मृतक के स्पर्म से प्रजनन की अनुमति, केंद्र ने फैसले के खिलाफ की अपील
TV9 Bharatvarsh February 01, 2026 06:43 PM

केंद्र सरकार की तरफ से दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है. इस याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को ही चुनौती दी गई है, जिसमें एक प्राइवेट अस्पताल को आदेश दिया गया था कि एक बिना शादी वाले मृत युवक के फ्रोजन स्पर्म उसके माता पिता को सौंप दिए जाएं. केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट में कहा गया कि यह फैसला मौजूदा असिस्टेड रिप्रोडक्शन और सरोगेसी कानूनों के खिलाफ है.

हाई कोर्ट युवक के माता-पिता को नोटिस जारी कर अपील पर जवाब मांगा है, जो मरणोपरांत प्रजनन से जुड़े कानूनी मुद्दों को उजागर करता है. इस मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को की जाएगी.

साल 2024 में दिया गया था फैलसा

दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस DK उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने केंद्र सरकार की अपील पर युवक के माता-पिता को नोटिस जारी किया है. अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को तय की है. यह अपील उस फैसले के खिलाफ है जो साल 2024 में हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश ने दिया था.

किस आधार पर दिया था कोर्ट ने फैसला?

उस समय कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अगर यह साबित हो जाए कि स्पर्म या अंडाणु (एग) के मालिक की सहमति थी, तो मृत्यु के बाद भी संतान उत्पत्ति पर कोई रोक नहीं है. इसी आधार पर उन्होंने अस्पताल को आदेश दिया था कि वह मृत युवक का फ्रोजन स्पर्म उसके माता-पिता को सौंप दे.

सरकार ने क्या जताई आपत्ति?

केंद्र सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि यह फैसला मौजूदा असिस्टेड रिप्रोडक्शन और सरोगेसी कानूनों के खिलाफ है. सरकार का तर्क है कि कानून में कहीं भी यह अनुमति नहीं है कि दादा-दादी इंटेंडिंग कपल बनकर IVF या सरोगेसी के जरिए बच्चे को जन्म दिलवाएं.

अदालत के सवाल पर सरकार ने यह भी बताया कि न्यायाधीश के आदेश के बावजूद अभी तक युवक का स्पर्म उसके माता-पिता को नहीं सौंपा गया है. इस वजह से माता-पिता ने अवमानना (कंटेम्प्ट) याचिका भी दायर की हुई है, जो अभी लंबित है. हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी पूछा कि उसने अपील दायर करने में एक साल से ज्यादा की देरी क्यों की.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, इस मामले की शुरुआत तब हुई जब युवक के माता-पिता ने याचिका दायर की थी. उनका बेटा कैंसर से पीड़ित था और 2020 में कीमोथेरेपी शुरू होने से पहले डॉक्टरों ने उसे बताया था कि इलाज के दौरान ऐसा भी हो सकता है कि वह आगे बच्चा पैदा न कर पाए. इसलिए उसने जून 2020 में अस्पताल की IVF लैब में अपना स्पर्म सुरक्षित रखवा लिया था. अदालत ने माना कि युवक ने खुद स्पर्म सुरक्षित रखने की सहमति दी थी. इसलिए उसके माता-पिता उस स्पर्म के जरिए सरोगेसी या IVF से बच्चा पैदा करवा सकते हैं.

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