Mahabharat Amba Ki Katha: महाभारत का युद्ध 18 दिनों तक चला था. पांडवों और कौरवों के बीच हुआ ये युद्ध वर्षों से संचित कर्मों और श्रापों का परिणाम था. इस युद्ध में धर्म की ओर खड़े पाडवों की विजय हुई थी. इस युद्ध का निर्णायक मोड़ था पितामह भीष्म का शरशय्या पर लेटना. भीष्म पितामह 58 दिनों तक शरशय्या पर लेते रहे थे. सूर्य के उत्तरायण होने पर उन्होंने प्राण त्यागे थे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भीष्म के पतन या कहें कि अंत का कारण एक राजकुमारी थी? आइए जानते हैं ये रोचक कथा.
महाभारत की कथा के अनुसार, सत्यवती और शांतनु के पुत्र विचित्रवीर्य के विवाह के लिए भीष्म पितामह ने काशीराज की तीन पुत्रियों- अंबा, अंबिका और अंबालिका का बलपूर्वक हरण किया था. इसके बाद ज्येष्ठ पुत्री अंबा ने भीष्म को बताया कि उन्होंने मन ही मन राजा शाल्व को अपना पति स्वीकार कर लिया है. इस पर भीष्म पितामह ने सम्मान के साथ अंबा को शाल्व के पास भेज दिया, लेकिन, नियति ने कुछ और ही सोचा था.
अंबा दर-दर भटकीराजा शाल्व ने पराई पुरुष द्वारा हरण की गई स्त्री को अपनाने से इनकार कर दिया. अंबा वापस आईं और उन्होंने भीष्म से कहा कि वो उनसे विवाह कर लें. तब भीष्म ने अपनी ब्रह्मचर्य की प्रतिज्ञा का हवाला दिया और अंबा से विवाह करने से मना कर दिया. इसके बाद अंबा दर-दर भटकीं और काफी अपमान सहा. अंत में उन्होंने भगवान परशुराम से सहायता मांगी.
इसके बाद परशुराम और भीष्म पितामह के बीच युद्ध हुआ, लेकिन भीष्म परास्त न हुए. आखिरकार अंबा ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की. फिर जब भगवान ने प्रसन्न होकर उनसे वर मांगने को कहा तो उन्होंने शिव जी से ये वरदान मांगा कि वो ही भीष्म की मृत्यु की वजह बनें. शिव जी ने कहा कि ये अगले जन्म में ही संभव होगा. ये सुनकर अंबा ने अपनी देह त्याग दी.
शिखंडी के रूप में हुआ अंबा का जन्मअगले जन्म में अंबा ने राजा द्रुपद के यहां शिखंडी के रूप में लिया. द्रुपद ने उनको एक पुत्र की तरह पाला और उनका विवाह भी एक कन्या से कराया, लेकिन वास्तविकता के सामने आने के बाद शिखंडी की पत्नी उनको छोड़कर चली गई. पौराणिक कथा के अनुसार, एक यक्ष की सहायता से शिखंडी को पुरुषत्व प्राप्त हुआ, जिसके बाद वह एक कुशल योद्धा बनें.
महाभारत युद्ध के दसवें दिन अर्जुन ने अपने रथ पर शिखंडी को बिठाया था. भीष्म पितामह को देखकर शिखंडी आगे हुए. भीष्म ने जैसे ही शिखंडी को सामने देखा, उन्होंने अपने शस्त्र त्याग दिए. उन्होंने तर्क दिया कि शिंखडी स्त्री है. श्रीकृष्ण ने कहा कि शिखंडी का पालन-पोषण पुरुष की तरह हुआ है. उनके पास पुरुषत्व भी है, लेकिन भीष्म अपने आदर्शों पर अडिग रहे और धनुष नीचे रख दिया.
अर्जुन ने की भीष्म पर बाणों की वर्षाशिखंडी ने भीष्म पर लगातार प्रहार किए, लेकिन उसके बाणों में इतनी शक्ति नहीं थी, जिससे पितामह का अभेद्य कवच भेदा जा सकता. तब अर्जुन ने शिखंडी की ओट लेकर भीष्म पर बाणों की वर्षा शुरू कर दी. अंत में भीष्म बाणों की शय्या पर गिर पड़े और इस तरह शिखंडी रूप में अंबा का भीष्म पितामह से प्रतिशोध पूरा हुआ.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.