अमेरिकी जनता से कोई दुश्मनी नहीं… जंग के बीच ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन का खुला पत्र
TV9 Bharatvarsh April 02, 2026 05:42 AM

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन (Masoud Pezeshkian) ने अमेरिकी जनता को संबोधित करते हुए एक खुला पत्र जारी किया है, जिसमें उन्होंने साफ कहा कि ईरान अमेरिकियों के प्रति कोई दुश्मनी नहीं रखता है. उन्होंने कहा कि ईरान के लोगों के मन में आम अमेरिकियों के लिए कोई दुश्मनी नहीं है. पेज़ेश्कियन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बना हुआ है.

उन्होंने अमेरिकी नागरिकों से राजनीतिक बयानबाजी से परे देखने और ईरान के बारे में अपनी धारणा पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है. अपने पत्र में पेज़ेश्कियन ने सरकारों और आम नागरिकों के बीच स्पष्ट अंतर करने की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने पत्र में लिखा कि ईरानी लोग किसी भी देश के लोगों के प्रति शत्रुता नहीं रखते, जिसमें अमेरिका भी शामिल है. उन्होंने इसे केवल राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि एक गहरी सांस्कृतिक सोच बताया.

‘ईरान ने कभी कोई युद्ध शुरू किया’

पत्र में, पेज़ेश्कियन ने कहा कि ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच संबंधों को व्यापक रूप से गलत समझा जाता है, और उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान ने अपने आधुनिक इतिहास में कभी भी आक्रामकता, विस्तारवाद, उपनिवेशवाद या प्रभुत्व का मार्ग नहीं चुना है, और न ही कभी कोई युद्ध शुरू किया है. उन्होंने कहा कि इसके बजाय देश ने दृढ़ता और बहादुरी से उन लोगों को खदेड़ दिया है जिन्होंने उस पर हमला किया है.

‘ईरानी सरकार और जनता में अंतर करते हैं’

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि ईरान अन्य देशों, जिनमें संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोप और पड़ोसी देश शामिल हैं उनके प्रति कोई शत्रुता नहीं रखता है. उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ईरानी सरकार और जनता में अंतर करते हैं. इसके साथ ही उन्होंने हाल ही में अमेरिका द्वारा की गई कार्रवाइयों को नागरिकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने वाली आक्रामकता बताया और चेतावनी दी कि ऐसे कदम अस्थिरता पैदा करते हैं और ऐसे असंतोष के बीज बोते हैं जो वर्षों तक बने रहेंगे.

ईरान को खतरे के रूप में पेश किए जाने की आलोचना

पेज़ेश्कियन ने ईरान की कार्रवाई का बचाव करते हुए इसे वैध आत्मरक्षा पर आधारित एक संतुलित प्रतिक्रिया बताया और कहा कि परमाणु समझौते से हटने और तनाव बढ़ाने का निर्णय अमेरिकी सरकार द्वारा किए गए विनाशकारी विकल्प थे. ईरानी राष्ट्रपति ने पश्चिमी देशों द्वारा ईरान को खतरे के रूप में पेश किए जाने की आलोचना की. उनका कहना है कि यह धारणा न तो ऐतिहासिक तथ्यों से मेल खाती है और न ही वर्तमान परिस्थितियों से. उन्होंने अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या वास्तव में ईरान से कोई ऐसा खतरा था, जो इन कदमों को सही ठहराता हो.

‘अमेरिका की वैश्विक छवि को ही नुकसान’

उन्होंने आम नागरिकों की पीड़ा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान की ओर इशारा करते हुए कहा ‘क्या निर्दोष बच्चों का नरसंहार करना या किसी देश पर बमबारी करके उसे ‘पत्थर युग में वापस भेज देने’ का दावा करना, संयुक्त राज्य अमेरिका की वैश्विक प्रतिष्ठा को और नुकसान पहुंचाने के अलावा किसी और उद्देश्य को पूरा करता है?’. पेज़ेश्कियन ने युद्ध के कारण होने वाले नागरिक नुकसान पर गहरी चिंता जताई. उन्होंने मासूम बच्चों की मौत और बुनियादी ढांचे के विनाश का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाई से अमेरिका की वैश्विक छवि को ही नुकसान होता है.

