News India Live, Digital Desk: भारत सरकार अब डिजिटल सुरक्षा और नागरिकों के डेटा की प्राइवेसी को लेकर किसी भी तरह की देरी के मूड में नहीं है। डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) कानून को पूरी तरह प्रभावी बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने कंपनियों को नियमों के पालन के लिए दी जाने वाली 18 महीने की मोहलत को घटाकर 12 महीने करने का प्रस्ताव दिया है।सरकार के इस कड़े रुख ने गूगल, मेटा और अमेजॉन जैसे टेक दिग्गजों के बीच हलचल पैदा कर दी है।MeitY के नए प्रस्ताव: क्या बदलेगा?22 जनवरी को हुई एक हाई-लेवल मीटिंग के बाद मंत्रालय ने डिजिटल कंपनियों को ईमेल भेजकर 4 फरवरी तक फीडबैक मांगा है। सरकार के मुख्य प्रस्ताव निम्नलिखित हैं:समय सीमा में कटौती: कानून के पूर्ण पालन के लिए कंपनियों को अब 18 की जगह केवल 12 महीने का समय मिलेगा।तत्काल प्रभाव से लागू नियम: नियम 15 (डेटा रिसर्च और आर्काइविंग) और नियम 23 जैसे कुछ महत्वपूर्ण प्रावधानों को तुरंत लागू करने का प्रस्ताव है।कानूनी जांच के लिए डेटा: नियम 8(3), जो कानूनी जांच के उद्देश्य से डेटा रखने की अनुमति देता है, उसे 3 महीने के भीतर लागू किया जा सकता है।कंपनियों पर क्या होगा असर?सरकार के इस कदम के बाद बड़ी टेक कंपनियों को Significant Data Fiduciaries (महत्वपूर्ण डेटा ट्रस्टी) के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। इसका मतलब है कि उन्हें:नियमित डेटा ऑडिट करना होगा।डेटा प्रोसेसिंग के रिस्क असेसमेंट की रिपोर्ट देनी होगी।अपने एल्गोरिदम की जांच करानी होगी।यूजर कंसेंट (सहमति) मैकेनिज्म को और अधिक पारदर्शी बनाना होगा।समय सीमा घटाने के पीछे की वजहसरकार का मानना है कि यदि डेडलाइन 18 महीने रही, तो कंपनियां अंतिम समय तक काम को टालती रहेंगी। 12 महीने की डेडलाइन कंपनियों को अभी से अपना सिस्टम सुधारने और तकनीकी बदलाव करने पर मजबूर कर देगी। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि डेटा प्राइवेसी अब एक विकल्प (Optional) नहीं, बल्कि अनिवार्यता है।इंडस्ट्री की प्रतिक्रियाटेक कंपनियों का तर्क है कि इतने बड़े स्तर पर डेटा सिस्टम, यूजर कंसेंट मैकेनिज्म और शिकायत निवारण सिस्टम (Grievance Redressal) को बदलने के लिए काफी समय और संसाधनों की जरूरत होती है। हालांकि, मंत्रालय सभी पक्षों से फीडबैक लेने के बाद ही अंतिम फैसला लेगा।