सागर सरहदी: भारतीय सिनेमा के संवेदनशील रचनाकार की अनकही कहानियाँ
Stressbuster Hindi March 22, 2026 04:43 AM
सागर सरहदी का योगदान

मुंबई, 21 मार्च। सागर सरहदी, भारतीय सिनेमा और उर्दू साहित्य के एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर, ने अपनी लेखनी के माध्यम से रिश्तों की गहराई को बखूबी व्यक्त किया। एक छोटे से गांव से निकलकर, उन्होंने देश के विभाजन, मां के बिछड़ने और जड़ों से कटने के दर्द को अपनी रचनाओं में जीवंत किया।


उन्होंने अपने करियर की शुरुआत उर्दू लघुकथाओं से की, फिर नाटकों की ओर बढ़े और अंततः फिल्मों के लिए पटकथा, संवाद और निर्देशन में हाथ आजमाया। 2019 में, उन्हें आईसीए—अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक कलाकृति फिल्म महोत्सव में लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से नवाजा गया। सागर सरहदी का नाम यश चोपड़ा के साथ विशेष रूप से जुड़ा हुआ है। उनकी पहली बड़ी सफलता 1976 में आई फिल्म 'कभी कभी' थी, जिसमें अमिताभ बच्चन और राखी की जोड़ी ने दर्शकों का दिल जीत लिया। इसके बाद उन्होंने 'नूरी', 'सिलसिला', 'चांदनी', 'फासले', 'रंग', 'अनुभव', और 'जिंदगी' जैसी कई चर्चित फिल्मों के लिए लेखन किया।


'सिलसिला' को एक विशेष फिल्म माना जाता है, जो रिश्तों की जटिलताओं, प्रेम, धोखा और सामाजिक दबाव की कहानी को बयां करती है। इसे आज भी एक कल्ट क्लासिक के रूप में देखा जाता है। इस फिल्म के निर्माण में सागर सरहदी की मेहनत और लगन की कई दिलचस्प कहानियाँ हैं।


एक साक्षात्कार में, उन्होंने बताया कि फिल्म को परफेक्ट बनाने में काफी समय लगा। यश चोपड़ा बार-बार सुझाव देते थे और सागर उन्हें फिर से लिखकर दिखाते थे। कई बार सीन में बदलाव होते रहे। सागर को लगता था कि इतनी मेहनत और समय एक फिल्म के लिए उचित नहीं है, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। फिल्म की शूटिंग के दौरान एक खास घटना भी हुई। दिल्ली में 'सिलसिला' की शूटिंग चल रही थी, जिसमें एक महत्वपूर्ण सीन था, जिसमें जया बच्चन को पता चलता है कि उनके पति (अमिताभ बच्चन) संजीव कुमार की पत्नी से प्रेम करते हैं। यह बात बहुत सूक्ष्मता से कहनी थी, ताकि स्क्रीन पर अच्छा लगे।


सागर ने पहले ही सीन लिख दिया था, लेकिन यश चोपड़ा के असिस्टेंट्स और यूनिट के कई सदस्यों को लगा कि यह सागर सरहदी के स्टाइल का नहीं है। जब यह बात सागर तक पहुंची, तो उन्होंने कहा कि अगर स्टाइल नहीं लग रहा तो बच्चों से लिखवा लो।


फिर यश चोपड़ा रात में अपने असिस्टेंट्स के साथ सागर के कमरे में गए और बड़े प्यार से उनसे अनुरोध किया कि एक बार फिर प्रयास करें। सागर ने कहा कि अच्छा खाना खिलाओगे तो ट्राई करूंगा। यश जी ने वादा किया। अगली सुबह सागर ने चार-पांच बजे उठकर चाय पीते हुए नया सीन लिख दिया। जब वह सीन यूनिट को दिखाया गया तो सबकी तारीफ हुई। यही सीन आज 'सिलसिला' का सबसे यादगार और बेहतरीन सीन माना जाता है, जिसमें जया और संजीव कुमार आमने-सामने बैठे हैं और बात बहुत सरल तरीके से कही जाती है।


सागर सरहदी ने बताया कि 'सिलसिला' लिखते समय उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि यह इतनी बड़ी और क्लासिक फिल्म बनेगी। वे थकान महसूस कर रहे थे और कई बार लगा कि यह लाइन छोड़ दें, लेकिन जिम्मेदारी और यश चोपड़ा की सुविधाओं के कारण उन्होंने पूरी मेहनत की। 'कभी कभी' के मुकाबले 'सिलसिला' में ज्यादा मेहनत लगी और यह ज्यादा मुकम्मल बनी। फिल्म को रियल लाइफ से जोड़कर देखा गया और यह आज भी लोगों के दिलों में बसी है।


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