भारत में सदियों से खेती की सबसे बड़ी चुनौती कम उत्पादकता रही है. पानी का गैर-प्रभावी इस्तेमाल, आधुनिक मशीनों की कमी और काफी हद तक मानसून पर अत्यधिक निर्भरता, हमेशा से कृषि क्षेत्र की मुश्किलें बढ़ाती रही हैं. लेकिन, अब खेतों की यह तस्वीर तेजी से बदल रही है. ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI), ड्रोन और प्रिसिजन फार्मिंग जैसी उन्नत तकनीकें अब सीधे खेतों तक पहुंच रही हैं.
सरकार भी ‘राष्ट्रीय कृषि विकास योजना’ (RKVY) जैसी पहलों के माध्यम से इस तकनीकी बदलाव को पूरा समर्थन दे रही है. इसका सीधा सा लक्ष्य खेती को केवल बड़े रकबे तक सीमित न रखकर, इसे अधिक कुशल और लाभदायक बनाना है. एग्री-टेक इकोसिस्टम में आ रहे इस बड़े बदलाव का सीधा फायदा उन कंपनियों को मिल रहा है, जो तकनीक के जरिए कृषि क्षेत्र की पुरानी समस्याओं का समाधान निकाल रही हैं. आइए उन कंपनियों के बारे में विस्तार से जानते हैं, जो इस एग्री-टेक क्रांति का नेतृत्व कर रही हैं.
1- UPLदुनिया की दिग्गज एग्रो-केमिकल और बीज उत्पादक कंपनियों में शुमार यूपीएल (UPL) अब एग्री-टेक आधारित बिजनेस मॉडल की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रही है. दिसंबर तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन काफी उत्साहजनक रहा और इसकी आय 12 प्रतिशत बढ़कर 12,269 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई. वॉल्यूम में यह शानदार ग्रोथ मुख्य रूप से यूरोप और लैटिन अमेरिकी देशों में इसके उत्पादों की भारी मांग के कारण आई है. हालांकि, इस तिमाही में इसका शुद्ध मुनाफा पिछले साल के 853 करोड़ रुपये से घटकर 490 करोड़ रुपये रह गया, लेकिन यह पिछली कुछ कमजोर तिमाहियों की तुलना में एक स्पष्ट सुधार है. कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन भी सुधरकर लगभग 18 प्रतिशत पर आ गया है. सबसे खास बात यह है कि यूपीएल का बीज कारोबार ‘एडवांटा’ (Advanta) 20 प्रतिशत से ज्यादा की दर से बढ़ रहा है और कंपनी जल्द ही इसका आईपीओ लाकर निवेशकों के लिए एक बड़ी वैल्यू अनलॉक करने की तैयारी में है.
2- PI Industriesपीआई इंडस्ट्रीज (PI Industries) घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों ही बाजारों में अपनी मजबूत पकड़ रखती है. गुजरात में इसकी आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग और शानदार रिसर्च फैसिलिटी है. हालांकि, हालिया दिसंबर तिमाही कंपनी के लिए थोड़ी चुनौतीपूर्ण साबित हुई. वैश्विक स्तर पर कमजोर मांग और ग्राहकों की सुस्त खरीदारी की वजह से इसकी आय 1,901 करोड़ रुपये से लुढ़ककर 1,376 करोड़ रुपये रह गई. मुनाफे में भी गिरावट दर्ज की गई और यह 373 करोड़ रुपये से घटकर 311 करोड़ रुपये पर आ गया. इसके बावजूद, कंपनी ने बेहतरीन लागत प्रबंधन और अपने फार्मा बिजनेस में 50 फीसदी के उछाल के दम पर मुनाफे को काफी हद तक सुरक्षित रखा. भविष्य को लेकर कंपनी की रणनीति एकदम साफ है. कंपनी पहले ही पांच नए मॉलिक्यूल बाजार में उतार चुकी है और पूरी तरह से कर्ज मुक्त रहते हुए, वित्त वर्ष 2027 तक नई तकनीकों के विस्तार पर 500 से 600 करोड़ रुपये का निवेश करने जा रही है.
3- Kaveri Seedसाल 1976 से हाइब्रिड बीजों के बाजार में काम कर रही कावेरी सीड कंपनी (Kaveri Seed Company) लगातार रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) पर फोकस कर रही है. कृषि क्षेत्र में मौसम और फसल चक्र का सीधा असर बीज कारोबार पर पड़ता है, फिर भी कंपनी ने अपनी आय में करीब 21 प्रतिशत का शानदार उछाल दर्ज करते हुए इसे 210 करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया. मक्का, धान और सब्जियों के बीजों की बाजार में जबरदस्त मांग देखी जा रही है. हालांकि, बढ़ती उत्पादन लागत का बोझ पूरी तरह से किसानों पर न डाल पाने के कारण इसका शुद्ध मुनाफा 15 करोड़ रुपये से मामूली रूप से गिरकर 13 करोड़ रुपये रह गया. कंपनी अपनी आय का 5 से 10 प्रतिशत हिस्सा नई रिसर्च पर खर्च करती है, जिससे इसके पास भविष्य के लिए नए हाइब्रिड बीजों की एक मजबूत पाइपलाइन मौजूद है. विदेशी बाजारों में भी कंपनी की कमाई तेजी से बढ़ रही है.
4- Jain Irrigation Systemsखेतों में पानी के सटीक और सही इस्तेमाल के लिए जैन इरिगेशन सिस्टम्स (Jain Irrigation Systems) के माइक्रो-इरिगेशन और सोलर पंप टूल्स काफी लोकप्रिय हो रहे हैं. कंपनी की आय सालाना आधार पर 17 प्रतिशत उछलकर 1,600 करोड़ रुपये के स्तर को छू गई है. सबसे अहम बदलाव यह आया है कि कंपनी का रिटेल बिजनेस लगभग 24 फीसदी बढ़ा है. इससे सरकारी प्रोजेक्ट्स पर कंपनी की निर्भरता कम हो रही है और इसकी वर्किंग कैपिटल में भारी सुधार देखने को मिल रहा है. एकमुश्त खर्चों के कारण भले ही इस तिमाही में कंपनी को 47 करोड़ रुपये का घाटा हुआ हो, लेकिन प्रबंधन नए हाई-टेक सेगमेंट्स में लगातार निवेश कर रहा है. कंपनी का बेवरेज मैन्युफैक्चरिंग प्लांट चालू हो चुका है और टमाटर प्रोसेसिंग के जॉइंट वेंचर से अगले वित्त वर्ष (FY27) तक शानदार कमाई शुरू होने की उम्मीद है.
क्या आपको लगाना चाहिए इन स्टॉक्स पर दांव?निवेश के नजरिए से एग्री-टेक थीम लंबी अवधि में बेहद मजबूत और सुरक्षित दिखाई देती है. खेती में उत्पादकता बढ़ाने की जरूरत हमेशा बनी रहेगी और तकनीक इसका सबसे सटीक समाधान है. लेकिन किसी भी निवेशक के तौर पर आपको सतर्क रहने की जरूरत है. हर कंपनी की आर्थिक स्थिति अलग है. कुछ कंपनियों के फंडामेंटल बहुत मजबूत हैं, जबकि कुछ अभी सुधार के दौर से गुजर रही हैं. शेयर बाजार में पैसा लगाने से पहले इन कंपनियों की बैलेंस शीट, मार्जिन और उनके कमाई के स्रोतों का अच्छी तरह विश्लेषण जरूर करें.
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