अमेरिका पर इजराइल के प्रतिनिधि के रूप में काम करने का आरोप

ईरानी राष्ट्रपति ने इजराइल की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए अमेरिका पर इजराइल के प्रतिनिधि के रूप में काम करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि वाशिंगटन बाहरी प्रभाव में काम कर रहा है, और पूछा कि क्या अमेरिका “इजराइल के प्रतिनिधि के रूप में संघर्ष में शामिल हुआ है. उन्होंने इसे एक प्रॉक्सी भूमिका की तरह बताया, जो क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है.

इस पत्र में ईरान के अमेरिका पर अविश्वास के पीछे कई ऐतिहासिक घटनाओं का जिक्र किया गया है, जिनमें 1953 का तख्तापलट, दशकों से चले आ रहे प्रतिबंध और अतीत के सैन्य टकराव शामिल हैं.पेज़ेश्कियन ने 1953 के तख्तापलट, आर्थिक प्रतिबंधों और पिछले सैन्य संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि इन घटनाओं ने ईरान में अमेरिका के प्रति अविश्वास पैदा किया.उन्होंने कहा कि इन नीतियों ने दोनों देशों के रिश्तों को और जटिल बना दिया.

‘ईरान ने आक्रामकता का रास्ता नहीं अपनाया’

उन्होंने पत्र में लिखा, ‘परिवर्तन का निर्णायक मोड़ ईरान के अपने संसाधनों के राष्ट्रीयकरण को रोकने के उद्देश्य से किया गया हस्तक्षेप था’. उन्होंने आगे कहा कि बाद की नीतियों ने ईरानियों के बीच अविश्वास को और गहरा कर दिया. इसके बावजूद, पेज़ेश्कियन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ईरान ने आक्रामकता का रास्ता नहीं अपनाया है. उन्होंने कहा, ‘ईरान ने अपने आधुनिक इतिहास में कभी भी आक्रामकता का मार्ग नहीं चुना है, देश ने केवल आक्रमण होने पर ही अपनी रक्षा की है’.

पेज़ेश्कियन ने वर्तमान क्षण को एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में प्रस्तुत किया और निरंतर टकराव के दीर्घकालिक परिणामों के बारे में चेतावनी दी.उन्होंने लिखा, ‘आज दुनिया एक चौराहे पर खड़ी है। टकराव के रास्ते पर चलते रहना पहले से कहीं अधिक महंगा और व्यर्थ है’. उन्होंने अमेरिकियों से प्रचलित धारणाओं पर सवाल उठाने और तनाव बढ़ाने के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाने का आग्रह किया.

ईरान के विकास पर डाला प्रकाश

उन्होंने प्रतिबंधों के बावजूद ईरान के विकास पर भी प्रकाश डाला और शिक्षा, प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य सेवा में हुई प्रगति को मापने योग्य, अवलोकन योग्य वास्तविकताएं बताया जो नकारात्मक चित्रणों का खंडन करती हैं. अपने संदेश के अंत में पेज़ेश्कियन ने अमेरिकियों से आग्रह किया कि वे उस चीज़ से परे देखें जिसे उन्होंने गलत सूचना बताया और ईरान और उसके लोगों की व्यापक समझ विकसित करने में संलग्न हों. उन्होंने अमेरिकियों से पूछा कि क्या उन्हें जो जानकारी दी जा रही है, वह ईरान की वास्तविकता से मेल खाती है.

यह पत्र ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है, दोनों पक्ष तीखी बयानबाजी कर रहे हैं और कूटनीतिक समाधान अभी भी अनिश्चित बना हुआ है. यह पत्र अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संभावित संबोधन से पहले आया है, जो ईरान से जुड़े मौजूदा हालात पर बोलने वाले हैं.

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