भारत बनेगा 'सुपरपावर', यूरोप में मचेगी मेड इन इंडिया की धूम! मोदी सरकार ने तैयार किया ये मेगा प्लान
TV9 Bharatvarsh January 29, 2026 01:44 PM

India EU FTA: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) केवल दो पक्षों के बीच कागज पर किए गए हस्ताक्षर भर नहीं है, बल्कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था और खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित होने जा रहा है. भारत अब यूरोप के बाजारों में अपनी धाक जमाने के लिए पूरी तरह तैयार है. इंडिया सेलुलर एंड इलेक्ट्रानिक्स एसोसिएशन (ICEA) के चेयरमैन पंकज मोहिंद्रू ने जो खाका खींचा है, वह बताता है कि आने वाला दशक भारतीय मैन्युफैक्चरिंग के सुनहरे भविष्य की कहानी लिखने वाला है.

यूरोपियन मार्केट पर होगी भारत की पकड़

इस समझौते की सबसे बड़ी खबर यह है कि यूरोप भेजे जाने वाले ज्यादातर भारतीय उत्पादों पर इंपोर्ट ड्यूटी यानी सीमा शुल्क जीरो होने की उम्मीद है. यानी अब भारतीय सामान यूरोप के बाजारों में और भी प्रतिस्पर्धी दामों पर बिक सकेगा. पंकज मोहिंद्रू का कहना है कि अभी यूरोप को हमारा इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात करीब 12 अरब डॉलर का है, लेकिन इस डील के बाद हम लंबी छलांग लगाने वाले हैं. लक्ष्य है, साल 2031 तक इसे 50 अरब डॉलर और 2035 तक 100 अरब डॉलर के पार ले जाना.

टैक्स की जंग में भारत को मिला ‘सुरक्षा कवच’

आज की दुनिया में जब कई देश एक-दूसरे पर कड़े टैक्स और प्रतिबंध लगा रहे हैं, ऐसे में भारत ने इस समझौते के जरिए खुद को एक सुरक्षित घेरे में ले लिया है. इसे आप भारतीय उद्योगों के लिए एक ‘रणनीतिक कवच’ मान सकते हैं. मोहिंद्रू ने इस बात पर जोर दिया कि भू-राजनीतिक तनावों के बीच, जब दुनिया की अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल मची है, भारत ने अपनी जगह सुरक्षित कर ली है. इसका मतलब यह है कि कल को अगर दुनिया में व्यापारिक नियम सख्त भी होते हैं, तो भी भारत और यूरोप का व्यापार बिना किसी रुकावट के चलता रहेगा.

युवाओं के लिए खुलेंगे तरक्की के दरवाजे

इस समझौते का असर सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा फायदा आपके और हमारे जैसे आम लोगों तक भी पहुंचेगा. पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) के रणजीत मेहता का मानना है कि यह समझौता भारत के माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. भारतीय छोटे उद्योगों को अब 23 ट्रिलियन डॉलर वाली विशाल यूरोपियन अर्थव्यवस्था से जुड़ने का सीधा मौका मिलेगा.

जब टेक्सटाइल, अपैरल, जेम्स और ज्वेलरी जैसे सेक्टरों को यूरोप का इतना बड़ा बाजार मिलेगा, तो देश में रोजगार के कितने नए अवसर पैदा होंगे. भारत और यूरोप की कुल आबादी दो अरब से ज्यादा है, जो मिलकर दुनिया की अर्थव्यवस्था का 25 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं. जैसे-जैसे बाजार बढ़ेगा, भारतीय सामान और सेवाओं की मांग में जबरदस्त उछाल आना तय है.

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