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कुछ बैंकों में उतार-चढ़ाव के कारण बुधवार रात को यूपीआई नेटवर्क में दिक्कतें आईं। एनपीसीआई ने उनसे कांटेक्ट कर सिचुएशन को कंट्रोल करने की कोशिश की और पता चला कि यूपीआई सिस्टम कुछ हद तक स्थिर हो गया है।
पैसे ट्रांसफर में दिक्कत
एनपीसीआई द्वारा बनाया गया यूपीआई एक इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम है। डाउनडिटेक्टर के मुताबिक रात 8 बजे तक 449 शिकायतें दर्ज की गईं। करीब 53 फीसदी यूजर्स ने ऐप के जरिए पैसे ट्रांसफर करने में दिक्कतों की शिकायत की है।
यूपीआई डाउन होने से ग्राहक नाराज
ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और यूपीआई सिस्टम डाउन होने को लेकर एक यूजर ने पोस्ट किया, 'आजकल यूपीआई को क्या हो रहा है? यह लगभग हर दिन फेल हो रहा है। इसी रफ्तार से तो एक दिन मुझे होटल में बर्तन धोने पड़ेंगे। सरकार को यूपीआई को सुचारू रूप से चलाने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए।'
सर्विस डाउन होने की शिकायतों का पहाड़!
डाउनडिटेक्टर की रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार को शाम 5 बजे से 8 बजे के बीच सबसे ज्यादा दिक्कतें आईं। सैकड़ों यूजर्स को डिजिटल पेमेंट में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, 54 प्रतिशत उपयोगकर्ताओं को फंड ट्रांसफर करने में समस्या का सामना करना पड़ा, और 43 प्रतिशत पैसे नहीं भेज पाए। 450 से अधिक उपयोगकर्ताओं ने इस समस्या के बारे में शिकायत की है।
एसबीआई की ऑनलाइन सेवा बाधित
भारतीय स्टेट बैंक को 1 अप्रैल, 2025 को UPI में बड़ी समस्या का सामना करना पड़ा। विभिन्न उपयोगकर्ताओं को फंड ट्रांसफर, मोबाइल बैंकिंग और एटीएम सेवाओं में समस्याओं का सामना करना पड़ा।
बार-बार UPI सेवा बंद होना
26 मार्च को UPI में बड़े पैमाने पर व्यवधान के कारण पूरे देश में डिजिटल लेनदेन बाधित हो गया। बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं ने तत्काल भुगतान इंटरफ़ेस के साथ समस्याओं की सूचना दी।
तकनीकी त्रुटि
NPCI को कभी-कभी तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा, जिसके कारण UPI सेवा आंशिक रूप से विफल हो गई। यह समस्या अब हल हो गई है और सिस्टम स्थिर हो गया है।
जानें UPI सिस्टम को कहां से नियंत्रित किया जाता है
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) एक त्वरित भुगतान प्रणाली है जिसे RBI द्वारा विनियमित इकाई NPCI द्वारा विकसित और संचालित किया जाता है।
देशभर में यूपीआई ट्रांजैक्शन की मांग बढ़ रही है
वर्ल्डलाइन की 'इंडिया डिजिटल पेमेंट्स रिपोर्ट फॉर 2एच 2024' के अनुसार, 2024 की दूसरी छमाही में यूपीआई ट्रांजैक्शन की मात्रा साल-दर-साल 42 प्रतिशत बढ़कर 93.23 बिलियन हो गई।
डिजिटल ट्रांजैक्शन में अविश्वास!
कई लोगों ने यूपीआई की विश्वसनीयता को लेकर चिंता जताई है। यह भी दावा किया गया है कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ये व्यवधान उपयोगकर्ताओं के लिए एक चुनौती बन गए हैं।