नए विधेयक में 'बहुविवाह' (एक से अधिक पत्नी या पति रखना) की प्रथा पर कड़ी रोक लगाई गई है। यदि कोई व्यक्ति एक जीवनसाथी के जीवित रहते हुए दूसरा विवाह करता है, तो उसे सात साल की जेल की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, खून के रिश्तों (Blood Relations) के बीच विवाह पर भी कानूनी रूप से पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। सरकार का मानना है कि इस सख्त प्रावधान से महिलाओं के अधिकारों की रक्षा होगी और सामाजिक समानता आएगी।
लिव-इन रिलेशनशिप पर सरकारी शिकंजागुजरात UCC बिल में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर बहुत कड़े नियम बनाए गए हैं। अब कपल्स को साथ रहना शुरू करने के एक महीने के भीतर उसका आधिकारिक पंजीकरण (Registration) कराना अनिवार्य होगा। यदि कोई जोड़ा बिना रजिस्ट्रेशन के एक महीने से ज्यादा समय तक साथ रहता है, तो उन्हें 3 महीने की जेल या 10 हजार रुपए का जुर्माना हो सकता है। साथ ही, यदि पार्टनर की उम्र 21 वर्ष से कम है, तो रजिस्ट्रार द्वारा उनके माता-पिता को इस बारे में सूचित किया जाएगा।
शादी का रजिस्ट्रेशन अब अनिवार्यइस कानून के तहत शादी होने के 60 दिनों के भीतर उसका रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि तय समय में पंजीकरण नहीं कराया जाता है, तो 10 से 25 हजार रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। तलाक के मामले में अब कोई भी व्यक्तिगत कानून या सामाजिक परंपरा मान्य नहीं होगी। तलाक केवल शादी के कम से कम एक साल बाद ही लिया जा सकेगा और इसे कोर्ट के माध्यम से ही कानूनी मान्यता मिलेगी।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala