1950 में पहली परेड राजपथ पर नहीं, एक स्टेडियम में हुई थी—जानिए क्यों ?
एबीपी लाइव January 26, 2026 11:12 AM

भारत में हर वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पूरे देश में सम्मान, गर्व और राष्ट्रीय भावना के साथ मनाया जाता है. वर्ष 2026 में भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. यह दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ का प्रतीक है, जब 26 जनवरी 1950 को देश का संविधान लागू हुआ और भारत एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बना.

भारत को 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता तो मिल गई थी, लेकिन उस समय देश के पास अपना संविधान नहीं था. आज़ादी के बाद भी भारत सरकार अधिनियम 1935 के तहत देश का शासन चलाया जा रहा था. संविधान सभा ने कड़ी मेहनत के बाद 26 नवंबर 1949 को संविधान को अंगीकार किया, लेकिन इसे लागू करने के लिए 26 जनवरी 1950 की तारीख चुनी गई.

पहली गणतंत्र दिवस परेड कहां हुई थी

बहुत कम लोगों को यह जानकारी है कि पहली गणतंत्र दिवस परेड राजपथ पर नहीं हुई थी. BBC के मुताबिक वर्ष 1950 से 1954 के बीच परेड अलग-अलग स्थानों पर आयोजित की गई. शुरुआती वर्षों में परेड इरविन स्टेडियम, जिसे अब नेशनल स्टेडियम कहा जाता है, किंग्सवे कैंप और लाल किला मैदान में आयोजित हुई. वर्ष 1955 में पहली बार राजपथ, जिसे अब कर्तव्य पथ कहा जाता है को गणतंत्र दिवस परेड का स्थायी स्थल बनाया गया.

गणतंत्र दिवस का ऐतिहासिक और संवैधानिक महत्व

26 जनवरी 1950 को भारत में संविधान लागू होने के साथ ही भारत सरकार अधिनियम 1935 को समाप्त कर दिया गया. इस दिन से देश में जनता द्वारा चुनी गई सरकार की व्यवस्था पूरी तरह लागू हुई. गणतंत्र दिवस यह दर्शाता है कि भारत में सर्वोच्च शक्ति संविधान के पास है और सभी नागरिक कानून के समक्ष समान हैं. यह दिन भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और नागरिक अधिकारों की नींव को दर्शाता है.

गणतंत्र दिवस से जुड़े रोचक तथ्य

भारत का संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान माना जाता है. पहली गणतंत्र दिवस परेड इरविन स्टेडियम में आयोजित की गई थी. हर वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह में एक विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाता है. 21 तोपों की सलामी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च सैन्य सम्मान का प्रतीक मानी जाती है. गणतंत्र दिवस न केवल भारत के संवैधानिक इतिहास को दर्शाता है, बल्कि यह देश की एकता, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की मजबूती का भी प्रतीक है.

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