Ramayan And Mahabharat Eras Temples: ये हैं भारत के वो 5 मंदिर, जिनका रामायण और महाभारत काल से है अस्तित्व
TV9 Bharatvarsh January 05, 2026 10:43 PM

Ramayan And Mahabharat Eras Temples: भारत मंदिरों का देश कहा जाता है. यहां कई प्राचीन और रहस्यमयी मंदिर हैं. इन मंदिरों में बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए आते हैं. आज हम आपको भारत के उन पांच प्राचीन मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका संबंध त्रेता और द्वापर युग मतलब रामायण और महाभारत दोनों काल से है. इन मंदिरों में एक समय पर भगवान राम और पांडवों ने पूजा की थी. ये आज भी अस्तित्व में हैं. आइए इनके बारे में जानते हैं.

रामेश्वरम मंदिर

रामेश्वरम मंदिर तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में है. ये चार धामों और 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. ये मंदिर शिव जी को समर्पित है. इसे भारत के अत्यंत पावन मंदिरों में से एक माना जाता है. रामायण के अनुसार, भगवान राम ने लंका जाने से पहले यहां पर महादेव का पूजन किया था और विजय का आशीर्वाद लिया था. फिर द्वापर युग में महाभारत के युद्ध के बाद पांडव यहां आए थे और शुद्धि प्राप्त की थी.

द्वारकाधीश मंदिर

द्वारकाधीश मंदिर गुजरात के द्वारका में गोमती नदी के तट पर स्थित है. ये मंदिर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है. भगवान श्रीकृष्ण ने ही द्वारका नगरी बसाई थी. इसलिए ये श्रीकृष्ण की नगरी के रूप में प्रसिद्ध है. मान्यताओं के अनुसार, द्वारका में भगवान राम के दिव्य मार्ग के भी अंश देखने को मिलते हैं. द्वारका को बेहद पवित्र स्थान माना जाता है.

बद्रीनाथ मंदिर

बद्रीनाथ मंदिर उत्तराखंड के चमोली जिले में हिमालय की गोद में स्थित है. बद्रीनाथ चार धाम तीर्थ स्थलों में से एक बताया जाता है. मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम यहां आए थे और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त किया था, जबकि पांडवों ने इसी जगह से अपनी स्वर्ग की यात्रा की थी.

त्र्यंबकेश्वर मंदिर

त्र्यंबकेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और उनके 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. ये मंदिर महाराष्ट्र के नासिक जिले में, ब्रह्मगिरी पर्वत की तलहटी में गोदावरी नदी के उद्गम स्थल के पास स्थित है. शास्त्रों में बताया गया है कि भगवान राम और पांडव इस पवित्र स्थान पर आए थे.

सोमनाथ मंदिर

सोमनाथ मंदिर भारत के गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में वेरावल के पास प्रभास पाटन में समुद्र तट पर स्थित है. ये भी भगवान शिव को समर्पित मंदिर है और 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है. बताया जाता है कि भगवान राम और पांडवों ने शांति और आशीर्वाद पाने के लिए यहां पूजा की थी. भगवान शिव को समर्पित ये मंदिर कई आक्रमणों और पुनर्निर्माणों का साक्षी भी है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी मान्यताओं और महाभारत कथा की जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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