हर बार वही मसाले—काली इलायची, जायफल, दालचीनी—लेकिन जब इन्हें हाथों से इस्तेमाल किया जाता है, तो उनका स्वाद अलग सा लगता है। खूनी एक्शन, शानदार गाने और प्रेम कहानियाँ आजकल बॉलीवुड में सबसे अधिक पसंद किए जाने वाले तत्व हैं। लेकिन जब विशाल भारद्वाज जैसे माहिर फिल्मकार इन मसालों का उपयोग करते हैं, तो हमने 'ओ रोमियो' देखने का निर्णय लिया। नतीजा यह निकला कि विशाल की फिल्म ने हमें काफी प्रभावित किया।
'ओ रोमियो' की शुरुआत शाहिद कपूर के करियर के बेहतरीन इंट्रोडक्शन से होती है। शाहिद उस्त्रा नामक एक खतरनाक गैंगस्टर का किरदार निभा रहे हैं, जो रेज़र से हत्या करता है। उनका रेज़र इतना तेज है कि वह शरीर से आत्मा को काट सकता है। केवल एक मास्टर, खान साहब (नाना पाटेकर), ही इस गैंगस्टर को अपनी धुन पर नचा सकता है। खान साहब एक IB अधिकारी हैं जो उस्त्रा की तेज धार का उपयोग अपराधों को सुलझाने के लिए करते हैं। उस्त्रा की जिंदगी में तब से अनसुने गाने गूंजने लगते हैं, जब अफ़शां (तृप्ति डिमरी) की एंट्री होती है। अफ़शां, जो उस्त्रा की साथी है, खतरनाक गैंगस्टर जलाल (अविनाश तिवारी) के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट लाने आई है। इस कॉन्ट्रैक्ट के पीछे उसका मकसद बदला है।
'ओ रोमियो' का दूसरा हाफ एक जोरदार ट्विस्ट के साथ शुरू होता है। पहले हाफ में कहानी का खाका तैयार हो चुका था: अफशां के बदले की कहानी। लेकिन दूसरे हाफ में शाहिद की अदाकारी ने सबका ध्यान खींचा है।
अगर पहले हाफ को कहानी का दिल माना जाए, तो दूसरा हाफ इसकी ताकत है। इस बिंदु तक, कहानी पूरी हो चुकी है, और अब सब कुछ एक्शन पर केंद्रित है। हालांकि, इस हिस्से में दमदार कैरेक्टर इंटरेक्शन और कुछ अप्रत्याशित मोड़ हैं। तृप्ति डिमरी की परफॉर्मेंस यह साबित करती है कि विशाल जैसे निर्देशक ने उन पर भरोसा क्यों किया।
नाना पाटेकर की स्क्रीन पर उपस्थिति दर्शकों को बांधे रखती है। सिंगर-एक्टर राहुल देशपांडे, जो नकारात्मक भूमिका में हैं, अपनी अदाकारी के लिए याद किए जाएंगे। हालांकि, दूसरे हाफ में एक्शन का बोलबाला है, इसलिए कुछ दर्शकों का ध्यान भटक सकता है। विशाल ने अपने फिल्मों में एक्शन का जिस खूबसूरती से उपयोग किया है, वह चर्चा का विषय है।
क्लाइमेक्स के लिए स्पेन का चुनाव थोड़ा अजीब लगा, क्योंकि कहानी पहले मुंबई में सेट थी। शायद विशाल ने इसे स्केल के लिए चुना। कुल मिलाकर, विशाल भारद्वाज की 'ओ रोमियो' एक हिंसक प्रेम कहानी है जिसमें गहरे भावनात्मक तत्व हैं। शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी समेत पूरी कास्ट की अदाकारी फिल्म की ताकत है, और संगीत इसका मुख्य आकर्षण है।