलना इसे टिकाऊ बनाता है। इसे बहुत कम बार बंद किया गया, जिससे थर्मल शॉक का प्रभाव कम हुआ।
इस बल्ब को 1901 में लिवरमोर के एक व्यवसायी ने दान किया था। पहले यह एक दुकान में उपयोग हुआ, फिर 1903 में इसे फायर डिपार्टमेंट को सौंप दिया गया। 1976 में इसे फायर स्टेशन में स्थायी रूप से स्थापित किया गया। हालांकि, यह कभी-कभी बिजली कटने या रखरखाव के लिए बंद किया गया।
गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने इसे 'दुनिया का सबसे टिकाऊ लाइट बल्ब' के रूप में मान्यता दी है। यह अब तक 1 मिलियन घंटे से अधिक जल चुका है।
यह बल्ब अब भी फायर स्टेशन में जल रहा है और इसे 24/7 लाइव वेबकैम के माध्यम से देखा जा सकता है। इसे 'टिकाऊपन का प्रतीक' माना जाता है और लोग इसे देखने के लिए दूर-दूर से आते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि पुराने तकनीक से बने ये बल्ब आधुनिक बल्बों की तुलना में अधिक मजबूत थे।