26 January Desh Bhakti Kavita: गणतंत्र दिवस केवल एक तारीख नहीं, बल्कि उन लाखों शहीदों के सपनों का सच है जिन्होंने एक स्वतंत्र और संवैधानिक भारत की कल्पना की थी। यह कविता भारत की शक्ति, उसकी विविधता और उसके गौरवशाली इतिहास का बखान करती है। इसे आप स्कूल, कॉलेज या किसी भी सार्वजनिक मंच पर सुनाकर श्रोताओं का दिल जीत सकते हैं।
लहराता है नीला अंबर, मिट्टी में महक पुरानी है,
गूंज रही है दिशा-दिशा में, वीरों की कुर्बानी है।
हिमालय जिसका मुकुट बना है, सागर चरण पखारता,
ऐसा पावन देश हमारा, जग में सबसे प्यारा था।
कभी झुके न मान हमारा, ऐसी इसकी शान है, शान से हम ये कहते हैं, भारत देश महान है!
अशोक चक्र की चौबीस तीलियां, हर पल आगे बढ़ना सिखातीं,
केसरिया की शक्ति हमें, वीरों की गाथा बतलाती।
सफेद रंग में शांति बसी है, हरा भरा खलिहान है,
सब धर्मों को गले लगाता, ये मेरा हिंदुस्तान है।
गूंज रहा है कोना-कोना, जन-गण-मन के गान से, आज गणतंत्र हमारा चमके, अंबर में अभिमान से! संविधान की ताकत अपनी, न्याय की राह दिखाता है,
लोकतंत्र का दीपक यहां, हर घर को महकाता है।
आओ मिलकर शपथ ये ले लें, देश न झुकने देंगे हम,
भारत मां की रक्षा में, हरगिज़ पीछे न हटेंगे हम।
नमन है उन सपूतों को, जो सीमा पर कुर्बान हैं, मेरा भारत, मेरा गौरव, मेरी ऊंची उड़ान है!
प्रश्न 1. इस कविता का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: यह कविता भारत की एकता, विविधता, संविधान के महत्व और हमारे वीर सैनिकों के बलिदान के प्रति सम्मान व्यक्त करती है।
प्रश्न 2. गणतंत्र दिवस पर कविता सुनाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?
उत्तर: कविता सुनाते समय आवाज में उतार-चढ़ाव और आंखों में आत्मविश्वास होना चाहिए। अंत में 'जय हिन्द' के नारे के साथ समापन करना सबसे प्रभावशाली रहता है।
प्रश्न 3. क्या यह कविता स्कूली बच्चों के लिए उपयुक्त है?
उत्तर: जी हां, इस कविता की भाषा सरल और प्रभावशाली है, जिसे कक्षा 5 से लेकर कॉलेज स्तर तक के छात्र आसानी से याद कर सुना सकते हैं।
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