राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर इस किताब के प्रकाशन को रोक रही है क्योंकि इसमें चीन के साथ सीमा विवाद और अग्निपथ योजना को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हैं। वहीं, सरकार की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने कड़ी आपत्ति जताते हुए पूछा कि जो किताब प्रकाशित ही नहीं हुई, उसके तथ्यों को सदन में कैसे रखा जा सकता है? ALSO READ: नरवणे की वो डायरी... संसद में राहुल गांधी ने डोकलाम पर ऐसा क्या कहा कि भड़क गए राजनाथ?
क्या है पूरा विवाद?जनरल नरवणे की आत्मकथा, जिसका शीर्षक 'Four Stars of Destiny' है, जनवरी 2024 में रिलीज होनी थी। इसके कुछ अंश (Excerpts) 2023 के अंत में मीडिया में लीक हो गए थे, जिसके बाद से ही यह किताब विवादों के घेरे में आ गई।
मुख्य बिंदु : अगस्त 2024 में एक इंटरव्यू के दौरान जनरल नरवणे ने खुद स्वीकार किया था कि किताब का मसौदा (Manuscript) रक्षा मंत्रालय (MoD) के पास रिव्यू के लिए है। 2026 की शुरुआत तक भी यह रिव्यू पूरा नहीं हो पाया है।
किताब में ऐसा क्या है, जिससे सरकार असहज है?सूत्रों और लीक हुए अंशों के मुताबिक, जनरल नरवणे ने अपनी इस किताब में दो बड़े मुद्दों पर बात की है। किताब में कथित तौर पर कहा गया है कि 'टूर ऑफ ड्यूटी' का शुरुआती प्रस्ताव केवल थल सेना के लिए था, लेकिन बाद में पीएमओ (PMO) ने इसे तीनों सेनाओं के लिए लागू कर दिया। नरवणे ने इसे नौसेना और वायुसेना के लिए 'आसमान से बिजली गिरने' (Bolt from the blue) जैसा बताया था।
गलवान और डोकलाम विवाद : राहुल गांधी ने सदन में दावा किया कि किताब के मुताबिक डोकलाम में चीनी टैंक भारतीय सीमा के बेहद करीब आ गए थे और सेना को स्पष्ट आदेशों का इंतजार करना पड़ा था।
सरकार ने क्यों लगाई है रोक?आधिकारिक तौर पर सरकार का कहना है कि पूर्व सैन्य अधिकारियों द्वारा लिखी गई किताबों का 'सिक्योरिटी क्लियरेंस' (Security Clearance) एक मानक प्रक्रिया है। इस मामले में रक्षा मंत्रालय का तर्क है कि किताब में ऑपरेशनल विवरण और रणनीतिक बातचीत शामिल हो सकती है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) के लिए संवेदनशील हो सकती है।
नियमों का हवाला : सर्विस रूल्स के मुताबिक, उच्च पदों पर रहे अधिकारी रिटायरमेंट के बाद ऐसी जानकारी सार्वजनिक नहीं कर सकते जो गुप्त (Secret) श्रेणी में आती हो।
संसद में क्या हुआ?आज लोकसभा में राहुल गांधी ने एक मैगजीन की रिपोर्ट दिखाते हुए इन अंशों को पढ़ना शुरू किया। स्पीकर ओम बिरला ने उन्हें टोकते हुए कहा कि बिना 'ऑथेंटिक' प्रमाण या प्रकाशित प्रति के किसी सामग्री का हवाला देना नियमों के विरुद्ध है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार अपनी 'विफलताओं' को छिपाने के लिए एक पूर्व सेना प्रमुख की आवाज दबा रही है, जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि राहुल गांधी अधूरी और अप्रमाणित बातों से सेना का राजनीतिकरण कर रहे हैं।